स्पाइसजेट

स्पाइसजेट पर सीसीपीए का बड़ा एक्शन,भ्रामक ‘डार्क पैटर्न’ अपनाने पर लगा एक लाख रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली,18 जुलाई (युआईटीवी)- उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (सीसीपीए) ने एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट लिमिटेड पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी पर अपने ऑनलाइन फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ यानी ऐसी भ्रामक डिजिटल डिजाइन तकनीकों का इस्तेमाल करने का आरोप है,जिनके जरिए ग्राहकों को उनकी स्पष्ट जानकारी और सहमति के बिना स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम का सदस्य बनाया जा रहा था। इतना ही नहीं,ग्राहकों की ओर से कोई अलग अनुमति दिए बिना ही उन्हें प्रचार संबंधी संदेश भेजने की सहमति भी पहले से चयनित विकल्पों के माध्यम से दर्ज कर ली जाती थी। प्राधिकरण ने इसे उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन मानते हुए कंपनी पर आर्थिक दंड लगाया है।

यह आदेश सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। जाँच के दौरान यह पाया गया कि स्पाइसजेट के ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ऐसे इंटरफेस डिजाइन का उपयोग किया गया था,जिससे उपभोक्ताओं की स्वतंत्र पसंद और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती थी। प्राधिकरण का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस तरह की तकनीकों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बिना पूरी जानकारी दिए कुछ विकल्पों को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करना होता है,जो निष्पक्ष व्यापारिक व्यवहार के सिद्धांतों के विपरीत है।

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने भी इस कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए कहा कि सीसीपीए ने स्पाइसजेट लिमिटेड पर भ्रामक डिजाइन तकनीकों के इस्तेमाल के कारण एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मंत्रालय के अनुसार, कंपनी के ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म पर ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी,जिससे उपभोक्ताओं को अनजाने में स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम में शामिल कर लिया जाता था। यह पूरी प्रक्रिया इस तरह तैयार की गई थी कि अधिकांश ग्राहक बिना ध्यान दिए ही कंपनी की अतिरिक्त सेवाओं और प्रचार गतिविधियों से जुड़ जाते थे।

जाँच में यह सामने आया कि फ्लाइट टिकट बुक करने के दौरान स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम में शामिल होने का विकल्प पहले से ही चुना हुआ रहता था। इसका मतलब यह था कि यदि ग्राहक उस विकल्प को स्वयं हटाता नहीं था,तो उसे स्वतः इस कार्यक्रम का सदस्य मान लिया जाता था। इसके अलावा प्रमोशनल संदेश प्राप्त करने के लिए भी पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स मौजूद थे। परिणामस्वरूप ग्राहक की ओर से कोई अलग कार्रवाई किए बिना ही यह मान लिया जाता था कि उसने टेक्स्ट संदेश,व्हाट्सऐप और ईमेल के माध्यम से प्रचार संबंधी संदेश प्राप्त करने की सहमति दे दी है।

सीसीपीए ने अपनी जाँच में यह भी पाया कि कंपनी को नोटिस जारी किए जाने के बाद भी इस व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया। प्राधिकरण के अनुसार,स्पाइसजेट ने पुरानी प्रणाली हटाने के बजाय एक नया पहले से चयनित चेकबॉक्स जोड़ दिया,जिसके माध्यम से भविष्य में भी ग्राहकों की ओर से एसएमएस,व्हाट्सऐप और ईमेल पर प्रचार संबंधी संदेश प्राप्त करने की सहमति पहले से दर्ज रहती थी। यानी कंपनी ने प्रक्रिया का स्वरूप बदला,लेकिन उसका मूल प्रभाव पहले जैसा ही बना रहा। प्राधिकरण ने इसे गंभीर माना और कहा कि इस तरह की व्यवस्था उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है।

सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह समस्या किसी जानबूझकर अपनाई गई नीति का हिस्सा नहीं थी,बल्कि एक तकनीकी त्रुटि के कारण उत्पन्न हुई थी। कंपनी ने दावा किया कि इसका उद्देश्य ग्राहकों को गुमराह करना नहीं था। हालाँकि,सीसीपीए ने कंपनी की इस दलील को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया और उसे निर्देश दिया कि वह लिखित रूप में यह आश्वासन दे कि सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम लागू कर दिए गए हैं तथा भविष्य में भी ऐसी व्यवस्था दोबारा लागू नहीं होगी।

मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि सभी सुधार स्थायी रूप से लागू किए जाएँ। प्राधिकरण ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों को पूरी पारदर्शिता के साथ विकल्प उपलब्ध कराएँ और उनकी स्पष्ट सहमति के बिना किसी भी सेवा या सुविधा से न जोड़ें।

सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि ‘डार्क पैटर्न’ जैसी तकनीकें उपभोक्ताओं की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। इस प्रकार की डिजाइन व्यवस्था उपभोक्ताओं को बिना पूरी जानकारी के निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है और कई बार उन्हें ऐसे विकल्प स्वीकार करने पड़ते हैं,जिनके बारे में उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं होती। प्राधिकरण ने कहा कि यह निष्पक्ष,पारदर्शी और ईमानदार उपभोक्ता व्यवहार के सिद्धांतों के विपरीत है।

प्राधिकरण ने यह भी माना कि स्पाइसजेट का यह आचरण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के कई प्रावधानों का उल्लंघन करता है। इसके अनुसार,कंपनी की कार्यप्रणाली अनुचित व्यापारिक प्रथा,अनुचित अनुबंध और भ्रामक प्रस्तुतीकरण की श्रेणी में आती है। कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता किसी भी सेवा का चयन पूरी जानकारी और स्वतंत्र इच्छा के आधार पर करें,न कि किसी भ्रामक डिजिटल प्रक्रिया के कारण।

डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ ‘डार्क पैटर्न’ का मुद्दा दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई कंपनियों पर ऐसे इंटरफेस डिजाइन अपनाने के आरोप लग चुके हैं, जिनके माध्यम से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सेवाएँ लेने,सदस्यता स्वीकार करने या निजी जानकारी साझा करने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरित किया जाता है। भारत में भी सरकार इस तरह की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रख रही है और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल स्पाइसजेट तक सीमित नहीं है,बल्कि उन सभी डिजिटल कंपनियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है,जो अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भ्रामक डिजाइन तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ताओं की सहमति और उनकी पसंद का सम्मान करना सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की भ्रामक डिजिटल रणनीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सीसीपीए की यह कार्रवाई उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि डिजिटल कारोबार में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियामक संस्थाएँ लगातार सक्रिय हैं। आने वाले समय में ऑनलाइन सेवायें प्रदान करने वाली अन्य कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी इसी तरह की निगरानी रखे जाने की संभावना है।

फिलहाल स्पाइसजेट को जुर्माने के साथ-साथ अपनी बुकिंग प्रक्रिया में आवश्यक सुधार लागू करने और भविष्य में उपभोक्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना किसी भी प्रकार की सदस्यता या प्रचार संबंधी सुविधा सक्रिय न करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले को उपभोक्ता हितों की रक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।