चेन्नई,5 अगस्त (युआईटीवी)- तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ और उनकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उदयनिधि का कहना है कि उनकी गिरफ्तारी पूरी तरह राजनीतिक उद्देश्य से की गई और इसका मकसद किसानों की समस्याओं तथा अन्य महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाना था। उन्होंने दावा किया कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाकर अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है।
उदयनिधि स्टालिन को बुधवार सुबह उनके चेन्नई स्थित आवास से पुलिस ने हिरासत में लिया था। उनके खिलाफ मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ और अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया। हिरासत में लेने के बाद उन्हें तंजावुर जिले के सेंगिपट्टी पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई। पूछताछ पूरी होने के बाद देर रात उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद उदयनिधि स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत संदेश जारी करते हुए अपनी गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने लिखा कि किसानों की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही सरकार अब जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने के लिए विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। उन्होंने सरकार को “सोफा सरकार” बताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई में अधिक रुचि दिखा रहा है।
अपने संदेश में उदयनिधि ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ बदनामी फैलाने के लिए सत्ताधारी दल का इस्तेमाल किया। उनका आरोप था कि तंजावुर में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके भाषण को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और उस आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए और उन्हें चेन्नई से तंजावुर के बीच बार-बार यात्रा करने के लिए मजबूर किया गया,ताकि राजनीतिक दबाव बनाया जा सके।
उदयनिधि स्टालिन ने अपनी गिरफ्तारी को पहले से सुनियोजित राजनीतिक नाटक बताया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें हिरासत में लिया गया,उसी समय उन्होंने मीडिया के सामने स्पष्ट कर दिया था कि वह इस पूरी कार्रवाई को एक राजनीतिक ड्रामा मानते हैं। उनके अनुसार,उन्होंने कभी भी कानून से बचने या पुलिस से भागने की कोशिश नहीं की और जाँच में पूरा सहयोग दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि आज जो सरकार उन्हें गिरफ्तार कर रही है,वही सरकार पहले गंभीर घटनाओं के दौरान अपनी जिम्मेदारियों से बचती रही है। उदयनिधि ने करूर में हुई एक दुखद घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बावजूद मुख्यमंत्री न तो पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे और न ही उन्होंने मीडिया के सामने आकर स्थिति पर जवाब दिया। उन्होंने दावा किया कि उस समय मुख्यमंत्री गिरफ्तारी के डर से सार्वजनिक रूप से सामने आने से बचते रहे।
उदयनिधि ने आगे कहा कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी मुख्यमंत्री ने अगले ही महीने एक फिल्म के प्रचार कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए विदेश यात्रा की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएँ जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय अन्य गतिविधियों पर केंद्रित रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को गिरफ्तारी का भय हो सकता है,तो उन्हें ऐसा कोई डर नहीं है क्योंकि वह लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष करने में विश्वास रखते हैं।
अपने संदेश में उदयनिधि स्टालिन ने अपने राजनीतिक परिवार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेता कलैगनार के पोते तथा मुथुवेल करुणानिधि स्टालिन के पुत्र हैं। उनके अनुसार,लोकतांत्रिक अधिकारों और जनता के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करना उनकी राजनीतिक विरासत का हिस्सा है और वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
उन्होंने किसानों के मुद्दे को अपनी राजनीति का प्रमुख विषय बताते हुए कहा कि यदि किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हुए उन्हें बार-बार गिरफ्तार भी होना पड़े, तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह एक बार नहीं बल्कि सौ बार गिरफ्तारी देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की भलाई और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए वह केवल 300 किलोमीटर ही नहीं,बल्कि 3,000 किलोमीटर से भी अधिक पैदल मार्च करने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार,किसी भी प्रकार की कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई उन्हें जनता के मुद्दों को उठाने से नहीं रोक सकती।
उदयनिधि ने अपनी गिरफ्तारी के बाद समर्थन देने वाले नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई और उनकी गिरफ्तारी की निंदा की। उन्होंने विशेष रूप से अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि कठिन समय में जिस तरह उन्होंने एकजुटता दिखाई,उससे उनका मनोबल और मजबूत हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है,जबकि सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि कानून सभी के लिए समान है और यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। ऐसे में यह मामला केवल कानूनी नहीं,बल्कि राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में सत्ता और विपक्ष के बीच पहले से जारी टकराव अब और तेज हो सकता है। किसानों के मुद्दे, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं। उदयनिधि स्टालिन के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि वह इस मामले को केवल अपनी गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखना चाहते,बल्कि इसे किसानों के अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध की स्वतंत्रता से जोड़कर राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं।
फिलहाल इस मामले ने तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। एक ओर सरकार अपने कदम को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है,वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस विवाद का राजनीतिक प्रभाव कितना व्यापक होगा,इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
