भूकंप

जापान में 7.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से दहशत,चार घायल; वेनेजुएला में भी दो बड़े झटकों के बाद आपातकाल घोषित

टोक्यो,25 जून (युआईटीवी)- जापान के पूर्वोत्तर हिस्से में गुरुवार सुबह आए 7.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया। भूकंप के तेज झटकों से कई इलाकों में लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम चार लोग घायल हुए हैं,जबकि कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित हो गया। हालाँकि,राहत की बात यह रही कि किसी बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान या सुनामी जैसी स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब साढ़े सात बजे आया। प्रारंभिक तौर पर इसकी तीव्रता 6.9 आंकी गई थी,लेकिन बाद में विस्तृत विश्लेषण के बाद इसे बढ़ाकर 7.2 कर दिया गया। भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत के पूर्वी तट के पास समुद्र के भीतर लगभग 40 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। विशेषज्ञों के अनुसार इस गहराई पर आने वाला भूकंप व्यापक क्षेत्र में महसूस किया जा सकता है और यही वजह रही कि इसके झटके कई प्रांतों तक पहुंचे।

जापान के सात-स्तरीय भूकंपीय पैमाने पर हाशिकामी नगर में इसकी तीव्रता ‘अपर 6’ दर्ज की गई,जबकि हाचिनोहे शहर में ‘लोअर 6’ स्तर के झटके महसूस किए गए। जापानी भूकंपीय पैमाने के अनुसार ‘अपर 6’ श्रेणी का भूकंप अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। इस स्तर के झटकों में लोगों के लिए खड़े रहना मुश्किल हो जाता है और बिना सहारे चलना लगभग असंभव हो सकता है। घरों और कार्यालयों के भीतर रखे भारी फर्नीचर अपनी जगह से खिसक सकते हैं,जबकि अलमारियों और रैक में रखी वस्तुएं नीचे गिर सकती हैं।

भूकंप के बाद विभिन्न क्षेत्रों से लोगों के भयभीत होकर सड़कों पर निकलने की खबरें सामने आईं। कई स्थानों पर स्कूलों,कार्यालयों और सार्वजनिक भवनों को एहतियात के तौर पर खाली कराया गया। हालाँकि,प्रशासन ने तेजी से स्थिति का आकलन किया और राहत एवं आपदा प्रबंधन दलों को सक्रिय कर दिया।

जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप का असर केवल इवाते प्रांत तक सीमित नहीं रहा। इसके झटके होक्काइडो,अकिता,फुकुशिमा,मियागी,यामागाता और राजधानी टोक्यो समेत आसपास के विस्तृत क्षेत्रों में भी महसूस किए गए। इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र में झटके महसूस होने से लोगों में चिंता बढ़ गई,क्योंकि जापान पहले भी कई विनाशकारी भूकंपों का सामना कर चुका है।

भूकंप के बाद सबसे बड़ी चिंता सुनामी को लेकर थी,लेकिन राहत की बात यह रही कि एजेंसी ने किसी प्रकार की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की। विशेषज्ञों ने बताया कि भूकंप की प्रकृति और समुद्र के भीतर उसकी स्थिति का आकलन करने के बाद सुनामी का खतरा नहीं पाया गया। इसके बावजूद तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई।

अधिकारियों ने लोगों को संभावित आफ्टरशॉक्स यानी बाद के झटकों के प्रति भी सचेत किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतने बड़े भूकंप के बाद समान या अपेक्षाकृत कम तीव्रता के कई झटके आने की संभावना बनी रहती है। यही कारण है कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से सावधानी बरतने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने को कहा गया है।

भूकंप के बाद परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई,क्योंकि जापान का इतिहास इस मामले में संवेदनशील रहा है। वर्ष 2011 में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी के बाद फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। हालाँकि,इस बार संयंत्र संचालकों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परमाणु ऊर्जा केंद्र में कोई असामान्यता दर्ज नहीं की गई है।

हिगाशिदोरी परमाणु ऊर्जा संयंत्र,ओनागावा परमाणु ऊर्जा संयंत्र,फुकुशिमा दाइइची परमाणु ऊर्जा संयंत्र और फुकुशिमा दाइनी परमाणु ऊर्जा संयंत्र की विस्तृत जाँच की गई। सभी संयंत्र सामान्य रूप से कार्य करते पाए गए और किसी प्रकार के विकिरण रिसाव या तकनीकी समस्या की सूचना नहीं मिली। इस जानकारी ने लोगों और प्रशासन दोनों को बड़ी राहत प्रदान की है।

भूकंप का केंद्र 40.2 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 142.3 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। विशेषज्ञ अब इस भूकंपीय गतिविधि का अध्ययन कर रहे हैं,ताकि इसके कारणों और संभावित भविष्य के प्रभावों का बेहतर आकलन किया जा सके। जापान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है,क्योंकि यह प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है। इस क्षेत्र में कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं,जिससे अक्सर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियाँ होती रहती हैं।

इसी बीच दुनिया के दूसरे हिस्से से भी भूकंप की गंभीर खबर सामने आई है। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में कुछ ही मिनटों के अंतराल पर दो शक्तिशाली भूकंप आए, जिनसे व्यापक तबाही की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार पहला भूकंप 7.1 तीव्रता का था,जबकि उसके केवल एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका दर्ज किया गया।

इन दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी काराकास से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित तटीय नगर मोरोन के निकट था। दोनों झटकों की गहराई मात्र 10 किलोमीटर दर्ज की गई, जो उन्हें और अधिक खतरनाक बनाती है। कम गहराई पर आने वाले भूकंपों का प्रभाव सतह पर अधिक तीव्रता से महसूस होता है और वे बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचा सकते हैं।

वेनेजुएला में भूकंप के झटके राजधानी काराकास समेत कई प्रमुख शहरों में महसूस किए गए। कई इमारतों को नुकसान पहुँचने और बुनियादी ढाँचे के प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने पूरे देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। सरकार ने राहत और बचाव एजेंसियों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है तथा प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुँचाने का काम शुरू कर दिया गया है।

जापान और वेनेजुएला में लगभग एक ही समय पर आए इन शक्तिशाली भूकंपों ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं की गंभीरता को उजागर किया है। जहाँ जापान अपनी उन्नत आपदा प्रबंधन प्रणाली के कारण बड़े नुकसान से बचता दिखाई दिया,वहीं वेनेजुएला में हालात अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं। दोनों देशों में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।