पुणे में निर्माणाधीन इमारत ढहने के बाद राहत अभियान तेज (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

पुणे में निर्माणाधीन इमारत ढहने के बाद राहत अभियान तेज,सेना भी बचाव कार्य में शामिल; मलबे में फँसे लोगों को निकालने की कोशिश जारी

पुणे,9 जुलाई (युआईटीवी)- महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम क्षेत्र में निर्माणाधीन इमारत के अचानक ढह जाने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल,पुलिस,दमकल विभाग और अन्य एजेंसियों को मौके पर तैनात किया। अब बचाव अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय सेना की टीम भी राहत कार्य में शामिल हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे में फँसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और अभियान पूरी प्राथमिकता के साथ चलाया जा रहा है।

यह हादसा पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के मोशी कचरा डिपो परिसर में उस समय हुआ,जब वहाँ निर्माण कार्य चल रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार,निर्माणाधीन ढाँचे के अचानक गिर जाने से कई मजदूर और कर्मचारी मलबे के नीचे दब गए। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने राहत कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस,दमकल विभाग और आपदा राहत दल मौके पर पहुँच गए तथा बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया गया।

प्रशासन के अनुसार, शुरुआती आकलन में करीब 23 लोगों के मलबे में फँसे होने की आशंका जताई गई थी। राहत दलों की त्वरित कार्रवाई के चलते अब तक 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इनमें से पाँच लोग हादसे के तुरंत बाद स्वयं मलबे से बाहर निकलने में सफल रहे,जबकि सात अन्य लोगों को बचाव दलों ने कठिन प्रयासों के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों ने बताया कि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे तत्काल अस्पताल पहुँचाकर उपचार शुरू किया गया। अन्य लोगों की भी चिकित्सकीय जाँच की जा रही है।

घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुँच गए,जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इलाके को घेर लिया। बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए,इसके लिए आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई। भारी मशीनों,क्रेनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम लगातार जारी है।

भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने भी इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एक संयुक्त टास्क फोर्स को घटनास्थल पर भेजा है। सेना की इस विशेष टीम में इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी और राहत कार्य में प्रशिक्षित जवान शामिल हैं। सेना के इंजीनियरिंग विशेषज्ञ मलबे की संरचना का आकलन कर सुरक्षित तरीके से उसे हटाने में सहायता कर रहे हैं,जबकि चिकित्सा दल घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर उन्हें अस्पताल पहुँचाने में सहयोग कर रहा है।

सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स और राहत दल राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल,पुलिस, दमकल विभाग तथा स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त रूप से बचाव अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि सेना के शामिल होने से अभियान को और गति मिलेगी तथा मलबे में फँसे लोगों तक जल्द पहुँचने में मदद मिलेगी।

बचाव अभियान के दौरान राहतकर्मी अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं,ताकि मलबा हटाते समय किसी प्रकार का अतिरिक्त नुकसान न हो। विशेषज्ञ लगातार यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ढही हुई संरचना का शेष हिस्सा और कमजोर होकर न गिरे। इसी कारण मशीनों और मैनुअल तकनीकों का उपयोग संतुलित तरीके से किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता हर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने की है,इसलिए अभियान बिना किसी जल्दबाजी के लेकिन लगातार जारी रखा गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही महाराष्ट्र सरकार ने भी राहत कार्य की निगरानी शुरू कर दी। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने राहत एवं पुनर्वास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीता वेद सिंघल,पिंपरी-चिंचवड़ नगर आयुक्त विजयकुमार सूर्यवंशी तथा पुलिस आयुक्त विनयकुमार चौबे से संपर्क कर स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जाए और मलबे में फँसे प्रत्येक व्यक्ति तक जल्द-से-जल्द पहुँचने का प्रयास किया जाए।

उपमुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि घायल लोगों को तत्काल सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और अस्पतालों में उनके इलाज की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रशासन से कहा कि राहत कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए और सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम करें। उनके निर्देश के बाद सेना को भी औपचारिक रूप से राहत अभियान में शामिल किया गया,जिससे बचाव कार्य को अतिरिक्त तकनीकी और मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।

इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निर्माण परियोजना में संरचनात्मक सुरक्षा,गुणवत्ता नियंत्रण और श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता,तो इस प्रकार की दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि राहत अभियान पूरा होने के बाद दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जाँच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है,तो संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से लगातार भारी बारिश हो रही है,जिससे विभिन्न क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। लगातार वर्षा के कारण कई निर्माण स्थलों पर भी काम प्रभावित हुआ है और मिट्टी तथा संरचनाओं की मजबूती पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालाँकि,इस हादसे का वास्तविक कारण जाँच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा, लेकिन विशेषज्ञ सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार,एक जून से अब तक महाराष्ट्र में बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में 62 लोगों की जान जा चुकी है। भारी वर्षा के कारण कई जिलों में सड़क दुर्घटनाएँ,दीवार गिरने,जलभराव और अन्य हादसे सामने आए हैं। ऐसे में प्रशासन पहले से ही अलर्ट पर है और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

फिलहाल पुणे के मोशी क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। बचाव दल पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ मलबा हटाने में जुटे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे में कोई व्यक्ति फँसा नहीं है,तब तक अभियान जारी रहेगा। साथ ही हादसे की जाँच भी शुरू की जाएगी,ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।