नई दिल्ली,21 जुलाई (युआईटीवी)- ब्रिटेन की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। एंडी बर्नहैम ने भारतीय समयानुसार सोमवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया। नई जिम्मेदारी सँभालने के बाद उन्हें दुनिया भर के नेताओं की ओर से शुभकामनाएँ मिलीं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश, प्रौद्योगिकी,रक्षा और जन-संपर्क जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महीने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने से द्विपक्षीय संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में एंडी बर्नहैम को नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन के संबंध केवल आर्थिक या कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं,बल्कि दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों,कानून के शासन और वैश्विक शांति तथा स्थिरता के प्रति समान प्रतिबद्धता से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच वर्षों से विकसित हुई रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और ब्रिटेन के बीच हाल ही में लागू हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देगा। उनके अनुसार,यह समझौता व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ उद्योग,नवाचार,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी,रक्षा सहयोग और लोगों के बीच संपर्क को भी नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह एंडी बर्नहैम के साथ मिलकर भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा साझा विजन-2035 को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।
भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश रक्षा,शिक्षा,स्वास्थ्य,हरित ऊर्जा,डिजिटल प्रौद्योगिकी,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को लगातार विस्तार दे रहे हैं। ऐसे में नए ब्रिटिश प्रधानमंत्री के कार्यभार संभालने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर सामने आएँगे और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर,प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद एंडी बर्नहैम ने अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर विस्तार से अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। बकिंघम पैलेस में औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब वह 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुँचे,तो उन्होंने ब्रिटेन के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य देश में राजनीतिक स्थिरता बहाल करना और लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास फिर से मजबूत करना होगा।
अपने संबोधन में एंडी बर्नहैम ने पिछले एक दशक के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार प्रधानमंत्री बदलने से जनता के मन में राजनीति के प्रति भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में सत्ता के इसी गलियारे से सरकार बनाने के लिए आने वाले वह छठे व्यक्ति हैं और वर्ष 2016 के बाद सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। उनके अनुसार,यह स्थिति इस बात का संकेत है कि ब्रिटेन को अब आत्ममंथन करने और नई दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीतिक अस्थिरता का असर केवल सरकार तक सीमित नहीं रहता,बल्कि इसका प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था,निवेश,रोजगार और आम नागरिकों के विश्वास पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि अब नेताओं को केवल वादे करने के बजाय बेहतर प्रदर्शन करके जनता का विश्वास दोबारा जीतना होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोग राजनीति से निराश हो चुके हैं और यह समय उस निराशा को समाप्त करने का है।
एंडी बर्नहैम ने अपनी पीढ़ी के नेताओं को भी जिम्मेदारी का एहसास कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि अब यह साबित करना होगा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर सकती है और राजनीतिक नेतृत्व देश की चुनौतियों का समाधान देने में सक्षम है। उनके अनुसार,ब्रिटेन को दुनिया के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत करना होगा कि वह एक बार फिर स्थिर और मजबूत शासन व्यवस्था स्थापित कर सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने अपनी सरकार को “ब्रिटेन के लिए सर्किट ब्रेकर” बताते हुए कहा कि उनकी सरकार देश में पिछले चार दशकों के सबसे बड़े संरचनात्मक बदलाव लागू करेगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि शासन व्यवस्था और आर्थिक नीतियों की व्यापक समीक्षा की जाए,ताकि देश के प्रत्येक क्षेत्र को समान अवसर मिल सके।
उन्होंने वर्ष 1980 के दशक की आर्थिक नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय लिए गए कुछ निर्णयों के कारण राजनीतिक शक्ति का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ और अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों का निजीकरण किया गया। इसके साथ ही अनेक औद्योगिक क्षेत्रों का पतन हुआ,जिसका असर आज भी देश के कई हिस्सों में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कई शहर और औद्योगिक क्षेत्र अब भी पिछड़ेपन,बेरोजगारी और निवेश की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
एंडी बर्नहैम ने कहा कि उनकी सरकार सत्ता के विकेंद्रीकरण पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने की शक्ति केवल केंद्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए,बल्कि स्थानीय प्रशासन और क्षेत्रीय संस्थाओं को भी अधिक अधिकार दिए जाने चाहिए। उनका मानना है कि जब स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी,तभी विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास संभव हो सकेगा।
उन्होंने सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत बनाने का भी संकल्प व्यक्त किया। उनके अनुसार,कई आवश्यक सेवाओं को फिर से अधिक प्रभावी सार्वजनिक नियंत्रण में लाया जाएगा ताकि आम नागरिकों को बेहतर और किफायती सुविधाएँ मिल सकें। उन्होंने संकेत दिया कि स्वास्थ्य,परिवहन और अन्य बुनियादी सेवाओं में सुधार उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
बढ़ती महँगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर भी एंडी बर्नहैम ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आम लोगों को आर्थिक राहत देना उनकी सरकार का प्रमुख उद्देश्य होगा। उन्होंने घोषणा की कि सरकार महँगाई के प्रभाव को कम करने के लिए मंगलवार से कई नई योजनाओं की शुरुआत करेगी। इन योजनाओं के साथ उनके वित्तपोषण की स्पष्ट रूपरेखा भी प्रस्तुत की जाएगी,ताकि जनता को यह विश्वास हो सके कि सरकार केवल घोषणाएँ नहीं,बल्कि ठोस आर्थिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एंडी बर्नहैम के नेतृत्व में ब्रिटेन की घरेलू नीतियों के साथ-साथ उसकी विदेश नीति में भी कुछ नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भारत जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने पर उनकी सरकार विशेष ध्यान दे सकती है। दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक और रणनीतिक सहयोग मौजूद है,जिसे नए व्यापार समझौते और उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद के माध्यम से और आगे बढ़ाने की संभावना है।
भारत और ब्रिटेन के बीच हाल के वर्षों में व्यापार,रक्षा,शिक्षा,स्वास्थ्य,हरित ऊर्जा,डिजिटल अर्थव्यवस्था और नवाचार जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ऐसे में एंडी बर्नहैम के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दी गई शुभकामनाएँ भी इस बात का संकेत हैं कि भारत नई ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर साझा हितों और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एंडी बर्नहैम के सामने एक ओर घरेलू स्तर पर राजनीतिक स्थिरता बहाल करने,आर्थिक चुनौतियों से निपटने और जनता का विश्वास फिर से जीतने की बड़ी जिम्मेदारी है,वहीं दूसरी ओर उन्हें वैश्विक मंच पर भी ब्रिटेन की भूमिका को मजबूत बनाए रखना होगा। ऐसे समय में भारत जैसे प्रमुख साझेदार देशों के साथ सहयोग को नई दिशा देना उनकी सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी सरकार अपने घोषित सुधारों को किस प्रकार लागू करती है और भारत-ब्रिटेन संबंध किस नई ऊँचाई तक पहुँचते हैं।
