न्यूयॉर्क,1 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता के संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखा है। इस फैसले को विशेष रूप से एच-1बी वर्क वीजा पर अमेरिका में रह रहे करीब तीन लाख भारतीयों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने की व्यवस्था जारी रहेगी। यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस नीति के विपरीत है,जिसके तहत अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे लोगों और अवैध प्रवासियों के यहाँ जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने पर रोक लगाने का प्रयास किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद उन हजारों भारतीय परिवारों ने राहत की सांस ली है,जो वर्षों से अमेरिका में कानूनी रूप से रहकर काम कर रहे हैं और जिनके बच्चों का जन्म अमेरिका में हुआ है या भविष्य में होने वाला है। एच-1बी वीजा पर रहने वाले अधिकांश भारतीय उच्च कौशल वाले पेशेवर हैं,जो सूचना प्रौद्योगिकी,इंजीनियरिंग,चिकित्सा,वित्त और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इन परिवारों के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वयं उन्हें अमेरिकी स्थायी निवास या नागरिकता प्राप्त करने के लिए कई वर्षों,बल्कि कई मामलों में दशकों तक इंतजार करना पड़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे लोगों या अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों के यहाँ जन्म लेने वाले बच्चों को स्वतः अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। इस आदेश का उद्देश्य लंबे समय से चली आ रही जन्म के आधार पर नागरिकता देने की व्यवस्था में बदलाव करना था। यदि यह आदेश लागू हो जाता,तो इसका सबसे अधिक प्रभाव एच-1बी वीजा पर काम कर रहे भारतीय पेशेवरों,छात्र वीजा पर पढ़ रहे विद्यार्थियों, विजिटर वीजा पर अस्थायी रूप से रह रहे लोगों और अन्य वैध अस्थायी वीजा धारकों पर पड़ता।
हालाँकि,सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रयास को संविधान के अनुरूप नहीं माना और स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन देश में जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नागरिकता का अधिकार देता है। अदालत के इस फैसले से अब यह सुनिश्चित हो गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को पहले की तरह अमेरिकी नागरिकता प्राप्त होती रहेगी, चाहे उनके माता-पिता किसी भी वैध अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हों।
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत वाले फैसले में कहा कि अदालत संविधान के 14वें संशोधन में किए गए उस मूल वादे को कायम रखती है,जिसके अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति अमेरिकी नागरिक है। उन्होंने कहा कि नागरिकता केवल एक कानूनी दर्जा नहीं,बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान अधिकारों और पूर्ण भागीदारी का आधार है। उनके अनुसार संविधान की भावना को बनाए रखना न्यायपालिका का दायित्व है और इस मामले में अदालत उसी संवैधानिक प्रतिबद्धता का पालन कर रही है।
यह फैसला विशेष रूप से भारतीय समुदाय के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों की सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर अमेरिका जाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों,तकनीकी संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में काम करते हैं। इनमें से अनेक वर्षों तक ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची में बने रहते हैं। कई मामलों में यह प्रतीक्षा अवधि दस से बीस वर्ष या उससे भी अधिक हो सकती है। ऐसे में यदि उनके बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता नहीं मिलती,तो पूरे परिवार के भविष्य पर अनिश्चितता छा सकती थी।
भारतीय-अमेरिकी संगठन ‘इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट’ के कार्यकारी निदेशक चिंतन पटेल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय इस बात की मजबूत पुष्टि करता है कि अमेरिका किसे अपना नागरिक मानता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के प्रस्तावित आदेश का सबसे अधिक असर भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के प्रवासी परिवारों पर पड़ने वाला था। उनके अनुसार हजारों भारतीय परिवार ऐसे हैं,जिनके बच्चे अमेरिका में पैदा होते हैं,लेकिन माता-पिता को स्थायी निवासी बनने का अवसर कई वर्षों बाद मिलता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन परिवारों की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए उनके बच्चों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की है।
चिंतन पटेल ने कहा कि यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं है,बल्कि उन लाखों परिवारों के लिए भरोसे का संदेश भी है,जिन्होंने अमेरिका को अपना कार्यस्थल और भविष्य बनाया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चे इस देश का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं एक प्रवासी रही हैं और जानती हैं कि अमेरिका द्वारा अपने संवैधानिक वादों को निभाने का क्या महत्व होता है। उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि कुछ लोगों को जन्म के आधार पर नागरिकता मिलेगी और कुछ को नहीं। उनके अनुसार जन्म से मिलने वाली नागरिकता अमेरिका के संवैधानिक ढाँचे का मूल सिद्धांत है और अदालत ने आज एक बार फिर इस सिद्धांत को स्पष्ट कर दिया है।
प्रमिला जयपाल ने कहा कि यह फैसला केवल कानूनी व्याख्या नहीं,बल्कि अमेरिका की मूल लोकतांत्रिक और संवैधानिक भावना की रक्षा का निर्णय है। उन्होंने कहा कि प्रवासी परिवार अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और उनके बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना संविधान के अनुरूप है।
दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने इसे देश के लिए निराशाजनक बताते हुए कहा कि अब इस विषय पर कांग्रेस को कानून बनाना चाहिए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि यदि कांग्रेस चाहे तो कानून बनाकर इस व्यवस्था को बदला जा सकता है और इसके लिए संविधान में संशोधन करने जैसी जटिल प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी।
हालाँकि,संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14वें संशोधन की स्पष्ट व्याख्या किए जाने के बाद यदि कांग्रेस इस विषय पर कोई नया कानून भी बनाती है,तो उसके न्यायिक समीक्षा में टिक पाना आसान नहीं होगा। अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन को देश की नागरिकता व्यवस्था का मूल आधार माना जाता है और इसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन अत्यंत कठिन संवैधानिक प्रक्रिया के बिना संभव नहीं माना जाता।
ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि जन्म के आधार पर नागरिकता की व्यवस्था का कुछ लोग गलत उपयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से उन्होंने तथाकथित ‘बर्थ टूरिज्म’ का उल्लेख किया, जिसमें कुछ विदेशी नागरिक पर्यटक वीजा पर अमेरिका आते हैं,वहाँ बच्चे को जन्म दिलाते हैं और बाद में अपने देश लौट जाते हैं। भविष्य में बच्चे की अमेरिकी नागरिकता के आधार पर परिवार को विभिन्न कानूनी लाभ मिलने की संभावना रहती है। ट्रंप का कहना था कि इस प्रवृत्ति को रोकना आवश्यक है।
हालाँकि,आलोचकों का कहना था कि ट्रंप का प्रस्ताव केवल ‘बर्थ टूरिज्म’ तक सीमित नहीं था। यह नियम उन लाखों लोगों पर भी लागू हो जाता,जो पूरी तरह कानूनी तरीके से अमेरिका में रह रहे हैं। इनमें एच-1बी वीजा धारक, छात्र, शोधकर्ता, वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर शामिल थे, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
यह पूरा विवाद अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या से जुड़ा था। यह संशोधन वर्ष 1866 में पारित किया गया और 1868 में लागू हुआ। इसका मूल उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद दास प्रथा से मुक्त किए गए अश्वेत लोगों और उनके बच्चों को पूर्ण अमेरिकी नागरिकता प्रदान करना था। इस संशोधन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति,जो उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन है, अमेरिकी नागरिक होगा। पिछले डेढ़ सौ वर्षों से यही प्रावधान अमेरिका की नागरिकता व्यवस्था का आधार बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केवल भारतीयों या एच-1बी वीजा धारकों तक सीमित नहीं है,बल्कि उन सभी परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है,जो किसी वैध अस्थायी वीजा के तहत अमेरिका में रह रहे हैं। अब छात्र वीजा,विजिटर वीजा,अनुसंधान वीजा और अन्य अस्थायी श्रेणियों में रहने वाले लोगों के यहाँ जन्म लेने वाले बच्चों को भी पहले की तरह अमेरिकी नागरिकता मिलती रहेगी।
भारतीय समुदाय के लिए यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका में भारतीय मूल के पेशेवर तकनीकी क्षेत्र की रीढ़ माने जाते हैं। बड़ी तकनीकी कंपनियों,स्वास्थ्य सेवाओं,विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में भारतीयों की बड़ी भागीदारी है। ऐसे में यह फैसला उनके परिवारों को कानूनी स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा प्रदान करता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी संविधान में निहित नागरिकता संबंधी प्रावधान आज भी उतने ही प्रभावी हैं,जितने उनके लागू होने के समय थे। अदालत ने यह संदेश दिया है कि संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा न्यायपालिका की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और किसी भी प्रशासनिक आदेश के माध्यम से उन्हें बदला नहीं जा सकता। इस फैसले को अमेरिका की संवैधानिक परंपरा,प्रवासी समुदायों के अधिकारों और कानून के शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है,जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों तक अमेरिकी आव्रजन नीति और लाखों प्रवासी परिवारों के जीवन पर दिखाई देगा।
