नई दिल्ली,3 जुलाई (युआईटीवी)- इंदौर के चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से मिली जमानत पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालाँकि,शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर गंभीर कानूनी सवाल उठते हैं,जिनकी विस्तार से सुनवाई की आवश्यकता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई के लिए निर्धारित की है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल सोनम रघुवंशी को मिली जमानत बरकरार रहेगी,लेकिन अंतिम निर्णय आगामी सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
यह मामला देशभर में उस समय चर्चा का विषय बना था,जब इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी राजा रघुवंशी की मई 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई थी। जाँच के दौरान पुलिस ने उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी को इस हत्या का मुख्य आरोपी बताया था। इसके बाद मेघालय पुलिस ने हत्या और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू की थी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने राज्य सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सोनम रघुवंशी पर लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और यह केवल किसी साधारण प्रक्रियात्मक त्रुटि का मामला नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि इससे पहले भी सोनम की जमानत याचिकाएँ खारिज की जा चुकी थीं और इस मामले में उपलब्ध साक्ष्य तथा आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत पर रिहा करना उचित नहीं माना जा सकता।
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी दलील दी कि यदि सोनम रघुवंशी जमानत पर बाहर रहती हैं,तो उनके फरार होने की आशंका बनी रहेगी। राज्य सरकार का कहना है कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में आरोपित व्यक्ति का मुकदमे की सुनवाई के दौरान बाहर रहना जाँच और न्यायिक प्रक्रिया दोनों को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर रोक लगाने का अनुरोध किया।
दूसरी ओर,सोनम रघुवंशी की ओर से पेश अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय कानून द्वारा निर्धारित आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के दौरान सोनम को न तो उचित कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई और न ही उन्हें स्पष्ट रूप से यह बताया गया कि किन आधारों पर गिरफ्तार किया जा रहा है। बचाव पक्ष का दावा था कि पुलिस ने केवल एक खाली प्रोफॉर्मा उपलब्ध कराया,जिससे आरोपी अपने कानूनी अधिकारों का प्रभावी उपयोग नहीं कर सकी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों पर कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए। अदालत ने पूछा कि यदि गिरफ्तारी प्रक्रिया में कथित त्रुटियाँ इतनी गंभीर थीं तो इस मुद्दे को पहले की सुनवाई के दौरान प्रमुखता से क्यों नहीं उठाया गया। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि जमानत केवल किसी तकनीकी आधार पर दी गई है,तो क्या कानून पुलिस को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करके दोबारा गिरफ्तारी करने से रोकता है। अदालत की इन टिप्पणियों से यह संकेत मिला कि वह मामले के कानूनी पहलुओं की गहराई से समीक्षा करना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल जमानत पर रोक लगाने से इनकार करते हुए यह भी कहा कि सोनम रघुवंशी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुकी हैं। ऐसे में तत्काल अंतरिम रोक लगाने की आवश्यकता इस समय नहीं बनती। हालाँकि,अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश की वैधता और उससे जुड़े कानूनी प्रश्नों पर विस्तृत सुनवाई आगामी तारीख पर की जाएगी।
गौरतलब है कि मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए खटखटाया था,जिसमें हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत को बरकरार रखा था। राज्य सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और आरोपों की गंभीरता की अपेक्षा गिरफ्तारी प्रक्रिया में कथित खामियों को अधिक महत्व दिया,जबकि हत्या जैसे गंभीर मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर भी समान रूप से विचार किया जाना चाहिए था।
इससे पहले 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने शिलांग की अदालत द्वारा दिए गए जमानत आदेश को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि शिलांग की निचली अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया था,इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त कारण नहीं बनता।
यह फैसला न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने सुनाया था। अदालत ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था,जिसमें अप्रैल 2026 में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायिक),शिलांग द्वारा पारित जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और बाद में निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
शिलांग की अदालत ने सोनम रघुवंशी को जमानत देते समय कहा था कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियात्मक कमियां पाई गई थीं। अदालत के अनुसार जाँच अधिकारियों ने आरोपी को गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार उचित तरीके से नहीं बताए,जिससे उसके संवैधानिक और कानूनी अधिकार प्रभावित हुए। न्यायालय का मानना था कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के समय उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के कारणों की स्पष्ट जानकारी देना कानून के तहत अनिवार्य है।
निचली अदालत ने यह भी कहा था कि यदि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं अपनाई जाती है,तो आरोपी के निष्पक्ष बचाव के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत ने सोनम रघुवंशी को जमानत प्रदान की थी। बाद में हाईकोर्ट ने भी इसी तर्क को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी थी।
राजा रघुवंशी हत्याकांड शुरुआत से ही देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। इंदौर के रहने वाले ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी के कुछ समय बाद ही मेघालय में हनीमून के दौरान उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस जाँच में इसे हत्या का मामला मानते हुए व्यापक जाँच शुरू की गई और कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। जाँच एजेंसियों ने सोनम रघुवंशी को इस कथित साजिश का मुख्य आरोपी बताया।
अब सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई इस मामले का महत्वपूर्ण कानूनी चरण मानी जा रही है। एक ओर राज्य सरकार हत्या जैसे गंभीर अपराध में जमानत रद्द कराने का प्रयास कर रही है,वहीं बचाव पक्ष गिरफ्तारी प्रक्रिया में कथित कानूनी खामियों को आधार बनाकर हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहरा रहा है। ऐसे में 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं,क्योंकि उसी दौरान सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि मेघालय हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा जाएगा या राज्य सरकार की आपत्तियों को स्वीकार करते हुए कोई नया आदेश पारित किया जाएगा। तब तक सोनम रघुवंशी को मिली जमानत प्रभावी रहेगी,जबकि मामले की कानूनी लड़ाई शीर्ष अदालत में जारी रहेगी।
