तेहरान,3 जुलाई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा व्यवस्था या वहाँ की समुद्री गतिविधियों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने की कोशिश की,तो ईरानी सशस्त्र बल उसका तेज और निर्णायक जवाब देंगे। ईरान की मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर की ओर से जारी बयान में कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की संप्रभुता से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है और इसकी सुरक्षा किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। ईरान ने यह भी दोहराया कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की स्थिरता और सुरक्षा उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है और इसे उसकी लाल रेखा माना जाना चाहिए।
जारी बयान में ईरानी सैन्य नेतृत्व ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका या किसी अन्य देश के लिए मनमाने तरीके से कार्रवाई करने का क्षेत्र नहीं है। यह इलाका ईरान के अधिकार क्षेत्र और उसकी सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत आता है। इसलिए यहाँ होने वाली किसी भी गतिविधि को लेकर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार ईरान के पास है। सैन्य मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को ईरान द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का ही पालन करना होगा। यदि कोई जहाज इन नियमों की अनदेखी करता है या निर्धारित मार्ग से हटकर यात्रा करने की कोशिश करता है,तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ईरान ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि कोई जहाज निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी ईरान नहीं लेगा। अधिकारियों के अनुसार, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नियमों का पालन सभी जहाजों के लिए अनिवार्य है। उनका कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य केवल ईरान की सुरक्षा नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना भी है। हालाँकि,ईरान ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी बाहरी शक्ति के समर्थन से इन नियमों को चुनौती देने की कोशिश की गई तो उसका जवाब सैन्य स्तर पर दिया जाएगा।
ईरानी सैन्य कमान ने अमेरिका पर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप भी लगाया। बयान में कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ड्रोन की लगातार मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है। ईरान का कहना है कि इस तरह की सैन्य गतिविधियाँ अनावश्यक तनाव बढ़ाती हैं और समुद्री मार्ग की सामान्य आवाजाही को प्रभावित कर सकती हैं। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई करने की कोशिश की तो ईरानी सेना अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगी।
बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका यदि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा व्यवस्था में हस्तक्षेप करता है या वहाँ किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने का प्रयास करता है,तो ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा हमला मानेगा। ऐसी स्थिति में प्रतिक्रिया केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि ईरानी सशस्त्र बल तत्काल और निर्णायक कार्रवाई करेंगे। सैन्य मुख्यालय ने दोहराया कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार की आक्रामक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसी बीच ईरान के कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिकी सेंट्रल कमांड के नियंत्रण में नहीं बल्कि ईरान के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और संचालन से जुड़े सभी निर्णय ईरान के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं और किसी बाहरी शक्ति को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है।
गरीबाबादी का यह बयान ऐसे समय आया है,जब एक दिन पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बहरीन में बारह देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा संवाद आयोजित किया था। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा,रक्षा सहयोग को मजबूत करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसकी सुरक्षा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के हित में आवश्यक है।
ईरान ने हालाँकि,इस बैठक को संदेह की दृष्टि से देखा है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा के नाम पर अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। ईरान का आरोप है कि बाहरी शक्तियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ क्षेत्र में शांति स्थापित करने के बजाय तनाव और टकराव की संभावना को बढ़ाती हैं। इसी कारण ईरानी नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी क्षेत्र के देशों के हाथ में ही रहनी चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचता है। इस कारण यहाँ किसी भी प्रकार का तनाव या सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार,समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर दुनिया की प्रमुख शक्तियों की नजर बनी रहती है।
पिछले कुछ वर्षों में भी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है। कभी तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर विवाद सामने आया तो कभी सैन्य जहाजों और ड्रोन की गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी हुई। मौजूदा बयान से स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी बना हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर मतभेद कम होने के बजाय और गहरे होते दिखाई दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की चेतावनियाँ और जवाबी बयानबाजी जारी रहती है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान इस संवेदनशील मुद्दे पर किस तरह का रुख अपनाते हैं और क्या दोनों पक्ष कूटनीतिक संवाद के जरिए तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या फिर क्षेत्र में टकराव की आशंकाएँ और बढ़ जाती हैं।
