वॉशिंगटन/तेहरान,4 अगस्त (युआईटीवी)- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए बातचीत जारी है और इस दिशा में बहुत जल्द सकारात्मक नतीजे सामने आ सकते हैं। वहीं,ईरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ उसकी किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ता नहीं चल रही है। दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के भविष्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
ओवल ऑफिस में सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के मुद्दे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कोई अत्यधिक जटिल मामला नहीं है और इस पर जल्द समझौता हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि उनकी कोशिश है कि जलडमरूमध्य को जल्द से जल्द पूरी तरह खोला जाए ताकि समुद्री यातायात सामान्य हो सके। उन्होंने यहां तक कहा कि स्थिति इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि बहुत कम समय में इस दिशा में परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
ट्रंप ने इससे पहले ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि ईरान ने समझौते का रास्ता नहीं अपनाया,तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में अपने हितों और क्षेत्रीय स्थिरता से समझौता नहीं करेगा। हालाँकि,इसी के साथ उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है,तो वह सभी पक्षों के लिए बेहतर होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में समझौते तक पहुँचने की कोशिश करेगा। उनके अनुसार,बातचीत का उद्देश्य केवल जलडमरूमध्य को खोलना नहीं बल्कि क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करना भी है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है और इसे लंबे समय तक बाधित रहने देना पूरी दुनिया के लिए नुकसानदायक होगा।
हालाँकि, ट्रंप के इन दावों के कुछ ही समय बाद ईरान ने उनका पूरी तरह खंडन कर दिया। तेहरान में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि ईरान ने न तो किसी प्रतिनिधि को वार्ता के लिए भेजा है और न ही अमेरिका के किसी प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की आधिकारिक वार्ता का प्रश्न ही नहीं उठता।
बाघेई ने यह भी बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची को छोड़कर ईरान के सभी प्रमुख वार्ताकार देश के भीतर मौजूद हैं। उनका कहना था कि यदि अमेरिका यह दावा कर रहा है कि बातचीत जारी है तो वह वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता। ईरान का रुख स्पष्ट है और फिलहाल अमेरिका के साथ कोई संवाद नहीं चल रहा है।
ईरानी प्रवक्ता के बयान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच “ट्रुथ सोशल” पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ईरान का नेतृत्व दोहरे चरित्र वाला है। ट्रंप के अनुसार,एक ओर ईरान बातचीत के लिए प्रयास करता है और दूसरी ओर सार्वजनिक रूप से यह दावा करता है कि किसी प्रकार की वार्ता नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने अलग-अलग संदेश देकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
इस बीच,ईरान ने यह स्वीकार किया है कि वह ओमान के साथ परामर्श कर रहा है। इस्माइल बाघेई ने कहा कि ओमान के साथ चल रही बातचीत का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था तैयार करना है। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार,इस प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और क्षेत्र में समुद्री यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना है।
बाघेई ने यह भी स्पष्ट किया कि मस्कट और तेहरान के बीच चल रही इन वार्ताओं में किसी तीसरे देश की भागीदारी नहीं है। उनका कहना था कि यह पूरी तरह ईरान और ओमान के बीच का विषय है तथा इसमें किसी अन्य शक्ति की भूमिका नहीं है। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका लगातार दावा कर रहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े समाधान का हिस्सा है।
दूसरी ओर,ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने रविवार को ईरान के खिलाफ प्रस्तावित बड़े सैन्य अभियान को रोक दिया था। उनके अनुसार,यह हमला द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा अभियान हो सकता था,लेकिन सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर सहित कई क्षेत्रीय देशों के अनुरोध पर उन्होंने इस कार्रवाई को रोकने का निर्णय लिया। ट्रंप ने कहा कि इन देशों ने उनसे तनाव कम करने और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की अपील की थी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रविवार को उनसे बातचीत की थी। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार,इस बातचीत में क्षेत्रीय तनाव कम करने,संघर्ष विराम को बढ़ावा देने और राजनयिक प्रयासों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। क्राउन प्रिंस ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई की खबर सार्वजनिक होने के बाद ईरान घबरा गया था और उसने बातचीत की इच्छा जताई। उनके अनुसार,ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर चर्चा की बात कही। हालाँकि,इस दावे की पुष्टि ईरान की ओर से नहीं की गई और तेहरान ने पहले की तरह इसे भी पूरी तरह खारिज कर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच पहले भी एक समझौते का प्रयास हुआ था। ट्रंप के अनुसार, 17 जून को उन्होंने और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने जलडमरूमध्य को खोलने के लिए एक ज्ञापन समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन इसके कुछ ही सप्ताह बाद स्थिति फिर बिगड़ गई। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए,जबकि ईरान ने अमेरिका पर अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच बना समझौता प्रभावी नहीं रह सका।
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहता,बल्कि उसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार,समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी विरोधाभासी बयान यह दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच भरोसे का गंभीर संकट बना हुआ है। जहाँ अमेरिका बातचीत और दबाव दोनों रणनीतियों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है,वहीं ईरान सार्वजनिक रूप से किसी भी प्रकार की अमेरिकी वार्ता से इनकार कर रहा है और ओमान के साथ क्षेत्रीय स्तर पर समाधान तलाशने की बात कह रहा है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक बातचीत शुरू होगी या नहीं,लेकिन इतना तय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी यह कूटनीतिक टकराव वैश्विक राजनीति,ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बना रहेगा। पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अमेरिका और ईरान अपने मतभेदों को बातचीत से सुलझाने में सफल होते हैं या फिर क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ता है।
