फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो

फीफा में बढ़ा प्रशासनिक विवाद,व्यावसायिक अधिकारों की नई योजना पर विरोध के बीच जियानी इन्फेंटिनो ने बुलाई आपात बैठक

नई दिल्ली,5 अगस्त (युआईटीवी)- विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा इन दिनों अपने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रस्ताव को लेकर गंभीर विवादों के केंद्र में है। संस्था के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फीफा के व्यावसायिक और आयोजन संबंधी अधिकारों के प्रबंधन से जुड़ी अपनी महत्वाकांक्षी योजना को तीव्र विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। इस घटनाक्रम ने न केवल फीफा के भीतर बल्कि दुनिया की प्रमुख फुटबॉल संस्थाओं के बीच भी व्यापक बहस छेड़ दी है। बढ़ते दबाव और लगातार हो रही आलोचनाओं के बीच इन्फेंटिनो ने मोरक्को की राजधानी रबात में एक संकटकालीन बैठक बुलाई है,जिसमें फीफा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूदा स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब फीफा ने “फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज” नाम से एक नई व्यावसायिक इकाई बनाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य फीफा के प्रमुख टूर्नामेंटों, विशेष रूप से फुटबॉल विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों के व्यावसायिक और परिचालन अधिकारों का प्रबंधन एक अलग व्यावसायिक संरचना के माध्यम से करना था। योजना के तहत इस नई इकाई में निजी निवेशकों को भी हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति देने का विचार रखा गया था। फीफा का मानना था कि इससे संस्था की आय बढ़ेगी, व्यावसायिक अवसरों का विस्तार होगा और वैश्विक स्तर पर प्रतियोगिताओं के संचालन को अधिक पेशेवर बनाया जा सकेगा।

हालाँकि,यह प्रस्ताव सामने आते ही दुनिया की कई प्रमुख फुटबॉल संस्थाओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। यूरोपीय फुटबॉल महासंघ,उत्तरी और मध्य अमेरिकी तथा कैरेबियाई फुटबॉल परिसंघ,एशियाई फुटबॉल परिसंघ और कई राष्ट्रीय फुटबॉल संघों ने इस योजना पर गंभीर आपत्तियाँ जताईं। उनका कहना था कि फीफा के सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक अधिकारों को निजी निवेश से जोड़ने का निर्णय संस्था की स्वतंत्रता,पारदर्शिता और खेल की मूल भावना पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

विरोध केवल फीफा के बाहर तक सीमित नहीं रहा,बल्कि संस्था के भीतर भी कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताई। लगातार बढ़ते दबाव और आलोचनाओं के बाद जियानी इन्फेंटिनो को अंततः इस योजना को वापस लेना पड़ा। इसके बाद उन्होंने मोरक्को के रबात शहर में वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया, ताकि पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा सके और आगे की रणनीति तय की जा सके।

रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक में फीफा के शीर्ष अधिकारी मौजूदा प्रशासनिक चुनौतियों, सदस्य संघों की चिंताओं और संस्था की साख पर पड़े प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि यह बैठक आने वाले वर्षों में फीफा की नीतियों और प्रशासनिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस विवाद के बीच फीफा के वैश्विक फुटबॉल विकास प्रमुख आर्सेन वेंगर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विवादित प्रस्ताव को वापस लेने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यह निर्णय आवश्यक और पूरी तरह उचित था। वेंगर ने कहा कि फीफा को एक स्वतंत्र,पारदर्शी और विश्वसनीय संस्था के रूप में अपनी पहचान बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस रणनीतिक प्रस्ताव को तैयार करने या आगे बढ़ाने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

आर्सेन वेंगर ने अपने बयान में कहा कि खेल के विकास और प्रशासन में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार,फुटबॉल की वैश्विक संस्था को ऐसे किसी भी कदम से बचना चाहिए जिससे सदस्य संघों के बीच अविश्वास पैदा हो। उन्होंने दोहराया कि फीफा की विश्वसनीयता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और उसे हर हाल में बनाए रखना आवश्यक है।

विवाद का सबसे बड़ा कारण यह था कि प्रस्तावित व्यावसायिक इकाई फीफा के सबसे मूल्यवान अधिकारों का प्रबंधन करती। इनमें फुटबॉल विश्व कप सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के प्रसारण,प्रायोजन,विपणन और आयोजन संबंधी अधिकार शामिल थे। निजी निवेशकों को इसमें हिस्सेदारी देने के प्रस्ताव को कई फुटबॉल संगठनों ने खेल के अत्यधिक व्यावसायीकरण की दिशा में खतरनाक कदम बताया।

यूरोपीय फुटबॉल महासंघ ने इस योजना का सबसे मुखर विरोध किया। संस्था ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाता तो वह कानूनी कार्रवाई पर भी विचार करती। यूरोपीय फुटबॉल महासंघ का मानना था कि फीफा के अधिकारों का निजीकरण भविष्य में खेल प्रशासन की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकता है।

इस विवाद का असर जियानी इन्फेंटिनो की राजनीतिक स्थिति पर भी दिखाई देने लगा है। वेल्स फुटबॉल संघ ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि वह फीफा अध्यक्ष पद के लिए इन्फेंटिनो की उम्मीदवारी का समर्थन वापस ले रहा है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि किसी राष्ट्रीय फुटबॉल संघ द्वारा पहली बार सार्वजनिक रूप से मौजूदा फीफा अध्यक्ष से समर्थन वापस लिया गया है।

वेल्स फुटबॉल संघ ने स्पष्ट किया कि वह वर्ष 2027 से 2031 तक के कार्यकाल के लिए फीफा अध्यक्ष पद पर इन्फेंटिनो की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करेगा। इस निर्णय ने अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल जगत में नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अन्य सदस्य संघ भी इसी तरह का रुख अपनाते हैं,तो अगले चुनाव में इन्फेंटिनो के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

रिपोर्टों के अनुसार,इंग्लैंड फुटबॉल संघ भी इन्फेंटिनो से अपना समर्थन वापस लेने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह फीफा अध्यक्ष के लिए एक और बड़ा झटका माना जाएगा। यूरोप के कई फुटबॉल संगठनों में पहले से ही इस प्रस्ताव को लेकर असंतोष बना हुआ है और अब यह असंतोष राजनीतिक समर्थन में भी दिखाई देने लगा है।

अगले वर्ष मार्च में जियानी इन्फेंटिनो फीफा अध्यक्ष के रूप में अपने अंतिम कार्यकाल के लिए दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। फीफा के नियमों के अनुसार उन्हें जीत के लिए कुल 211 सदस्य संघों में से कम से कम 106 मतों का समर्थन हासिल करना होगा। हालाँकि,मौजूदा विवाद के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या उन्हें पहले जैसा व्यापक समर्थन मिल पाएगा।

फुटबॉल विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक व्यावसायिक प्रस्ताव तक सीमित नहीं है,बल्कि यह फीफा के भविष्य के प्रशासनिक मॉडल,पारदर्शिता और सदस्य संघों के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। कई सदस्य संघ चाहते हैं कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता अपनाए और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों से पहले सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा करे।

मोरक्को में होने वाली आपात बैठक को इसी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में लिए जाने वाले निर्णय न केवल मौजूदा विवाद को शांत करने में मदद कर सकते हैं,बल्कि यह भी तय करेंगे कि आने वाले वर्षों में फीफा किस दिशा में आगे बढ़ेगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि व्यावसायिक अधिकारों से जुड़ी योजना ने विश्व फुटबॉल प्रशासन में गंभीर बहस छेड़ दी है और इस विवाद का प्रभाव फीफा की आंतरिक राजनीति से लेकर अध्यक्ष पद के आगामी चुनाव तक दिखाई दे सकता है। आने वाले दिनों में सभी की नजरें रबात में होने वाली बैठक और उसके बाद सामने आने वाले फैसलों पर टिकी रहेंगी।