‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री का संदेश (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री का संदेश,पेपर लीक पर सख्ती,किसानों के हित और संसद की गरिमा पर दिया विशेष जोर

नई दिल्ली,21 जुलाई (युआईटीवी)- संसद के मानसून सत्र के बीच आयोजित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की महत्वपूर्ण ‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गठबंधन के सभी सांसदों को संबोधित करते हुए कई अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट किया। बैठक में केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं, संसद की कार्यप्रणाली, युवाओं के भविष्य, पेपर लीक की घटनाओं, किसानों के हितों, मुक्त व्यापार समझौतों तथा देश के विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने इस दौरान सांसदों से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, संसद की गरिमा बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के सांसद शामिल हुए।

बैठक की जानकारी देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत हाल ही में निर्वाचित नए राज्यसभा सदस्यों का स्वागत करते हुए की। उन्होंने सभी नए सांसदों को बधाई दी और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाने में उनकी सक्रिय भूमिका की अपेक्षा जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह देश की आकांक्षाओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करने वाला सर्वोच्च संस्थान है। उन्होंने नए सांसदों से आग्रह किया कि वे सदन में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ करें।

बैठक के दौरान पेपर लीक का मुद्दा प्रमुख रूप से चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान नहीं पहुँचाती,बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के सपनों और विश्वास को भी प्रभावित करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले को अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ देख रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे ही सरकार को नीट परीक्षा में पेपर लीक की जानकारी मिली, तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई। जाँच एजेंसियों को सक्रिय किया गया और अब तक इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की पहली चिंता उन लाखों छात्रों का भविष्य था,जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ परीक्षा दी थी। इसी कारण दोबारा परीक्षा को प्राथमिकता के आधार पर आयोजित किया गया और परिणाम भी समय पर घोषित किया गया,ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार केवल तत्काल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था तैयार करेगी जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी,सुरक्षित तथा तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य ऐसी पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था विकसित करना है जिसमें पेपर लीक जैसी घटनाओं की कोई संभावना न रहे।

बैठक में प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि दोषियों को कानून के अनुसार कठोर से कठोर सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार का अपराध करने का साहस न कर सके। किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री का मानना है कि इस दिशा में प्रभावी कानूनी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मजबूत कानूनी प्रक्रिया और समयबद्ध न्याय ही ऐसे अपराधों पर स्थायी रोक लगाने में सहायक हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक किसी एक राज्य या केवल केंद्र सरकार का विषय नहीं है। यह पूरे देश और विशेष रूप से युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती का समाधान तभी संभव है जब सभी राज्य सरकारें, सभी राजनीतिक दल और संबंधित संस्थाएँ मिलकर काम करें। उन्होंने इस विषय को राजनीति से ऊपर उठकर देखने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।

बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के युवाओं की प्रतिभा और क्षमता पर सरकार को पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान,प्रौद्योगिकी, शिक्षा,नवाचार, खेल और उद्यमिता सहित अनेक क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है जिसमें युवाओं को निष्पक्ष अवसर मिलें और वे अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पेपर लीक के अलावा बैठक में देश की आर्थिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। किरेन रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ महीनों में भारत की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया और विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है और वैश्विक स्तर पर देश की साख बढ़ रही है। मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से भारत नए बाजारों तक अपनी पहुँच मजबूत कर रहा है,जिससे उद्योग,व्यापार और कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से किसानों के हितों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किए गए सभी मुक्त व्यापार समझौतों में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौते में किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का प्रत्येक निर्णय इस बात को ध्यान में रखकर लिया गया है कि देश के कृषि क्षेत्र को अधिक अवसर मिलें और किसानों की आय तथा प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते केवल निर्यात बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय किसानों,उद्यमियों और उद्योगों के लिए नए अवसर भी उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन समझौतों से कृषि उत्पादों के लिए नए अंतर्राष्ट्रीय बाजार खुलेंगे और भारतीय किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

बैठक के दौरान संसद के मानसून सत्र को लेकर भी प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों से कहा कि वे पूरे सत्र के दौरान सकारात्मक,रचनात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि सरकार देशहित से जुड़े जिन भी विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को संसद में प्रस्तुत करेगी,उन्हें गठबंधन के सभी सांसद मिलकर आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने सांसदों से संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सक्रिय सहयोग देने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से भी सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं और विभिन्न विचारधाराएँ लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाती हैं। लेकिन संसद का उद्देश्य केवल राजनीतिक टकराव नहीं है। यह देश के भविष्य,युवाओं के विकास,आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय हित से जुड़े निर्णय लेने का सर्वोच्च मंच है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को संसद की गरिमा बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों पर सहयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से अपेक्षा करती है कि वे संसद में सार्थक चर्चा करें और राष्ट्रहित में निर्णय लें। संसद की कार्यवाही बाधित होने से विकास संबंधी महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतियों पर असर पड़ता है,जिसका प्रभाव अंततः आम नागरिकों पर पड़ता है। इसलिए सभी सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करें और सदन की कार्यवाही को प्रभावी ढंग से संचालित होने दें।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि बैठक का वातावरण अत्यंत सकारात्मक रहा और सभी सांसदों ने प्रधानमंत्री के विचारों को गंभीरता से सुना। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के समग्र विकास,युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार विकास,सुशासन और पारदर्शिता के एजेंडे पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सरकार आने वाले समय में शिक्षा,कृषि, उद्योग,विज्ञान,प्रौद्योगिकी और रोजगार जैसे क्षेत्रों में नई पहल जारी रखेगी। युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना,किसानों की आय बढ़ाना,वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और संसद के माध्यम से प्रभावी नीतिगत निर्णय लेना सरकार के प्रमुख लक्ष्य बने रहेंगे।

‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश स्पष्ट था कि देश का भविष्य युवाओं,किसानों और मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं पर निर्भर करता है। पेपर लीक जैसे अपराधों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, किसानों के हितों की रक्षा,मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से आर्थिक अवसरों का विस्तार और संसद की गरिमा बनाए रखने की अपील के जरिए उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए और सभी जनप्रतिनिधियों को मिलकर भारत के विकास,युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और लोकतंत्र की मजबूती के लिए कार्य करना चाहिए। यही संदेश इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष बनकर सामने आया।