नई दिल्ली,1 जुलाई (युआईटीवी)- देशभर में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 183.50 रुपये की कटौती के बाद होटल,रेस्टोरेंट,चाय की दुकानों, ढाबों और अन्य छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। लंबे समय से बढ़ती परिचालन लागत और महँगाई के दबाव का सामना कर रहे व्यापारियों ने सरकार और तेल विपणन कंपनियों के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सिलेंडर की कीमत में आई इस कमी से कारोबार की लागत कुछ हद तक घटेगी और इसका लाभ ग्राहकों तक भी पहुँचाया जा सकेगा। हालाँकि,व्यापारियों ने यह भी कहा कि केवल एक बार की कटौती पर्याप्त नहीं है,बल्कि सरकार को एलपीजी की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक नीति तैयार करनी चाहिए,ताकि छोटे व्यवसायों को बार-बार बदलती कीमतों का सामना न करना पड़े।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल,रेस्टोरेंट,मिठाई की दुकानें, चाय और नाश्ते के स्टॉल,कैटरिंग सेवाएँ तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान करते हैं। इन कारोबारों में ईंधन का खर्च परिचालन लागत का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। जब एलपीजी की कीमतें बढ़ती हैं,तो व्यवसायियों के सामने लागत बढ़ने की चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे में उन्हें या तो अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़ते हैं या फिर कम मुनाफे में कारोबार चलाना पड़ता है। दोनों ही परिस्थितियों का असर व्यापार और ग्राहकों पर पड़ता है।
दिल्ली सहित देश के विभिन्न शहरों में कारोबारियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हुई कटौती को सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में लगातार बढ़ती लागत के कारण कारोबार चलाना कठिन होता जा रहा था। अब कीमतों में कमी आने से कुछ राहत जरूर मिलेगी और बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना आसान होगा।
दिल्ली के एक दुकानदार ने बताया कि जब एलपीजी सिलेंडर महँगा होता है,तो उसका सीधा असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। व्यवसायियों के पास लागत बढ़ने पर ग्राहकों से अधिक कीमत वसूलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इससे ग्राहक कम हो जाते हैं और बिक्री पर भी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अब सिलेंडर सस्ता होने के बाद उम्मीद है कि कारोबार में कुछ सुधार आएगा और ग्राहकों को भी राहत मिलेगी।
होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के लिए यह कटौती विशेष महत्व रखती है क्योंकि इन प्रतिष्ठानों में प्रतिदिन कई सिलेंडरों की खपत होती है। ऐसे में प्रति सिलेंडर 183.50 रुपये की कमी का सीधा असर मासिक खर्च पर दिखाई देगा। बड़े रेस्टोरेंट जहाँ दर्जनों सिलेंडरों का उपयोग करते हैं,वहीं छोटे ढाबे और चाय की दुकानें भी नियमित रूप से कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर रहती हैं। इसलिए यह राहत छोटे और बड़े दोनों प्रकार के कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चाय की दुकान चलाने वाले व्यापारी राजू ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव अब आम बात बन गई है। कभी एक महीने में कीमतें बढ़ जाती हैं,तो अगले महीने कम हो जाती हैं। इस तरह की अस्थिरता छोटे व्यापारियों के लिए परेशानी पैदा करती है क्योंकि उन्हें हर बार अपनी लागत का नया हिसाब लगाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि छोटे व्यवसाय सीमित पूँजी पर चलते हैं और बार-बार बदलती कीमतों के कारण भविष्य की योजना बनाना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार एलपीजी की कीमतों को अधिक स्थिर बनाए रखने की दिशा में कदम उठाए तो छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। उनका मानना है कि कीमतों में स्थिरता रहने से उत्पादों की कीमतें भी लंबे समय तक समान रखी जा सकेंगी और ग्राहकों का भरोसा भी बना रहेगा।
एक रेस्टोरेंट संचालक ने बताया कि प्रति सिलेंडर 183 रुपये से अधिक की कटौती निश्चित रूप से राहत देने वाली है, लेकिन केवल एलपीजी ही नहीं,बल्कि अन्य कई खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। खाद्य सामग्री, कर्मचारियों का वेतन, बिजली, किराया और परिवहन लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में केवल गैस की कीमत कम होने से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि व्यापारियों के लिए व्यापक स्तर पर लागत कम करने वाले कदम भी उठाए जाएँ।
व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महँगाई के कारण छोटे व्यवसायों पर काफी दबाव बढ़ा है। रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ता है क्योंकि उनके लिए गैस दैनिक आवश्यकता है। यदि गैस महँगी होती है,तो उसका असर सीधे ग्राहकों तक पहुँचता है और कई बार लोग बाहर खाना कम कर देते हैं। इससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग की आय भी प्रभावित होती है।
दुकानदार संजय कुमार ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कमी आने से बाजार में चल रही कालाबाजारी पर भी कुछ हद तक रोक लग सकती है। उन्होंने कहा कि जब कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं तो कुछ स्थानों पर कृत्रिम कमी पैदा होने की शिकायतें भी सामने आती हैं। अब कीमतों में कमी आने से सिलेंडरों की उपलब्धता बेहतर होगी और व्यापारियों को समय पर गैस मिल सकेगी।
दूसरे दुकानदार आनंद ने कहा कि सरकार को केवल एलपीजी की कीमतों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार खाद्य तेल,दालें,सब्जियाँ,पैकेजिंग सामग्री और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का भी व्यापार पर सीधा असर पड़ता है। यदि इन क्षेत्रों में भी राहत मिलेगी तो व्यवसाय अधिक मजबूत होंगे और उपभोक्ताओं को भी कम कीमत पर सामान उपलब्ध कराया जा सकेगा।
व्यापारियों ने यह भी कहा कि एलपीजी की कीमतों में बार-बार बदलाव के कारण कारोबार की लागत का सही अनुमान लगाना कठिन हो जाता है। विशेष रूप से छोटे दुकानदारों के लिए यह चुनौती अधिक होती है क्योंकि उनके पास बड़ी कंपनियों की तरह वित्तीय संसाधन नहीं होते। इसलिए उन्होंने सरकार से ऐसी नीति बनाने की माँग की है,जिससे लंबे समय तक कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव न हो।
दुकानदार मुकेश गुप्ता ने सरकार और तेल कंपनियों के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस कटौती से महँगाई का कुछ दबाव कम होगा और इसका लाभ आम जनता तक पहुँचेगा। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी सरकार इसी तरह कीमतों में राहत देती रही तो छोटे व्यापारियों को अपने कारोबार को और बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। उनका मानना है कि गैस की कीमत कम होने से खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी कुछ कमी आ सकती है।
दुकानदार उमेश ने भी इस फैसले को सकारात्मक बताते हुए कहा कि सरकार की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी सरकार महँगाई पर नियंत्रण के लिए इसी प्रकार के फैसले लेती रहेगी। उनके अनुसार यदि एलपीजी की कीमतों में और कमी आती है,तो इसका लाभ केवल व्यापारियों को ही नहीं,बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती का असर केवल होटल और रेस्टोरेंट उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा। इसका लाभ उन सभी व्यवसायों को मिलेगा जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एलपीजी पर निर्भर हैं। इससे छोटे उद्योगों की लागत घट सकती है और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। यदि कारोबारी इस राहत का लाभ ग्राहकों तक पहुँचाते हैं,तो खाने-पीने की कुछ वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक असर दिखाई दे सकता है।
हालाँकि,विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर घरेलू एलपीजी कीमतों पर पड़ता है। इसलिए सरकार के लिए पूरी तरह स्थिर कीमतें बनाए रखना आसान नहीं होता। इसके बावजूद यदि दीर्घकालिक रणनीति के तहत मूल्य निर्धारण में संतुलन बनाए रखा जाए,तो व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिल सकता है।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया कटौती ने फिलहाल होटल,रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों को राहत जरूर दी है। व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकार आगे भी ऐसे कदम उठाएगी,जिससे महँगाई पर नियंत्रण रहे,कारोबार को मजबूती मिले और आम उपभोक्ताओं को भी सस्ती दरों पर वस्तुएँ और सेवाएँ उपलब्ध हो सकें। फिलहाल इस फैसले को छोटे व्यापारियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है,जिसने बढ़ती लागत के बीच उन्हें कुछ आर्थिक सहारा प्रदान किया है।
