मेलबर्न की रक्षा विनिर्माण कंपनी पर हमले की आतंकवाद के एंगल से जाँच (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

मेलबर्न की रक्षा विनिर्माण कंपनी पर हमले की आतंकवाद के एंगल से जाँच,ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियाँ हुईं सतर्क

मेलबर्न,5 अगस्त (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में स्थित एक रक्षा विनिर्माण कंपनी पर वर्ष 2025 में हुए हमले की जाँच अब आतंकवाद के मामले के रूप में की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने बुधवार को इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जाँच और एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर इस घटना को केवल तोड़फोड़ या आगजनी का मामला नहीं माना जा रहा,बल्कि इसके पीछे संगठित और वैचारिक रूप से प्रेरित चरमपंथी गतिविधियों की आशंका जताई गई है। इस मामले की जाँच अब देश की प्रमुख सुरक्षा और खुफिया एजेंसियाँ संयुक्त रूप से कर रही हैं।

सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार,यह हमला 5 जुलाई 2025 की सुबह मेलबर्न के उत्तर-पूर्वी उपनगर में स्थित रक्षा विनिर्माण कंपनी लोविट टेक्नोलॉजीज के परिसर पर किया गया था। हमलावरों ने कंपनी के परिसर में खड़ी कई गाड़ियों में आग लगा दी थी और संपत्ति को व्यापक नुकसान पहुँचाया था। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती मानते हुए विस्तृत जाँच शुरू की थी।

ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस,ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन और विक्टोरिया पुलिस ने बुधवार को संयुक्त बयान जारी कर पुष्टि की कि इस मामले की जाँच अब आतंकवाद के दृष्टिकोण से की जा रही है। तीनों एजेंसियों ने बताया कि उनकी संयुक्त इकाई, विक्टोरियन जॉइंट काउंटर टेररिज्म टीम,इस पूरे मामले की गहन जाँच कर रही है और हमले के पीछे मौजूद नेटवर्क,उद्देश्य तथा संभावित सहयोगियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

जाँच एजेंसियों के अनुसार,प्रारंभिक साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि इस हमले के पीछे अराजकतावादी और क्रांतिकारी विचारधारा से प्रेरित अति-वामपंथी चरमपंथियों का हाथ हो सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत दुश्मनी या आर्थिक उद्देश्य से नहीं,बल्कि वैचारिक कारणों से किया गया था। इसी कारण इस घटना को आतंकवाद के दायरे में रखते हुए जाँच आगे बढ़ाई जा रही है।

जाँच के दौरान सामने आया कि हमले के बाद एक समूह ने ऑनलाइन वीडियो जारी कर इस घटना की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। अधिकारियों के अनुसार,वीडियो में नकाबपोश लोगों ने स्वयं को हमले के लिए जिम्मेदार बताया और फिलिस्तीन के समर्थन में संदेश दिया। वीडियो में आग लगाने वाले उपकरण तैयार करने के तरीके भी बताए गए थे। जाँच एजेंसियों का मानना है कि वर्ष 2025 में कंपनी पर हमले के दौरान इसी प्रकार के उपकरणों का उपयोग किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति ने खुद को एनॉनिमस सेल नामक समूह का प्रतिनिधि बताया। उसने दावा किया कि रक्षा कंपनी को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उसका संबंध उन रक्षा परियोजनाओं से है,जिनका उपयोग इजरायली सेना द्वारा किए जाने वाले सैन्य विमानों के निर्माण में होता है। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह समूह वास्तव में कितना संगठित है और उसके सदस्य ऑस्ट्रेलिया के भीतर सक्रिय हैं या उनके अंतर्राष्ट्रीय संपर्क भी हैं।

प्रारंभिक जाँच के अनुसार,संदिग्धों का मानना था कि लोविट टेक्नोलॉजीज ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल की आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा है और इसलिए उसे निशाना बनाया गया। जाँचकर्ताओं का कहना है कि हमले का उद्देश्य केवल संपत्ति को नुकसान पहुँचाना नहीं था, बल्कि रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिष्ठानों को भयभीत करना और वैचारिक संदेश देना भी हो सकता है।

कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, लोविट टेक्नोलॉजीज वैश्विक एफ-35 जॉइंट स्ट्राइक फाइटर कार्यक्रम के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान करती है। इसके अलावा कंपनी बोइंग के कई सैन्य विमान निर्माण कार्यक्रमों से भी जुड़ी हुई है। रक्षा क्षेत्र में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियाँ इस बात की भी जाँच कर रही हैं कि क्या हमलावरों ने कंपनी का चयन पहले से सुनियोजित तरीके से किया था।

ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के हमले केवल किसी एक कंपनी के खिलाफ अपराध नहीं माने जा सकते,बल्कि यदि उनका उद्देश्य वैचारिक दबाव बनाना,डर फैलाना या सरकारी नीतियों को प्रभावित करना हो,तो उन्हें आतंकवादी गतिविधि की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसी आधार पर जाँच को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

विक्टोरियन जॉइंट काउंटर टेररिज्म टीम ने कहा कि यदि जाँच में आरोपों की पुष्टि होती है और संदिग्धों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है,तो उन्हें ऑस्ट्रेलिया के आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान इसलिए रखा गया है,ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या संगठन इस प्रकार की हिंसक गतिविधियों के माध्यम से वैचारिक संदेश देने का प्रयास न करे।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में दुनिया के कई देशों में वैचारिक रूप से प्रेरित छोटे-छोटे चरमपंथी समूहों की गतिविधियाँ बढ़ी हैं। ये समूह सोशल मीडिया और ऑनलाइन मंचों का उपयोग कर अपने विचारों का प्रचार करते हैं और कभी-कभी हिंसक घटनाओं को अंजाम देकर व्यापक ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य,ऑनलाइन गतिविधियों और संचार नेटवर्क की जाँच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियाँ अब हमले से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड,वीडियो,सोशल मीडिया पोस्ट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जाँच कर रही हैं। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान क्या है और क्या वे किसी बड़े अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। जाँचकर्ताओं का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।

इस घटना ने ऑस्ट्रेलिया में रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर भी नई बहस शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा उद्योग से जुड़ी कंपनियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं और ऐसे प्रतिष्ठानों की सुरक्षा लगातार मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। यदि किसी वैचारिक समूह द्वारा उन्हें निशाना बनाया जाता है,तो उसका प्रभाव केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रहता,बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस,ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन और विक्टोरिया पुलिस संयुक्त रूप से इस मामले की हर कड़ी की जाँच कर रहे हैं। अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी हो तो वह तुरंत जाँच एजेंसियों को उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि सार्वजनिक सहयोग से ऐसे मामलों की जाँच अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

मेलबर्न में रक्षा विनिर्माण कंपनी पर हुआ यह हमला अब केवल आगजनी या तोड़फोड़ का मामला नहीं रह गया है। जाँच के आतंकवाद के दायरे में आने के बाद इस घटना का महत्व और बढ़ गया है। आने वाले समय में जांच के निष्कर्ष यह स्पष्ट करेंगे कि इस हमले के पीछे कौन लोग थे,उनके उद्देश्य क्या थे और क्या वे किसी बड़े चरमपंथी नेटवर्क का हिस्सा थे। तब तक ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियाँ पूरे मामले की गहन जाँच में जुटी हुई हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर पहलू पर सतर्क नजर बनाए हुए हैं।