अमेरिका-ब्राजील के रिश्तों में बढ़ा तनाव (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमेरिका-ब्राजील के रिश्तों में बढ़ा तनाव,राजदूत का वीजा रद्द होने से गहराया कूटनीतिक विवाद

वाशिंगटन,5 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका और ब्राजील के बीच लंबे समय से चल रहा कूटनीतिक तनाव अब एक नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुँच गया है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में आई तल्खी उस समय और बढ़ गई,जब अमेरिका ने ब्राजील की राजदूत मारिया लुइजा विओटी का वीजा रद्द कर दिया। इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते मतभेदों का ताजा संकेत माना जा रहा है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, यह फैसला पिछले महीने ब्राजील द्वारा दो अमेरिकी राजनयिकों को वीजा देने से इनकार करने और ब्राजील में नए अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति को मंजूरी नहीं देने के जवाब में लिया गया है। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक,व्यापारिक और कूटनीतिक मतभेदों को और गहरा कर दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक,जून की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनियल पेरेज को ब्राजील में अमेरिका का अगला राजदूत नामित किया था। हालाँकि,अमेरिकी सीनेट ने अभी तक उनके नामांकन की पुष्टि नहीं की है। इसके अलावा,अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक प्रक्रिया के अनुसार किसी भी नए राजदूत को अपने पद पर कार्यभार सँभालने से पहले मेजबान देश की औपचारिक स्वीकृति भी आवश्यक होती है। ब्राजील की ओर से इस नियुक्ति को अब तक मंजूरी नहीं मिलने के कारण डेनियल पेरेज अपना पदभार ग्रहण नहीं कर सके हैं।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन इस देरी को लेकर असंतुष्ट है। अमेरिकी मीडिया ने विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि यदि दोनों देशों के बीच चल रहा विवाद सुलझ जाता है,तो ब्राजील की राजदूत मारिया लुइजा विओटी का वीजा दोबारा बहाल किया जा सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका इस कदम को दबाव की रणनीति के रूप में भी इस्तेमाल कर रहा है,ताकि कूटनीतिक गतिरोध को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके।

ब्राजील के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी कार्रवाई की पुष्टि की है। ब्राजील के समाचार माध्यम ग्लोबोन्यूज के अनुसार,जब राजदूत मारिया लुइजा विओटी को उनके वीजा रद्द किए जाने की जानकारी दी गई, उस समय वह ब्राजील में ही मौजूद थीं। फिलहाल ब्राजील सरकार ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है,लेकिन विदेश मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।

हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने पहले भी कई ब्राजीलियाई अधिकारियों पर नए वीजा प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही वाशिंगटन ने ब्राजील के सुप्रीम फेडरल कोर्ट द्वारा चल रही कुछ चर्चित न्यायिक जांचों से जुड़े फैसलों की भी सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन मामलों का प्रभाव लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक स्वतंत्रता पर पड़ सकता है,जबकि ब्राजील ने इन टिप्पणियों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा।

कूटनीतिक मतभेदों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच व्यापारिक विवाद भी लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने हाल ही में ब्राजील से आयात होने वाले कई उत्पादों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस फैसले का असर कृषि,औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र के कई निर्यात उत्पादों पर पड़ने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य कथित अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और जबरन श्रम से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई करना है।

दूसरी ओर ब्राजील ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। राष्ट्रपति लूला प्रशासन का कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ आर्थिक कारणों से अधिक राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं। ब्राजील का आरोप है कि इन व्यापारिक प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका उसके घरेलू राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है। ब्राजील सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक बातचीत जारी रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर विश्व व्यापार संगठन के मंच का भी सहारा लेगी।

दोनों देशों के बीच मौजूदा विवाद की एक महत्वपूर्ण कड़ी जुलाई में सामने आई थी,जब ब्राजील ने अमेरिकी विदेश विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के वीजा आवेदन अस्वीकार कर दिए थे। ब्राजील सरकार को आशंका थी कि इन अधिकारियों की प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य देश की चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले कुछ समूहों को समर्थन देना हो सकता है। इसी कारण उनके वीजा अनुरोधों को मंजूरी नहीं दी गई।

वीजा से वंचित किए गए दोनों अधिकारी अमेरिकी विदेश विभाग के लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम ब्यूरो से जुड़े थे। इनमें सहायक सचिव राइली एम. बार्न्स और उप सहायक सचिव सैमुअल सैमसन शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार,दोनों अधिकारियों ने 20 जुलाई को ब्राजील सरकार के समक्ष वीजा के लिए आवेदन किया था। उनकी योजना ब्राजील के कई राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिनिधियों से मुलाकात करने की थी।

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि दोनों अधिकारी पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे तथा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फ्लेवियो बोल्सोनारो,ब्राजील की सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट के अधिकारियों और कुछ दक्षिणपंथी नेताओं से मुलाकात करना चाहते थे। ब्राजील सरकार को आशंका थी कि इस प्रकार की मुलाकातें देश के आंतरिक राजनीतिक माहौल और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इसी आधार पर उनके वीजा आवेदन अस्वीकार कर दिए गए।

ब्राजील के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी पुष्टि की थी कि दोनों अधिकारियों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत वीजा के लिए आवेदन किया था,लेकिन सरकार ने उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ने लगा, जिसका ताजा परिणाम अब ब्राजील की राजदूत का अमेरिकी वीजा रद्द होने के रूप में सामने आया है।

इसी दौरान अमेरिका ने हजारों ब्राजीलियाई निर्यात उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 37.5 प्रतिशत तक कर दिया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य अनुचित व्यापारिक गतिविधियों और श्रम संबंधी कथित अनियमितताओं को रोकना है। हालाँकि,ब्राजील सरकार ने इन दावों को अस्वीकार करते हुए कहा कि उसके व्यापारिक मानक अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप हैं और अमेरिकी कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ब्राजील के बीच मौजूदा विवाद केवल वीजा या व्यापार तक सीमित नहीं है। इसके पीछे दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं, न्यायिक प्रक्रियाओं,चुनावी व्यवस्थाओं और राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर बढ़ते मतभेद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अलग-अलग रुख देखने को मिला है,जिससे द्विपक्षीय संबंधों में जटिलता बढ़ी है।

कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि दोनों देश जल्द ही संवाद के माध्यम से समाधान नहीं खोजते हैं,तो इसका प्रभाव व्यापार,निवेश,रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। अमेरिका और ब्राजील पश्चिमी गोलार्ध की दो महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। ऐसे में बढ़ता तनाव दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है।

फिलहाल दोनों सरकारों की ओर से बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने संकेत दिया है कि यदि मौजूदा विवाद का समाधान निकलता है,तो ब्राजील की राजदूत का वीजा बहाल किया जा सकता है। वहीं ब्राजील भी कूटनीतिक वार्ता और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से अपने हितों की रक्षा करने की बात कह रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश बातचीत के जरिए अपने मतभेद कम कर पाते हैं या यह विवाद और अधिक गहराता है। वर्तमान परिस्थितियों में इतना स्पष्ट है कि अमेरिका और ब्राजील के संबंध एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ हर नया कूटनीतिक कदम दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों की दिशा तय कर सकता है।