अमेरिका को ईरान की कड़ी चेतावनी,हमले जारी रहे,तो युद्ध और होगा विनाशकारी (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमेरिका को ईरान की कड़ी चेतावनी,हमले जारी रहे,तो युद्ध और होगा विनाशकारी

तेहरान,18 जुलाई (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अमेरिका अगले दो से तीन दिनों तक सैन्य कार्रवाई जारी रखता है,तो संघर्ष कहीं अधिक आक्रामक और विनाशकारी रूप ले सकता है। ईरान का कहना है कि उसने अब तक क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संयम बरता है,लेकिन यदि अमेरिकी हमले नहीं रुके तो उसकी सेनाएँ व्यापक सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। इस बयान के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है तथा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसेन रेजाई ने सरकारी प्रसारक आईआरआईबी को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अब युद्ध और बातचीत दोनों की नीति समाप्त हो चुकी है और मौजूदा परिस्थितियों में ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है। उनके अनुसार,यदि अमेरिका अपने सैन्य अभियान को जारी रखता है,तो ईरान का जवाब पहले से कहीं अधिक व्यापक और कठोर होगा।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार,मोहसेन रेजाई ने कहा कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहते हैं तो ईरानी सेनाएँ केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी सैन्य ठिकाने,बेस और सैनिक किसी भी राजनीतिक सीमा के भीतर सुरक्षित नहीं रहेंगे। उनका कहना था कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर उस स्थान को निशाना बना सकता है, जहाँ से उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई संचालित की जा रही हो।

रेजाई ने यह भी दावा किया कि ईरान ने अब तक संघर्ष को बड़े क्षेत्रीय या अंतर्राष्ट्रीय युद्ध में बदलने से रोकने के लिए काफी संयम बरता है। उनके अनुसार,ईरान की प्राथमिकता हमेशा यह रही है कि तनाव सीमित दायरे में रहे और पूरे पश्चिम एशिया को इसकी आग में न झोंका जाए। हालाँकि,उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने हालात का गलत आकलन किया है और अपने सैन्य कदमों के जरिए इस संघर्ष को व्यापक क्षेत्रीय संकट में बदलने की दिशा में धकेल दिया है।

उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी कार्रवाई नहीं रुकती है,तो ईरान अपनी जमीनी सैन्य शक्ति को और मजबूत करेगा। इसके तहत अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती,आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल और व्यापक सैन्य अभियान शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में युद्ध का दायरा मौजूदा सीमाओं से आगे बढ़ सकता है और इसका प्रभाव पूरे क्षेत्र में महसूस किया जा सकता है।

ईरान के सैन्य सलाहकार ने खाड़ी क्षेत्र के देशों की जनता से भी विशेष अपील की। उन्होंने कुवैत,जॉर्डन,संयुक्त अरब अमीरात और कतर के नागरिकों से आग्रह किया कि वे तनाव को और बढ़ने से रोकने के प्रयासों में सहयोग करें। उनका कहना था कि यदि क्षेत्र में शांति बनाए रखनी है,तो सभी देशों और उनके नागरिकों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता केवल सैन्य ताकत से नहीं,बल्कि सामूहिक प्रयासों और समझदारी से ही सुनिश्चित की जा सकती है।

रेजाई ने दावा किया कि अब तक अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की कार्रवाई काफी प्रभावी और भारी रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ईरानी सैन्य अभियानों की गति और तीव्रता दोनों बढ़ेंगी। उनके अनुसार,अमेरिका को भविष्य में और अधिक शक्तिशाली मिसाइल तथा ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका को यह चेतावनी भी दी कि वह किसी भी स्थिति में ईरान के खिलाफ जमीनी सैन्य अभियान शुरू करने की भूल न करे,क्योंकि ऐसा कदम पूरे क्षेत्र को लंबे और विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल सकता है।

इसी बीच ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने एक अलग घटनाक्रम की जानकारी दी। एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,ईरानी सुरक्षा बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक ऐसे जहाज को निशाना बनाया जिसने निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया था। एक सैन्य सूत्र के हवाले से बताया गया कि थाईलैंड के झंडे वाले इस जहाज ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना से आवश्यक अनुमति लिए बिना जलडमरूमध्य पार करने का प्रयास किया और सुरक्षा बलों की चेतावनियों की भी अनदेखी की। इसके बाद ईरानी सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए जहाज को रोकने के लिए निशाना बनाया।

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं,बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी गहरा असर डाल सकता है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय लगातार इस इलाके की स्थिति पर नजर रखे हुए है।

पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी प्रांतों में कई सैन्य हमले किए हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ये हमले ईरानी बलों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाए जाने के जवाब में किए गए हैं। अमेरिका का दावा है कि उसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है,जिनसे अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा पैदा हो सकता है।

दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और बेसों पर लगातार मिसाइल तथा ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ये हमले आत्मरक्षा के अधिकार के तहत किए जा रहे हैं और उनका उद्देश्य अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब देना है। दोनों देशों के बीच जारी इस सैन्य टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता की आशंका को और बढ़ा दिया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र के अन्य देशों की सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार,वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है,जिसका प्रभाव दुनिया के अनेक देशों पर पड़ेगा।

फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है,जबकि कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ कमजोर दिखाई दे रही हैं। ईरान की ओर से दी गई ताजा चेतावनी ने यह संकेत दिया है कि यदि अमेरिकी अभियान नहीं रुका तो संघर्ष और अधिक व्यापक तथा विनाशकारी रूप ले सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम किस दिशा में बढ़ते हैं और क्या बढ़ते तनाव के बीच किसी तरह का कूटनीतिक समाधान निकल पाता है या पश्चिम एशिया एक और बड़े सैन्य संकट की ओर बढ़ता है।