संसद में फिर गूँजे नारे,हंगामे के बीच लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित (तस्वीर क्रेडिट@rajpalsinh_bjp)

संसद में फिर गूँजे नारे,हंगामे के बीच लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित; विपक्ष ने उठाए छात्रों और राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे

नई दिल्ली,11 अगस्त (युआईटीवी)- संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को एक बार फिर गतिरोध देखने को मिला। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित की गई,जबकि राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए रोक दी गई। संसद में लगातार बने इस गतिरोध के कारण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं और महत्वपूर्ण संसदीय कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है।

मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। सदन की बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष की ओर से अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई गई। हंगामे के बीच सदन को चलाने का प्रयास किया गया,लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। लगातार नारेबाजी और शोर के कारण पीठासीन अधिकारी को सदन की कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

वहीं राज्यसभा में मंगलवार को कार्यवाही की शुरुआत अपेक्षाकृत शांत माहौल में हुई। बैठक शुरू होने के बाद कुछ समय तक सदन में सामान्य रूप से कामकाज चला। इस दौरान संसद की विभिन्न समितियों से संबंधित कई रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखे गए। कई सदस्यों ने अपनी-अपनी समितियों से जुड़ी रिपोर्ट और कागजात प्रस्तुत किए। इस दौरान सदन में कोई बड़ा व्यवधान देखने को नहीं मिला और संसदीय प्रक्रिया सामान्य रूप से आगे बढ़ती रही।

समितियों से जुड़ी रिपोर्ट और कागजात सदन में रखे जाने के बाद शून्यकाल की कार्यवाही शुरू होनी थी। इसी दौरान विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते सदन का माहौल गर्म हो गया और विपक्षी सांसद अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने लगे। विपक्ष के कई सांसद दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल का मुद्दा सदन में उठाना चाहते थे।

प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी सांसदों ने सरकार से जवाब माँगा। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की स्थिति क्यों पैदा हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है। विपक्ष इस मुद्दे पर सदन में चर्चा की माँग कर रहा है। इसी दौरान कुछ सांसदों ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में मिले चढ़ावे और उससे जुड़े प्रबंधन के मुद्दे को भी उठाने की कोशिश की।

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्षी सांसदों की नारेबाजी लगातार जारी रही। हंगामे के बीच राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी अपनी बात रखने के लिए सदन में खड़े हुए। हालाँकि,सदन में जारी शोर-शराबे के कारण वह अपनी बात पूरी तरह नहीं रख सके। लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित होती रही और स्थिति को देखते हुए राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई।

इससे पहले राज्यसभा में कुछ समय तक सामान्य कामकाज होने के बाद जिस तरह से नारेबाजी शुरू हुई,उससे साफ हो गया कि संसद में जारी राजनीतिक गतिरोध अभी समाप्त नहीं हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार मतभेद बने हुए हैं। विपक्ष जहाँ सरकार से कई मामलों में जवाब माँग रहा है,वहीं सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

संसद के दोनों सदनों में लगातार हो रहे हंगामे का असर विधायी कार्यों पर पड़ रहा है। शून्यकाल,प्रश्नकाल और विशेष उल्लेख जैसी महत्वपूर्ण संसदीय कार्यवाही प्रभावित हो रही है। सांसदों को अपने क्षेत्र और देश से जुड़े मुद्दे सदन में उठाने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा सरकार की ओर से प्रस्तावित विधायी कार्य भी निर्धारित तरीके से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

मानसून सत्र के दौरान संसद में गतिरोध की स्थिति लगातार बनी हुई है। कई मौकों पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और जवाब की माँग की है। दूसरी ओर सरकार और सत्ता पक्ष का कहना है कि संसद बहस और चर्चा के लिए है और विपक्ष को सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने मुद्दे उठाने चाहिए।

मंगलवार को भी यही स्थिति दोनों सदनों में देखने को मिली। लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही नारेबाजी शुरू हो गई,जिसके कारण कुछ ही देर में सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। राज्यसभा में शुरुआत में कामकाज सामान्य रहा,लेकिन शून्यकाल शुरू होने से पहले विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई और अंततः उसे दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

संसद में लगातार जारी इस गतिरोध ने एक बार फिर सदन के कामकाज को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने और जनहित से जुड़े मुद्दे उठाने का अधिकार है,वहीं सरकार की जिम्मेदारी सदन में जवाब देने की होती है,लेकिन जब हंगामे और नारेबाजी के कारण कार्यवाही ही आगे नहीं बढ़ पाती,तो इसका सीधा असर संसदीय कामकाज पर पड़ता है।

फिलहाल मंगलवार की सुबह दोनों सदनों में हंगामे के कारण कामकाज बाधित रहा। विपक्ष की ओर से छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावे जैसे मुद्दे उठाए गए, जबकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव का असर सदन की कार्यवाही पर दिखाई दिया। अब नजर इस बात पर है कि आगे की कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या मानसून सत्र में संसद का गतिरोध इसी तरह जारी रहता है।