नई दिल्ली,18 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के चाबहार स्थित शहीद कलांतरी बंदरगाह पर मौजूद एक महत्वपूर्ण निगरानी टावर को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की समुद्री निगरानी प्रणाली और समुद्री हमलों के समन्वय की क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई। इस दावे के बाद एक बार फिर पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है,क्योंकि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि 16 जुलाई को अमेरिकी बलों ने चाबहार के शहीद कलांतरी बंदरगाह पर स्थित निगरानी टावर को निशाना बनाया और उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। अमेरिकी सेना के अनुसार,यह टावर ईरान के ओमान की खाड़ी से लगे तटीय क्षेत्र में फैले व्यापक समुद्री निगरानी नेटवर्क का अहम हिस्सा था। इस नेटवर्क का इस्तेमाल लंबे समय से समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और रणनीतिक सैन्य अभियानों के समन्वय के लिए किया जाता रहा है।
सेंटकॉम ने अपने बयान में दावा किया कि इस निगरानी नेटवर्क का उपयोग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) कई दशकों से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की निगरानी करने और आवश्यक होने पर उन्हें निशाना बनाने के लिए करता रहा है। अमेरिकी पक्ष के अनुसार,इस टावर के नष्ट होने से आईआरजीसी की समुद्री गतिविधियों की निगरानी और हमलों के समन्वय की क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
अमेरिकी सेना का यह भी कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में आम नागरिकों और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सेंटकॉम के अनुसार,निगरानी टावर को नष्ट किए जाने से उन हमलों के समन्वय की क्षमता कमजोर हुई है,जिनका निशाना नागरिक चालक दल और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाज बनते रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र के प्रमुख समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा।
हालाँकि,अमेरिका ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा केवल उन जहाजों के लिए होगी,जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करेंगे। अमेरिकी पक्ष ने कहा कि जो जहाज ईरान के खिलाफ लागू मौजूदा अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करने का प्रयास करेंगे,उन्हें इस सुरक्षा दायरे में नहीं माना जाएगा। इस बयान से यह भी संकेत मिला है कि अमेरिका समुद्री नाकेबंदी को लेकर अपना रुख और सख्त कर सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इस सैन्य कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने हमले के बाद चाबहार के शहीद कलांतरी बंदरगाह पर स्थित निगरानी टावर के गिरने की तस्वीर भी साझा की। उनके अनुसार,यह कार्रवाई अमेरिकी सेना की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य ईरान की सैन्य और समुद्री क्षमताओं को सीमित करना है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वह क्षेत्र में समुद्री व्यापार की सुरक्षा और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
सेंटकॉम के अनुसार,पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में घोषित युद्धविराम समाप्त किए जाने की घोषणा के बाद अमेरिकी सेना ने लगातार छह दिनों तक ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इन अभियानों के दौरान ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों,सैन्य प्रतिष्ठानों और समुद्री संरचनाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका इस्तेमाल क्षेत्रीय समुद्री मार्गों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है।
इससे पहले भी अमेरिकी सेना ने एक अन्य कार्रवाई का दावा किया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार,अरब की खाड़ी में ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहे एक बिना माल वाले तेल टैंकर को मिसाइलों के जरिए रोका गया। अमेरिका का कहना है कि यह टैंकर उसकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहा था। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि समय रहते कार्रवाई कर उसे आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
चाबहार बंदरगाह ईरान के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित प्रमुख समुद्री बंदरगाह है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के साथ-साथ क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से भी इसकी विशेष भूमिका है। इसी कारण इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहता,बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के समुद्री व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इन्हीं समुद्री रास्तों से होकर गुजरता है। ऐसे में इन क्षेत्रों में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार,समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही,तो समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई केवल समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है। दूसरी ओर ईरान लगातार अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों का विरोध करता रहा है और उन्हें अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताता है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र में तनाव का स्तर काफी बढ़ा दिया है।
फिलहाल चाबहार में निगरानी टावर को नष्ट किए जाने के अमेरिकी दावे ने इस संघर्ष को नया आयाम दे दिया है। लगातार हो रहे हवाई हमलों,समुद्री नाकेबंदी,मिसाइल अभियानों और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों के बीच यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव केवल सीमित सैन्य कार्रवाई तक नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की रणनीति और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस संकट की दिशा तय करेगी। वर्तमान परिस्थितियों में पूरे पश्चिम एशिया पर बढ़ते सैन्य तनाव की छाया बनी हुई है और वैश्विक समुदाय इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
