डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@wsyx6)

जेनेरिक दवाओं पर ट्रंप का बड़ा टैरिफ प्लान,अमेरिकी उत्पादन बढ़ाने के लिए चरणबद्ध नीति का ऐलान

वॉशिंगटन,22 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में दवा निर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से जेनेरिक दवाओं के आयात पर नई चरणबद्ध टैरिफ नीति की घोषणा की है। इस नई व्यवस्था के तहत अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं को 1 अगस्त 2026 से दो वर्षों तक टैरिफ से पूरी तरह छूट दी जाएगी। इसके बाद अगले एक वर्ष के लिए इन दवाओं पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा और उसके बाद यह शुल्क बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य दवा कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना और घरेलू फार्मास्युटिकल विनिर्माण को मजबूत बनाना है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच पर इस नई नीति की घोषणा करते हुए कहा कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर दो वर्षों तक शून्य प्रतिशत टैरिफ लागू रहेगा। इसके बाद एक वर्ष तक इन दवाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा और फिर यह बढ़कर 200 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह नीति अमेरिकी दवा उद्योग को दोबारा मजबूत बनाने और देश के भीतर उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार की गई है।

ट्रंप ने अपने बयान में किसी विशेष देश या कंपनी का नाम नहीं लिया,लेकिन माना जा रहा है कि इस नीति का असर उन सभी देशों और कंपनियों पर पड़ेगा जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करते हैं। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है और उसकी जेनेरिक दवाओं की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा होता है। ऐसे में नई टैरिफ व्यवस्था वैश्विक दवा उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालाँकि,राष्ट्रपति की घोषणा में इस नीति के कई व्यावहारिक पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। यह नहीं बताया गया कि टैरिफ से छूट पाने के लिए कंपनियों को किन शर्तों को पूरा करना होगा या अमेरिका में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने वाली कंपनियों को किस प्रकार की विशेष सुविधा मिलेगी। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि दो वर्षों की छूट अवधि के दौरान केवल संयंत्र निर्माण शुरू करना पर्याप्त होगा या अधिक शुल्क लागू होने से पहले उत्पादन भी प्रारंभ करना अनिवार्य होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों से मिल सकते हैं। फिलहाल राष्ट्रपति की घोषणा नीति की व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करती है,जबकि इसके क्रियान्वयन से जुड़े कई पहलुओं पर अभी स्पष्टीकरण की आवश्यकता बनी हुई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चरणबद्ध टैरिफ संरचना का उद्देश्य विदेशी कंपनियों को दंडित करना नहीं,बल्कि उन्हें अमेरिका में निवेश के लिए प्रेरित करना है। उनके अनुसार यदि कंपनियों को पहले दो वर्षों तक बिना टैरिफ के अमेरिकी बाजार तक पहुँच मिलेगी,तो उन्हें इस अवधि का उपयोग अमेरिका में उत्पादन सुविधाएँ विकसित करने के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कंपनियाँ निर्धारित समय के भीतर अमेरिका में संयंत्र और आवश्यक उपकरण स्थापित नहीं करेंगी,उन्हें बाद में अधिक आयात शुल्क का सामना करना पड़ेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह नीति अमेरिका में जेनेरिक दवा निर्माण को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन विदेशों में होता रहा है,जिससे अमेरिका की आपूर्ति श्रृंखला बाहरी स्रोतों पर निर्भर हो गई है। उनके अनुसार इस स्थिति को बदलना राष्ट्रीय हित और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों के लिए आवश्यक है।

ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनका कहना था कि यदि आवश्यक दवाओं का उत्पादन देश के भीतर होगा तो आपूर्ति में बाधा आने की संभावना कम होगी और आपातकालीन परिस्थितियों में भी अमेरिका अपनी जरूरतों को स्वयं पूरा करने में सक्षम रहेगा। उन्होंने घरेलू विनिर्माण को राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ते हुए कहा कि महत्वपूर्ण दवाओं के लिए विदेशी आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में जोखिम पैदा कर सकती है।

नई नीति के अनुसार 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाली व्यवस्था में पहले दो वर्षों तक जेनेरिक दवाओं का आयात बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जारी रहेगा। इसके बाद एक वर्ष तक 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा और फिर इसे बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस क्रमिक व्यवस्था का उद्देश्य कंपनियों को अचानक झटका देने के बजाय उन्हें अमेरिका में निवेश के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि जेनेरिक दवाओं के लिए घोषित नई नीति पेटेंट प्राप्त, ब्रांडेड और नवाचार आधारित दवाओं पर लागू नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इन दवाओं के लिए पहले से लागू नीति में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। हालाँकि,उन्होंने इस संबंध में अधिक जानकारी साझा नहीं की और केवल इतना कहा कि वर्तमान व्यवस्था सफल रही है तथा उसे यथावत रखा जाएगा।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी नीतियों के कारण पहले से ही कई फार्मास्युटिकल कंपनियाँ अमेरिका में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश कर रही हैं। ट्रंप ने कहा कि देशभर में दवा निर्माण से जुड़ी नई उत्पादन इकाइयों का निर्माण तेज गति से हो रहा है और यह स्तर पहले कभी नहीं देखा गया। उनके अनुसार यह रुझान बताता है कि उद्योग अमेरिका में निवेश के अवसरों को लेकर सकारात्मक है।

फार्मास्युटिकल उद्योग के जानकारों का मानना है कि यदि यह नीति पूरी तरह लागू होती है,तो इससे वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं। अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का निर्यात करने वाली कंपनियों को अपनी दीर्घकालिक रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। वहीं अमेरिका में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को भविष्य में शुल्क संबंधी लाभ मिल सकता है।

हालाँकि,विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अमेरिका में नई उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करना समय और पूँजी दोनों की दृष्टि से बड़ी चुनौती है। किसी भी दवा निर्माण संयंत्र को स्थापित करने,नियामकीय स्वीकृतियाँ प्राप्त करने और व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने में कई वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनियाँ ट्रंप प्रशासन की इस नई नीति पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती हैं।

फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह घोषणा अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता घटाने की उनकी व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले महीनों में इस नीति के विस्तृत दिशा-निर्देश और उद्योग की प्रतिक्रिया यह तय करेंगे कि इसका प्रभाव अमेरिकी दवा बाजार,वैश्विक फार्मास्युटिकल कंपनियों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर किस रूप में देखने को मिलता है।