वाशिंगटन,27 जून (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए यूरोपीय देशों को बड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि यूरोप का कोई भी देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सर्विसेज टैक्स लागू करता है,तो उसके जवाब में अमेरिका उस देश से आयात होने वाले सभी सामानों पर तत्काल प्रभाव से 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। ट्रंप ने इस चेतावनी को केवल राजनीतिक बयान नहीं,बल्कि आधिकारिक सूचना बताते हुए स्पष्ट किया कि यह शुल्क किसी भी मौजूदा या भविष्य के व्यापार समझौते से ऊपर होगा और इसके लागू होने में किसी प्रकार की देरी नहीं की जाएगी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यूरोप के कई देश अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर डिजिटल सर्विसेज टैक्स लगाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार कुछ देश इस कर व्यवस्था को लागू करने के बेहद करीब पहुँच चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ऐसी किसी भी कार्रवाई को अपने व्यापारिक हितों के खिलाफ मानता है और उसका कड़ा जवाब देगा।
अपने संदेश में ट्रंप ने कहा कि जो भी देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सर्विसेज टैक्स लगाएगा,उसके सभी उत्पादों पर अमेरिका तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू कर देगा। उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त शुल्क उस देश के साथ पहले से लागू किसी भी व्यापार समझौते, हस्ताक्षरित समझौते या भविष्य में होने वाले किसी समझौते से अलग और उससे ऊपर होगा। उनका कहना था कि कोई भी व्यापारिक व्यवस्था इस टैरिफ को रोक नहीं सकेगी और संबंधित देश द्वारा टैक्स लागू करते ही अमेरिका भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगा।
ट्रंप ने अपने बयान में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि अमेरिका अपनी कंपनियों के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां दुनिया भर में निवेश करती हैं,रोजगार पैदा करती हैं और तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाती हैं। ऐसे में यदि किसी देश की ओर से उन पर अतिरिक्त कर लगाया जाता है,तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
डिजिटल सर्विसेज टैक्स पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक व्यापार और कर नीति का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। कई यूरोपीय देशों का मानना है कि बड़ी बहुराष्ट्रीय डिजिटल कंपनियाँ उनके देशों में कारोबार करके भारी मुनाफा कमाती हैं,लेकिन स्थानीय स्तर पर अपेक्षित कर का भुगतान नहीं करतीं। इसी कारण कई देशों ने डिजिटल सेवाओं से होने वाली आय पर अलग कर लगाने की योजना तैयार की है। दूसरी ओर अमेरिका का मानना है कि इस तरह के कर का सबसे अधिक असर अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर पड़ता है, इसलिए यह उनके साथ भेदभाव करने जैसा है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यदि यूरोप इस दिशा में आगे बढ़ता है तो अमेरिका भी अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कठोर कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारिक संबंधों में समानता और निष्पक्षता आवश्यक है तथा अमेरिका किसी भी ऐसे निर्णय को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुँचाए।
यह पहली बार नहीं है,जब ट्रंप ने टैरिफ को व्यापारिक और कूटनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की चेतावनी दी हो। अपने पहले कार्यकाल से लेकर वर्तमान कार्यकाल तक वह कई बार आयात शुल्क बढ़ाने की नीति को अमेरिका के हितों की रक्षा का प्रभावी माध्यम बताते रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि ऊँचे टैरिफ के जरिए अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण मिलता है और विदेशी देशों पर बेहतर व्यापारिक समझौते करने का दबाव बनाया जा सकता है।
हाल के महीनों में भी ट्रंप ने कई मौकों पर टैरिफ को अपनी आर्थिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बताया है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान के साथ संघर्ष के दौरान उन्होंने टैरिफ को रणनीतिक दबाव के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही थी। उस समय उन्होंने कई देशों को चेतावनी दी थी कि यदि वे ईरान को सैन्य सहायता या हथियार उपलब्ध कराते हैं,तो अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले उनके सभी उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।
ट्रंप ने उस समय यह भी कहा था कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियारों की आपूर्ति करेगा, उसके अमेरिका भेजे जाने वाले सामान पर बिना किसी छूट या रियायत के तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ा आवश्यक कदम बताया था। अब डिजिटल सर्विसेज टैक्स को लेकर दी गई नई चेतावनी यह संकेत देती है कि ट्रंप व्यापारिक नीतियों को कूटनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की अपनी रणनीति पर कायम हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूरोपीय देश वास्तव में डिजिटल सर्विसेज टैक्स लागू करते हैं और अमेरिका जवाबी कार्रवाई के तहत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू करता है,तो इसका असर दोनों पक्षों के व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। इससे आयातित वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि,आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और वैश्विक व्यापार में नई अनिश्चितता पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है। अमेरिका और यूरोप दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं,इसलिए उनके बीच किसी भी प्रकार का व्यापारिक विवाद वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि दोनों पक्षों के लिए बातचीत के जरिए समाधान निकालना अधिक व्यावहारिक विकल्प होगा। यदि व्यापारिक विवाद लगातार बढ़ते हैं,तो इसका असर निवेश,निर्यात,रोजगार और वैश्विक आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया और अमेरिका की आगे की रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप का यह ताजा बयान स्पष्ट करता है कि उनकी सरकार व्यापारिक मामलों में सख्त और आक्रामक रुख बनाए रखने के पक्ष में है। अमेरिकी कंपनियों के हितों की रक्षा, व्यापारिक संतुलन और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को लेकर उनकी प्राथमिकताएँ पहले की तरह कायम हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यूरोपीय देश डिजिटल सर्विसेज टैक्स को लेकर क्या अंतिम निर्णय लेते हैं और क्या दोनों पक्ष किसी संभावित व्यापारिक टकराव से बचने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाते हैं।
