अमेरिका-सऊदी अरब के बीच परमाणु सहयोग को मिली नई दिशा (तस्वीर क्रेडिट@mam37ir)

अमेरिका-सऊदी अरब के बीच परमाणु सहयोग को मिली नई दिशा,ट्रंप ने 30 वर्षीय समझौते को दी मंजूरी

वॉशिंगटन,22 जुलाई (युआईटीवी)- अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार,राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण परमाणु समझौते को औपचारिक मंजूरी दे दी है। बताया जा रहा है कि यह समझौता 30 वर्षों के लिए होगा और इसके तहत सऊदी अरब को नागरिक परमाणु कार्यक्रम विकसित करने का अवसर मिलेगा। इस समझौते के माध्यम से अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और व्यावसायिक अवसर मिलने की संभावना है। हालाँकि,इस प्रस्ताव ने मध्य पूर्व में परमाणु तकनीक के प्रसार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है।

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह के अंत में इस समझौते को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार,यह समझौता अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु सहयोग के दायरे को पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक बनाएगा और आने वाले दशकों तक दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगा।

रिपोर्ट के अनुसार,इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके तहत सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन की संभावना को भी शामिल किया गया है। हालाँकि,इस दिशा में किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले अमेरिका और सऊदी अरब संयुक्त रूप से एक विस्तृत अध्ययन करेंगे। यदि इस अध्ययन में यह निष्कर्ष निकलता है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यूरेनियम संवर्धन संयंत्र आवश्यक है, तभी ऐसे संयंत्र के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिकी कंपनियाँ सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों के निर्माण और संचालन में प्रमुख भूमिका निभाएँगी। समझौते की संरचना इस प्रकार तैयार की गई है कि सऊदी अरब के विकसित हो रहे परमाणु बुनियादी ढाँचे में अमेरिकी कंपनियां केंद्रीय भूमिका निभाएँ,जबकि अन्य विदेशी कंपनियों की भागीदारी सीमित रहे। इससे अमेरिका की परमाणु ऊर्जा कंपनियों के लिए अरबों डॉलर के नए व्यावसायिक अवसर खुल सकते हैं।

यूरेनियम संवर्धन को परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का सबसे संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। सामान्य स्तर पर संवर्धित यूरेनियम का उपयोग नागरिक परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन तैयार करने में किया जाता है,जिससे बिजली उत्पादन किया जाता है। लेकिन यही तकनीक यदि अत्यधिक स्तर तक विकसित की जाए,तो इसका उपयोग परमाणु हथियारों के लिए आवश्यक सामग्री तैयार करने में भी किया जा सकता है। इसी दोहरे उपयोग की संभावना के कारण यूरेनियम संवर्धन अंतर्राष्ट्रीय परमाणु कूटनीति का सबसे विवादास्पद विषय माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देने से मध्य पूर्व में परमाणु संतुलन को लेकर नई चिंताएँ पैदा हो सकती हैं। अमेरिकी कांग्रेस में पहले भी इस प्रकार के प्रस्तावों को लेकर कई बार गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कई सांसदों का मानना रहा है कि यदि क्षेत्र के अधिक देशों को संवेदनशील परमाणु तकनीक तक पहुँच मिलती है,तो इससे भविष्य में हथियारों की होड़ बढ़ने का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।

हालाँकि,ट्रंप प्रशासन का तर्क इससे अलग है। प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि यदि अमेरिका स्वयं सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम में प्रमुख भागीदार बनता है, तो उसे इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी और दिशा तय करने का बेहतर अवसर मिलेगा। उनके अनुसार अमेरिकी कंपनियों और विशेषज्ञों की सीधी भागीदारी से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि परमाणु तकनीक का उपयोग केवल शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों तक सीमित रहे तथा उसका किसी भी प्रकार से सैन्य उपयोग न हो।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान द्वारा किए जाने की संभावना है। दोनों देशों के बीच इस सहयोग पर पिछले काफी समय से बातचीत चल रही थी। अप्रैल 2025 में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के दौरान सऊदी अरब का दौरा किया था। उसी दौरान उन्होंने अपने सऊदी समकक्ष के साथ परमाणु ऊर्जा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की थी।

इस समझौते को अमेरिका के परमाणु उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। यदि यह पूरी तरह लागू होता है,तो अमेरिकी कंपनियों को परमाणु रिएक्टरों के निर्माण, परमाणु ईंधन सेवाओं,तकनीकी सहायता,इंजीनियरिंग परियोजनाओं और संबंधित बुनियादी ढाँचे के विकास से जुड़े बड़े अनुबंध प्राप्त हो सकते हैं। इससे अमेरिकी उद्योग को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

दूसरी ओर सऊदी अरब भी अपनी ऊर्जा नीति में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल सऊदी अरब लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल आधारित मॉडल से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है। इसी रणनीति के तहत वह नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे वैकल्पिक स्रोतों का विकास कर रहा है,ताकि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विविधीकरण दोनों को सुनिश्चित किया जा सके।

सऊदी अरब का कहना है कि देश में बिजली की माँग लगातार बढ़ रही है और केवल तेल आधारित उत्पादन पर निर्भर रहना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। यदि बिजली उत्पादन के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग बढ़ाया जाता है,तो घरेलू स्तर पर तेल की खपत कम होगी और अधिक मात्रा में तेल का निर्यात किया जा सकेगा। इससे देश की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ ऊर्जा संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग भी संभव होगा।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने से सऊदी अरब को आधुनिक औद्योगिक विकास,वैज्ञानिक अनुसंधान और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में भी नई संभावनाएँ मिल सकती हैं। हालाँकि,इसके साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था का पालन करना भी उतना ही आवश्यक होगा।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस समझौते पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है। परमाणु अप्रसार व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञ इस बात पर नजर रखेंगे कि प्रस्तावित समझौते में सुरक्षा,पारदर्शिता और अंतर्राष्ट्रीय निगरानी से संबंधित कौन-कौन से प्रावधान शामिल किए जाते हैं। वहीं मध्य पूर्व के अन्य देश भी इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानकर देख रहे हैं।

फिलहाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के बाद यह समझौता अमेरिका और सऊदी अरब के रणनीतिक संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यदि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस पर औपचारिक हस्ताक्षर होते हैं और परियोजनाएँ आगे बढ़ती हैं, तो यह न केवल दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग को नई ऊँचाई देगा,बल्कि मध्य पूर्व की भू-राजनीति,वैश्विक परमाणु उद्योग और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।