प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तस्वीर क्रेडिट@CjpIndia0)

पीएम मोदी ने युवाओं को दी ‘शॉर्टकट’ से बचने की सलाह,बोले- आत्मकथा पढ़कर संघर्षों से सीखें

नई दिल्ली,12 अगस्त (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की युवा पीढ़ी से जीवन में सफलता हासिल करने के लिए शॉर्टकट के रास्ते से बचने और संघर्षों से सीख लेने का आग्रह किया है। बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया और रील्स के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए युवाओं को आत्मकथाएँ पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज का दौर रील और सोशल मीडिया का है,जहाँ इंफ्लूएंसर लोगों को एक विषय से दूसरे विषय की ओर तेजी से ले जाते हैं। ऐसे समय में युवाओं के लिए गंभीर साहित्य और महान व्यक्तित्वों के जीवन अनुभवों को पढ़ना बेहद जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के सामने सूचनाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सूचनाओं के बीच सही दिशा चुनना एक बड़ी चुनौती बन गया है। सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड की सामग्री लोगों का ध्यान आकर्षित करती है और युवा तेजी से एक वीडियो से दूसरे वीडियो की ओर बढ़ते रहते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में शॉर्टकट की प्रवृत्ति से बचने की बात कही। प्रधानमंत्री ने रेलवे स्टेशनों का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ लोगों को प्लेटफॉर्म बदलने या दूसरी जगह जाने के लिए पुल का इस्तेमाल करने के बजाय पटरियों को पार करने की आदत होती है। वहाँ अक्सर लिखा होता है कि ‘शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट’। उन्होंने कहा कि जीवन में भी शॉर्टकट कई बार व्यक्ति की यात्रा को छोटा कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि यदि वे शॉर्टकट के रास्ते से बाहर निकलना चाहते हैं तो उन्हें अपने पसंदीदा व्यक्तित्वों की आत्मकथाएँ पढ़नी चाहिए। उनके अनुसार, आत्मकथाएँ केवल किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी का विवरण नहीं होतीं,बल्कि वे उस दौर के सामाजिक,राजनीतिक और ऐतिहासिक घटनाक्रम को समझने का अवसर भी देती हैं। आत्मकथा में घटनाओं को उस व्यक्ति के अनुभव और दृष्टिकोण से समझा जा सकता है,जो उस समय उन घटनाओं का प्रत्यक्ष हिस्सा रहा हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मकथा पढ़ने से इतिहास को एक अलग नजरिए से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी कालखंड को केवल किताबों में दर्ज तथ्यों के माध्यम से समझने के बजाय उस समय के किसी प्रमुख व्यक्ति के अनुभवों को पढ़ना अधिक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान कर सकता है। उनके मुताबिक आत्मकथा इतिहास के काफी करीब होती है और इससे उस दौर की परिस्थितियों,संघर्षों और निर्णयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ अपने लंबे जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उन्हें रामनाथ कोविंद को लंबे समय से जानने और उनके साथ करीब से काम करने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के रूप में कोविंद के कार्यकाल के दौरान मिले मार्गदर्शन और उनके स्नेह को अपनी बड़ी पूँजी बताया। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद का उनके प्रति विशेष स्नेह और आत्मीयता हमेशा उनके लिए महत्वपूर्ण रही है।

प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा और उनके सार्वजनिक जीवन में योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि कोविंद ने समाज और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका जीवन संघर्ष,अनुशासन,संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। प्रधानमंत्री के अनुसार,रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक अनमोल धरोहर साबित होगी।

उन्होंने देशवासियों,खासकर नई पीढ़ी से अपील की कि वे रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा को उन्हीं के शब्दों में जानने का प्रयास करें। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवाओं को उनकी लेखनी और अनुभवों को पढ़ना चाहिए,क्योंकि इससे उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए कई महत्वपूर्ण सीख मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि किसी सफल व्यक्ति की उपलब्धियों को देखने के साथ-साथ उसके पीछे छिपे संघर्षों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी के सामने सफलता के कई आसान रास्ते प्रस्तुत किए जाते हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर सफलता की चमक दिखाई देती है,लेकिन उसके पीछे किए गए परिश्रम,धैर्य और लंबे संघर्ष की तस्वीर कम दिखाई देती है। ऐसे में आत्मकथाएँ युवाओं को यह समझने में मदद करती हैं कि बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करने के पीछे निरंतर प्रयास और कठिन परिस्थितियों से मुकाबला करने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की जीवन यात्रा पढ़ने से युवाओं को यह भी समझ आता है कि परिस्थितियाँ हमेशा अनुकूल नहीं होतीं। कई बार कठिनाइयाँ व्यक्ति के सामने रास्ते बंद करती हुई दिखाई देती हैं,लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से उन परिस्थितियों को बदला जा सकता है। इसी कारण उन्होंने आत्मकथाओं को केवल साहित्यिक कृति नहीं,बल्कि जीवन से सीख लेने का माध्यम बताया।

प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद को उनकी आत्मकथा के लिए बधाई देते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी को उनकी जीवन यात्रा से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक लोकतंत्र,समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को समझने में भी पाठकों की मदद करेगी।

रामनाथ कोविंद का सार्वजनिक जीवन लंबे समय तक संवैधानिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य करने के बाद उन्होंने भारत के राष्ट्रपति का पद सँभाला। राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल देश के संवैधानिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। प्रधानमंत्री ने उनके अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचने को महत्वपूर्ण बताया।

विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की अपील का व्यापक संदेश यही रहा कि युवाओं को तत्काल सफलता की चाह में मेहनत और सीखने की प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने रील और शॉर्टकट के दौर में किताबों,विशेष रूप से आत्मकथाओं की उपयोगिता को रेखांकित किया। उनके मुताबिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए केवल दूसरों की सफलता देखना पर्याप्त नहीं है,बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि उस सफलता तक पहुंचने के लिए किन परिस्थितियों,चुनौतियों और संघर्षों से गुजरना पड़ा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह किसी राष्ट्र के इतिहास को समझने के लिए उसके महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का अध्ययन जरूरी है,उसी तरह किसी महान व्यक्ति के जीवन को समझने के लिए उसकी अपनी लिखी या उसके अनुभवों पर आधारित आत्मकथा पढ़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं को ऐसे साहित्य से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे उन्हें जीवन के प्रति व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद को आत्मकथा के प्रकाशन पर शुभकामनाएँ दीं और देश की जनता से उनकी जीवन यात्रा को पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि कोविंद की लेखनी और अनुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में युवाओं को केवल त्वरित मनोरंजन और आसान रास्तों तक सीमित नहीं रहना चाहिए,बल्कि किताबों और संघर्ष की वास्तविक कहानियों से जुड़कर अपने जीवन की दिशा तय करनी चाहिए।