वाशिंगटन,27 जून (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की चुनावी व्यवस्था में व्यापक बदलाव की वकालत करते हुए कांग्रेस से ‘अमेरिका बचाओ अधिनियम’ को जल्द पारित करने की अपील की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी लोकतंत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सख्त चुनाव सुधारों की आवश्यकता है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि हर मतदाता के लिए फोटो पहचान पत्र और अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य किया जाए। साथ ही मेल-इन बैलेट प्रणाली पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए जाएँ,ताकि चुनावों में कथित अनियमितताओं को रोका जा सके।
ट्रंप ने यह बातें फेथ एंड फ्रीडम कोएलिशन के ‘रोड टू मेजॉरिटी’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहीं। अपने लंबे भाषण के दौरान उन्होंने चुनाव सुधारों को अमेरिकी लोकतंत्र के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि यदि चुनाव प्रणाली को मजबूत नहीं बनाया गया तो जनता का भरोसा लगातार कमजोर होता जाएगा। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह बिना देरी किए ‘अमेरिका बचाओ अधिनियम’ को मंजूरी दे और चुनाव प्रक्रिया में व्यापक सुधार सुनिश्चित करे।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि चुनाव में मतदान करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान पूरी तरह सत्यापित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी मतदाताओं के लिए फोटो पहचान पत्र अनिवार्य होना चाहिए,ताकि किसी भी प्रकार की फर्जी वोटिंग की संभावना समाप्त हो सके। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मतदान से पहले प्रत्येक व्यक्ति को अमेरिकी नागरिक होने का प्रमाण भी प्रस्तुत करना चाहिए। उनके अनुसार मतदान का अधिकार केवल अमेरिकी नागरिकों तक सीमित होना चाहिए और इसके लिए सख्त सत्यापन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
ट्रंप ने मेल-इन बैलेट प्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डाक के माध्यम से मतदान केवल विशेष परिस्थितियों तक सीमित होना चाहिए। उनके अनुसार केवल बीमारी, शारीरिक विकलांगता,सेना में तैनाती या आवश्यक सरकारी यात्रा जैसे मामलों में ही मेल-इन बैलेट की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में डाक के माध्यम से मतदान की व्यवस्था चुनावी प्रक्रिया में अनावश्यक जटिलताएँ पैदा करती है और इससे विवाद की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि चुनाव प्रणाली को सरल,पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना समय की माँग है। उन्होंने कहा कि मतदान की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए,जिस पर सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों को समान रूप से विश्वास हो। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित चुनाव सुधार अमेरिकी लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाएँगे तथा चुनाव परिणामों को लेकर उठने वाले विवादों में कमी आएगी।
इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के साथ-साथ अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ रिपब्लिकन नेता भी इन सुधारों का विरोध कर रहे हैं,जिससे चुनाव सुधारों की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने विशेष रूप से अलास्का की सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें इस कानून का समर्थन करना चाहिए।
ट्रंप ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे लिसा मुर्कोव्स्की से संपर्क कर उन्हें ‘अमेरिका बचाओ अधिनियम’ के समर्थन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक विधेयक नहीं,बल्कि देश के लोकतांत्रिक भविष्य से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण कानून है। उनके अनुसार यदि चुनाव प्रणाली मजबूत होगी तो लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास और अधिक बढ़ेगा।
अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कैलिफोर्निया की चुनाव व्यवस्था की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि वहाँ चुनाव परिणाम आने में अत्यधिक समय लगता है,जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी मतगणना पूरी नहीं हो पाती और इससे जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है। ट्रंप ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव परिणाम समय पर घोषित होना बेहद आवश्यक है।
राष्ट्रपति ने बिना कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए चुनावी धांधली के आरोप भी दोहराए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं की जाँच की जानी चाहिए। अपने भाषण में उन्होंने स्पेंसर प्रैट और स्टीव हिल्टन का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव से जुड़े कुछ मामलों में निष्पक्ष जाँच की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अमेरिकी अटॉर्नी से इन मामलों की जाँच करने का अनुरोध भी किया है।
ट्रंप ने कैलिफोर्निया की मतगणना प्रक्रिया की तुलना दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से करते हुए कहा कि वहाँ लगभग तीन करोड़ मतों की गिनती चुनाव वाली रात ही पूरी कर ली गई थी। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वोटों की गिनती कुछ ही घंटों में पूरी हो गई और परिणामों को लेकर कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया। इसके विपरीत उन्होंने कैलिफोर्निया में मतगणना की धीमी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि लंबे समय तक मतगणना चलने से संदेह और विवाद पैदा होते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मतगणना कई दिनों या कई सप्ताह तक चलती रहती है,तो चुनाव परिणामों में हेरफेर की आशंकाएँ बढ़ जाती हैं। ट्रंप का कहना था कि आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से चुनाव परिणामों की घोषणा बहुत कम समय में संभव है और अमेरिका को भी इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने समर्थकों से आगामी मध्यावधि चुनावों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं,बल्कि देश की दिशा तय करने वाले चुनाव होंगे। उन्होंने समर्थकों से अधिक संख्या में मतदान करने और चुनाव सुधारों का समर्थन करने का आग्रह किया। ट्रंप ने कहा कि यदि उनके समर्थक संगठित होकर मतदान करेंगे,तो चुनावी सुधारों के एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव का उल्लेख किया और दोहराया कि उस चुनाव में धांधली हुई थी। हालाँकि,उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में कोई नया प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 के चुनाव परिणामों को लेकर कई अदालतों और चुनाव अधिकारियों ने व्यापक स्तर पर चुनावी धांधली के दावों को स्वीकार नहीं किया था। इसके बावजूद ट्रंप लगातार चुनाव सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं।
चुनाव सुधारों के अलावा ट्रंप ने अपने भाषण में धर्म,आव्रजन नीति,राष्ट्रीय सुरक्षा,अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मजबूत सीमाएँ,सुरक्षित चुनाव,मजबूत अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मूल्यों की रक्षा उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाना होगा।
ट्रंप के इस संबोधन के बाद अमेरिका में चुनाव सुधारों को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। जहाँ उनके समर्थक चुनाव प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए इन प्रस्तावों का समर्थन कर रहे हैं,वहीं आलोचकों का मानना है कि ऐसे कई प्रस्तावों का असर मतदान तक पहुँच पर पड़ सकता है। ऐसे में कांग्रेस में इन प्रस्तावों को लेकर होने वाली चर्चा और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बनी रह सकती है।
