फ्रांस में इबोला का अलर्ट (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

फ्रांस में इबोला का अलर्ट,संक्रमित डॉक्टर के संपर्क में आए पाँच लोग आइसोलेट; कांगो में 291 मौतों से बढ़ी चिंता

पेरिस,25 जून (युआईटीवी)- अफ्रीका में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस के बीच अब यूरोप में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। फ्रांस ने ऐसे पाँच लोगों की पहचान की है,जो इबोला वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। इन सभी लोगों ने उस डॉक्टर के साथ हवाई यात्रा की थी, जिसका इबोला परीक्षण बाद में पॉजिटिव पाया गया। हालाँकि,स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है,लेकिन एहतियात के तौर पर सभी संभावित संपर्कों को अलग रखा गया है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।

फ्रांस की स्वास्थ्य मंत्री स्टेफनी रिस्ट ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि संक्रमित पाए गए डॉक्टर हाल ही में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में एक चिकित्सा मिशन पर कार्य करने के बाद फ्रांस लौटे थे। डॉक्टर को उस समय यह जानकारी नहीं थी कि वह इबोला वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। मंत्री ने कहा कि जब डॉक्टर विमान में सवार हुए, तब उनमें बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण मौजूद नहीं थे। उड़ान के दौरान उन्हें सिरदर्द की शिकायत हुई,जिसके बाद उन्होंने स्वयं स्वास्थ्य अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार डॉक्टर ने जिम्मेदारी का परिचय देते हुए संभावित खतरे को देखते हुए तत्काल अलर्ट जारी किया,ताकि पेरिस पहुँचने के बाद चिकित्सा टीम उनकी जाँच और निगरानी कर सके। विमान के फ्रांस पहुँचते ही डॉक्टर को विशेष चिकित्सा व्यवस्था के तहत अस्पताल ले जाया गया और तुरंत आइसोलेशन में रखा गया। डॉक्टर की जाँच में इबोला संक्रमण की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू कर दी गई।

प्रारंभिक जाँच में ऐसे पाँच लोगों की पहचान की गई है,जिन्होंने डॉक्टर के साथ यात्रा की थी और संक्रमण के संपर्क में आने की आशंका है। इन सभी को निगरानी में रखा गया है और चिकित्सकीय जाँच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी तक इनमें से किसी व्यक्ति में इबोला के लक्षण नहीं पाए गए हैं,लेकिन वायरस के संभावित प्रसार को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

मंत्री ने बताया कि संक्रमित डॉक्टर को 21 दिनों तक विशेष निगरानी में रखा जाएगा। इबोला वायरस का ऊष्मायन काल सामान्य रूप से 2 से 21 दिनों के बीच होता है। इस अवधि के दौरान संक्रमित व्यक्ति में बुखार,सिरदर्द,कमजोरी,मांसपेशियों में दर्द और अन्य गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस समय को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं।

फ्रांसीसी स्वास्थ्य एजेंसियाँ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संक्रमण के किसी भी संभावित मामले को रोकने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ मौजूद हैं। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आम नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है।

इस बीच यूरोपीय सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ने कहा है कि यूरोप में रहने वाले लोगों के लिए संक्रमण का खतरा फिलहाल बहुत कम है। संस्था के विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप की मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली,निगरानी व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र संक्रमण के बड़े पैमाने पर फैलने की संभावना को काफी हद तक कम कर देते हैं। फिर भी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा और वैश्विक संपर्कों को देखते हुए सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है।

दूसरी ओर अफ्रीका में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है और संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कांगो सरकार द्वारा जारी ताजा आँकड़ों के अनुसार देश में अब तक 1,118 पुष्ट मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 291 लोगों की मौत हो चुकी है,जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता और बढ़ गई है।

कांगो के संचार और मीडिया मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच पर जारी अपडेट में बताया कि अब तक 122 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं 408 मरीजों का विभिन्न चिकित्सा केंद्रों में इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार बीमारी की मृत्यु दर लगभग 26 प्रतिशत बनी हुई है,जो इसकी गंभीरता को दर्शाती है।

महामारी की निगरानी के तहत स्वास्थ्य एजेंसियों ने 138 संदिग्ध मामलों की पहचान की है। इन सभी मामलों की जाँच की जा रही है और संभावित संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा रहा है। संपर्क ट्रेसिंग अभियान के तहत 77.1 प्रतिशत संभावित संपर्कों की निगरानी की जा चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है।

कांगो का पूर्वी इतुरी प्रांत अभी भी इस प्रकोप का मुख्य केंद्र बना हुआ है। अधिकांश नए मामले इसी क्षेत्र से सामने आ रहे हैं। यहाँ स्वास्थ्यकर्मी कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और संक्रमण को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर दक्षिण किवू प्रांत से कुछ राहत की खबर मिली है। अधिकारियों के अनुसार 26 मई के बाद इस क्षेत्र में संक्रमण का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद निगरानी,मरीजों की देखभाल और संपर्क ट्रेसिंग का काम लगातार जारी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है। संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा है कि अफ्रीका में मामलों की संख्या बढ़ने के बावजूद वैश्विक स्तर पर जोखिम अभी भी कम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियाँ और प्रभावित देशों की सरकारें मिलकर संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए काम कर रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इबोला वायरस दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में से एक है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है और गंभीर मामलों में मृत्यु का कारण बन सकता है। हालाँकि,समय पर पहचान,उचित उपचार और सख्त निगरानी से इसके प्रसार को रोका जा सकता है।

फ्रांस में सामने आया यह मामला दिखाता है कि वैश्विक यात्रा के इस दौर में किसी भी क्षेत्र में फैली महामारी दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुँच सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और निगरानी को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। फिलहाल फ्रांस और कांगो दोनों देशों में स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।