जेपी नड्डा

राज्यसभा में ‘लुंगीवाला’ टिप्पणी पर हंगामा,जॉन ब्रिटास ने जताई आपत्ति; नड्डा बोले- हर राज्य की वेशभूषा का सम्मान जरूरी

नई दिल्ली,12 अगस्त (युआईटीवी)- राज्यसभा में बुधवार को एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सदन में एक महिला सांसद ने उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहकर संबोधित किया। ब्रिटास ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सदन की गरिमा और देश के अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ दिया। मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया,जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच इस मुद्दे पर तीखी नोकझोंक और नारेबाजी शुरू हो गई।

जॉन ब्रिटास ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी सदस्य की क्षेत्रीय पहचान, पहनावे या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को लेकर इस तरह की टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कथित टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए सदन के सभापति के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनके आरोप के बाद विपक्षी सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई और संबंधित टिप्पणी को लेकर कार्रवाई की माँग की।

मामले पर राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि देश के हर राज्य की वेशभूषा और संस्कृति का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य की पारंपरिक पोशाक का अपमान स्वीकार्य नहीं है। नड्डा ने कहा कि भारतीय समाज की विविधता उसकी ताकत है और अलग-अलग राज्यों की वेशभूषा का अपना महत्व है। उन्होंने कहा कि सरकार और सत्ता पक्ष ऐसी किसी टिप्पणी का समर्थन नहीं करते हैं, जो किसी क्षेत्र,समुदाय या राज्य की पहचान को लेकर अपमानजनक हो।

हालाँकि,जेपी नड्डा ने यह भी कहा कि पूरे मामले को निष्पक्ष तरीके से देखा जाना चाहिए और जिस महिला सांसद पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया है,उनका पक्ष भी सदन में सुना जाना चाहिए। उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि भाजपा की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। नड्डा ने कहा कि केवल एक पक्ष की शिकायत सुनकर मामले का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने सभापति से सुष्मिता देव को बोलने की अनुमति देने का अनुरोध किया।

सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के राष्ट्र की एकता के पक्ष में है। रिजिजू ने कहा कि सदन में एक सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य पर आरोप लगाए जाने के बाद विरोध की स्थिति बनी है, इसलिए जिस सदस्य पर आरोप लगाया गया है, उसका पक्ष भी सुना जाना जरूरी है।

रिजिजू ने कहा कि लोकतांत्रिक सदन में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का समान अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दूसरे पक्ष की बात भी सदन के रिकॉर्ड में आनी चाहिए। उनके मुताबिक,केवल एक सदस्य की शिकायत के आधार पर दूसरे सदस्य को अपनी बात रखने से रोकना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सदन में सभी सदस्य समान हैं और सभी भारतीय हैं। इसलिए किसी भी विवाद को निष्पक्ष तरीके से सुना जाना चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी कहा कि कुछ अन्य महिला सांसद इस मामले में अपनी बात रखना चाहती हैं। उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि इन सांसदों के बयान को भी सदन के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। उनका कहना था कि यदि किसी टिप्पणी को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है,तो सभी संबंधित सदस्यों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलना चाहिए।

रिजिजू ने कहा कि राष्ट्र की एकता के लिए यह आवश्यक है कि किसी भी प्रकार के भेदभाव को बढ़ावा न दिया जाए। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं,संस्कृतियों, परंपराओं और पहनावों वाला देश है और यही विविधता देश की पहचान है। सदन में बैठे सभी सदस्य अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं,इसलिए एक-दूसरे की क्षेत्रीय और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने जॉन ब्रिटास की आपत्ति का जवाब देते हुए कहा कि सदन में हर सदस्य बराबर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी सदस्य भारतीय हैं और किसी को भी दूसरे सदस्य की तुलना में कमतर नहीं समझा जा सकता। रिजिजू ने कहा कि संसद में मतभेद हो सकते हैं, राजनीतिक बहस हो सकती है और एक-दूसरे के विचारों का विरोध भी किया जा सकता है,लेकिन व्यक्तिगत या क्षेत्रीय पहचान को लेकर ऐसी टिप्पणी नहीं होनी चाहिए,जो सदन की गरिमा के अनुरूप न हो।

संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि यदि वास्तव में कोई ऐसी टिप्पणी की गई है, जो आपत्तिजनक है या सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है,तो संबंधित सदस्य को उनके कक्ष में बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली जा सकती है। इससे घटना के वास्तविक तथ्यों को समझने और उचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

इस दौरान राज्यसभा में लगातार हंगामा और नारेबाजी होती रही। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपनी-अपनी बात पर कायम रहे। विपक्ष की ओर से कथित टिप्पणी को लेकर आपत्ति जताई गई,जबकि सत्ता पक्ष ने पूरे मामले में दूसरे पक्ष को भी सुनने की माँग की। सदन में बढ़ते शोर के कारण कार्यवाही सामान्य तरीके से आगे नहीं बढ़ सकी।

मामले ने सदन में क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक सम्मान को लेकर एक व्यापक बहस का रूप भी ले लिया। भारत में अलग-अलग राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा उनकी संस्कृति और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दक्षिण भारत में लुंगी सहित विभिन्न पारंपरिक परिधानों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है। ऐसे में किसी व्यक्ति को उसके पहनावे के आधार पर संबोधित करना या टिप्पणी करना राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील विषय बन सकता है।

राज्यसभा में विवाद के बीच दोनों पक्षों की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। जहाँ विपक्ष ने कथित टिप्पणी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई,वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनना जरूरी है।

लगातार हंगामे और नारेबाजी के बीच राज्यसभा के सभापति ने सदन की कार्यवाही को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस तरह ‘लुंगीवाला’ टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद बुधवार की कार्यवाही पर भारी पड़ा। अब पूरे मामले में संबंधित सदस्यों का पक्ष सुने जाने और कथित टिप्पणी के वास्तविक संदर्भ की जाँच के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला होने की संभावना है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सदस्यों की क्षेत्रीय,सांस्कृतिक और व्यक्तिगत गरिमा का सम्मान किस तरह सुनिश्चित किया जाए।