चेन्नई,5 अगस्त (युआईटीवी)- तमिलनाडु की नई सरकार ने अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए राज्य के आर्थिक विकास,राजस्व संग्रह,शिक्षा के बुनियादी ढाँचे और दीर्घकालिक विकास को केंद्र में रखने वाली व्यापक वित्तीय रणनीति का खाका प्रस्तुत किया। विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन ने सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में तमिलनाडु को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत,प्रतिस्पर्धी और निवेश के लिए आकर्षक राज्य बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएँगे। सरकार ने वर्ष 2036 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी दोहराया,जिसे इस बजट का प्रमुख उद्देश्य माना जा रहा है।
बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और विकास परियोजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने पर रहेगा। इसके लिए सरकार ने अलग-अलग उपायों के माध्यम से अतिरिक्त 16,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने की योजना बनाई है। सरकार का अनुमान है कि इस राशि में लगभग 15,000 करोड़ रुपये विभिन्न राजस्व वृद्धि पहलों के माध्यम से प्राप्त होंगे, जबकि लगभग 1,000 करोड़ रुपये शराब उत्पादन पर लगाए जाने वाले उपकर से मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इन अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग विकास योजनाओं,सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों और आधारभूत ढाँचे के विस्तार में किया जाएगा।
राज्य की आय बढ़ाने के उद्देश्य से वित्त मंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि जल्द ही एक राजस्व वृद्धि समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति राज्य की आय बढ़ाने के नए स्रोतों की पहचान करेगी और वित्तीय संसाधनों को मजबूत करने के लिए सुझाव देगी। सरकार का मानना है कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों में केवल पारंपरिक राजस्व स्रोतों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा,इसलिए नए वित्तीय मॉडल और प्रभावी कर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस बजट की सबसे प्रमुख विशेषताओं में शिक्षा क्षेत्र को दी गई प्राथमिकता रही। सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य के भविष्य के विकास की मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक शैक्षणिक ढाँचे पर आधारित होगी। इसी सोच के तहत तमिलनाडु के 3,734 सरकारी विद्यालयों के व्यापक आधुनिकीकरण की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की गई है। इस परियोजना का उद्देश्य विद्यालयों के बुनियादी ढाँचे को आधुनिक बनाना,छात्रों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना और सरकारी शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
वित्त मंत्री ने बताया कि इस बड़े आधुनिकीकरण कार्यक्रम के लिए कुल 2,132 करोड़ रुपये खर्च किए जाएँगे। इसके तहत विद्यालय भवनों का नवीनीकरण,कक्षाओं का आधुनिकीकरण,आवश्यक सुविधाओं का विस्तार और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार किया जाएगा। सरकार ने इस परियोजना के पहले चरण के लिए चालू वित्त वर्ष में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है,ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्यों की शुरुआत की जा सके।
सरकार ने केवल भवन निर्माण तक ही अपनी योजना सीमित नहीं रखी है,बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी विशेष जोर दिया है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम को आधुनिक और समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों,नई तकनीकों और रोजगार की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि आधुनिक पाठ्यक्रम छात्रों को बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रदान करेगा और उन्हें उच्च शिक्षा तथा रोजगार के लिए अधिक सक्षम बनाएगा।
विद्यालयों में स्वच्छता और बेहतर वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने “सुपर क्लीन,सुपर कैंपस” नामक नई पहल की भी घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के लिए 129 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत राज्य के लगभग 10,000 सरकारी विद्यालयों में स्वच्छता,रखरखाव और परिसर प्रबंधन के मानकों को बेहतर बनाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसा शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है,जहाँ स्वच्छता,सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हों।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान सरकार की एक अन्य प्रमुख योजना “थाईमामन सीर थिट्टम” के शुभारंभ की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस योजना की शुरुआत 15 सितंबर से की जाएगी। यह योजना नई सरकार की प्रमुख कल्याणकारी पहलों में शामिल है और इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक सरकारी सहायता और विकास योजनाओं का लाभ पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा। हालाँकि,बजट भाषण में योजना के विस्तृत प्रावधानों की जानकारी नहीं दी गई,लेकिन सरकार ने इसे अपने प्रमुख सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल बताया है।
बजट में दीर्घकालिक आर्थिक विकास को विशेष महत्व दिया गया है। सरकार ने वर्ष 2036 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि यह केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं,बल्कि राज्य के समग्र विकास का रोडमैप है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्योग,विनिर्माण,सेवा क्षेत्र,निवेश, आधारभूत ढाँचे,शिक्षा और कौशल विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों में समानांतर रूप से काम किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यदि राजस्व संग्रह में निरंतर वृद्धि होती है और विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है,तो राज्य आर्थिक विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। बजट में यह भी संकेत दिया गया कि निवेश आकर्षित करने,रोजगार के अवसर बढ़ाने और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए आने वाले समय में नई नीतियाँ लागू की जाएँगी। इसके साथ ही आधारभूत ढाँचे के विकास और सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने अपने पहले बजट में वित्तीय अनुशासन और विकास के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। अतिरिक्त राजस्व जुटाने की योजना, शिक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश,विद्यालयों के आधुनिकीकरण और दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि सरकार आने वाले वर्षों में राज्य की विकास दर को नई दिशा देना चाहती है। हालाँकि,इन योजनाओं की वास्तविक सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन पर निर्भर करेगी।
तमिलनाडु का यह पहला बजट नई सरकार की विकास संबंधी प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत देता है। शिक्षा को मजबूत बनाने,राजस्व बढ़ाने,आधारभूत ढाँचे में निवेश करने और दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्य निर्धारित करने जैसे फैसले यह दर्शाते हैं कि सरकार राज्य को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में व्यापक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि बजट में घोषित योजनाओं को किस गति और प्रभावशीलता के साथ जमीन पर उतारा जाता है तथा राज्य अपने महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों की दिशा में कितनी तेजी से आगे बढ़ता है।
