यूक्रेन ने रूस के काला सागर ठिकाने पर बोला धावा (तस्वीर क्रेडिट@CDM_PRESS)

नोवोरोसिस्क नौसैनिक अड्डे पर यूक्रेन का बड़ा हमला,जेलेंस्की ने बताया ‘सफल अभियान’; कई रूसी युद्धपोतों को निशाना बनाने का दावा

नई द‍िल्‍ली,13 अगस्त (युआईटीवी)- यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के काला सागर स्थित प्रमुख बंदरगाह शहर नोवोरोसिस्क के खिलाफ किए गए सैन्य अभियान को सफल बताया है। जेलेंस्की के मुताबिक,इस अभियान में यूक्रेन ने पहली बार एक ही ऑपरेशन के दौरान लंबी दूरी के हथियारों,विभिन्न प्रकार के ड्रोन और मानवरहित समुद्री नौकाओं का संयुक्त इस्तेमाल किया। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने दावा किया कि हमले में नोवोरोसिस्क की खाड़ी में मौजूद रूसी नौसेना के कई महत्वपूर्ण जहाजों को निशाना बनाया गया। हालाँकि,रूसी पक्ष की ओर से इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अभियान के नतीजों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यूक्रेन की रक्षा सेनाओं ने मंगलवार रात नोवोरोसिस्क में स्थित रूसी नौसैनिक अड्डे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। उनके अनुसार,यह काला सागर में रूसी नौसेना के बचे हुए प्रमुख ठिकानों में से एक है। यह क्षेत्र यूक्रेन के मोर्चे से 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है। यूक्रेन ने पिछले कुछ समय में रूस के भीतर और काला सागर क्षेत्र में दूर स्थित सैन्य ठिकानों पर अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता का इस्तेमाल बढ़ाया है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें नोवोरोसिस्क के खिलाफ किए गए अभियान के परिणामों की रिपोर्ट दी गई है और इस ऑपरेशन में यूक्रेन की लंबी दूरी की क्षमताओं तथा विभिन्न हथियार प्रणालियों का संयुक्त इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे यूक्रेनी रक्षा बलों की क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाला सफल अभियान बताया। जेलेंस्की ने इस कार्रवाई के लिए यूक्रेनी सैनिकों की सटीकता की सराहना की और उन विशेषज्ञों तथा निर्माताओं को धन्यवाद दिया,जो देश के लिए नए हथियार और सैन्य तकनीक विकसित कर रहे हैं।

जेलेंस्की के अनुसार,इस अभियान की एक खास बात यह रही कि पहली बार एक ही ऑपरेशन में कई अलग-अलग यूक्रेनी हथियार प्रणालियों को एक साथ इस्तेमाल किया गया। उन्होंने ‘पालियानित्सिया’, ‘पेक्लो’, ‘बार्स’ और ‘लॉन्ग नेपच्यून’ जैसी प्रणालियों का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने कई ड्रोन प्रणालियों के इस्तेमाल का भी दावा किया, जिनमें ‘मिच’, ‘फायर पॉइंट’, ‘रामजे’, ‘सिचेन’, ‘ट्रस्ट’, ‘खारियोक’, ‘बोबर’, ‘ल्युटी’ और ‘डोवबुश’ शामिल हैं।

यूक्रेन ने इस अभियान में मानवरहित समुद्री नौकाओं के इस्तेमाल का भी दावा किया है। जेलेंस्की के मुताबिक, ‘सार्गान’ और ‘मामाई’ नाम की मानवरहित समुद्री नौकाओं ने भी अभियान में हिस्सा लिया। समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन पहले भी काला सागर में रूसी नौसैनिक ठिकानों और जहाजों के खिलाफ कर चुका है। इन तकनीकों के जरिए यूक्रेन रूसी नौसेना पर ऐसे स्थानों पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है, जहाँ पारंपरिक सैन्य साधनों से पहुँचना अधिक कठिन हो सकता है।

जेलेंस्की ने दावा किया कि हमले का एक महत्वपूर्ण परिणाम नोवोरोसिस्क की खाड़ी में मौजूद रूसी नौसेना के कई युद्धपोतों को निशाना बनाना रहा। उनके अनुसार,पुष्टि की गई जानकारी के मुताबिक रूसी नौसेना के ‘एडमिरल एसेन’ और ‘एडमिरल माकारोव’ फ्रिगेट, एक बड़ा लैंडिंग जहाज,एक कॉर्वेट और कई अन्य जहाजों को हमले का निशाना बनाया गया। हालाँकि,इन जहाजों को कितना नुकसान हुआ,क्या वे परिचालन से बाहर हुए और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है,इस बारे में यूक्रेनी दावों से आगे स्वतंत्र जानकारी सीमित है।

नोवोरोसिस्क रूस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। काला सागर के तट पर स्थित यह बंदरगाह सैन्य और आर्थिक दोनों दृष्टि से अहम माना जाता है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान काला सागर में नौसैनिक गतिविधियों का महत्व काफी बढ़ गया है। यूक्रेन ने रूसी नौसेना के खिलाफ समुद्री ड्रोन,मिसाइल और अन्य लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल करते हुए उसके संचालन पर दबाव बनाने की कोशिश की है।

रूस के काला सागर बेड़े के लिए नोवोरोसिस्क का महत्व युद्ध के दौरान और बढ़ गया है। यूक्रेन के हमलों के कारण काला सागर बेड़े के कुछ संसाधनों और जहाजों की तैनाती में बदलाव देखने को मिला है। ऐसे में नोवोरोसिस्क जैसे अपेक्षाकृत दूर स्थित ठिकाने रूसी नौसेना के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यूक्रेन की ओर से यहाँ तक पहुँचने वाले हमले यह संकेत देते हैं कि उसकी लंबी दूरी की सैन्य क्षमताओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

जेलेंस्की ने यह भी दावा किया कि अभियान केवल रूसी नौसेना के जहाजों तक सीमित नहीं था। उनके मुताबिक,रूस के ऐसे अन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया,जो युद्ध को आर्थिक रूप से समर्थन देने में भूमिका निभा रहे हैं। हालाँकि,उन्होंने इन ठिकानों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की। यूक्रेन लगातार यह तर्क देता रहा है कि रूस के सैन्य बुनियादी ढाँचे और युद्ध को समर्थन देने वाली क्षमताओं को निशाना बनाना उसके आत्मरक्षा अभियान का हिस्सा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने अपने बयान में हमलों को रूस द्वारा शुरू किए गए युद्ध के जवाब के रूप में उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि युद्ध को समाप्त करने की जिम्मेदारी रूस की है। जेलेंस्की के मुताबिक,रूस ही वह देश है जो इस युद्ध को समाप्त कर सकता है और उसे ऐसा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन अपनी लंबी दूरी और मध्यम दूरी की सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल जारी रखेगा,ताकि रूस पर शांति की राह अपनाने के लिए दबाव बनाया जा सके।

जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय आया है,जब रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष लगातार लंबा खिंच रहा है और दोनों पक्ष एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। यूक्रेन ने हाल के महीनों में रूस के भीतर स्थित सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों के लिए ड्रोन तथा लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल बढ़ाया है। दूसरी ओर रूस भी यूक्रेन के शहरों,ऊर्जा ढाँचे और सैन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले करता रहा है।

नोवोरोसिस्क अभियान में अलग-अलग हथियार प्रणालियों के संयुक्त इस्तेमाल का दावा यूक्रेन की सैन्य रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर भी इशारा करता है। यूक्रेन लंबे समय से ऐसी क्षमताएँ विकसित करने पर जोर दे रहा है,जिनके जरिए वह रूस के पीछे स्थित रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सके। लंबी दूरी की मिसाइलों,ड्रोन और समुद्री ड्रोन को एक ही अभियान में जोड़ने से किसी लक्ष्य पर एक साथ कई दिशाओं से हमला करने की क्षमता बढ़ सकती है।

जेलेंस्की ने अपने बयान में हथियारों के विकास और निर्माण में शामिल यूक्रेनी विशेषज्ञों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन विशेषज्ञों और निर्माताओं की वजह से यूक्रेन की सैन्य क्षमताएँ मजबूत हुई हैं। रूस के साथ जारी युद्ध के दौरान यूक्रेन ने घरेलू स्तर पर ड्रोन और अन्य हथियारों के निर्माण को बढ़ावा दिया है। समुद्री ड्रोन विशेष रूप से यूक्रेनी सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन की लंबी दूरी की क्षमताओं का इस्तेमाल आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि रूस को शांति की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए सैन्य दबाव बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन अपनी रक्षा क्षमता को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और रूस के सैन्य ढाँचे को निशाना बनाने की रणनीति आगे भी जारी रह सकती है।

नोवोरोसिस्क हमले के बाद जेलेंस्की ने यूक्रेन के रक्षा नेतृत्व के साथ एक बैठक भी की। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्री,सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ,मानव रहित प्रणाली बलों के कमांडर और यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में निकट भविष्य की प्राथमिकताएँ तय की गईं। इससे संकेत मिलता है कि यूक्रेन आने वाले दिनों में ड्रोन और लंबी दूरी के हमलों को अपनी सैन्य रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान देना जारी रख सकता है।

हालाँकि,इस अभियान से जुड़े दावों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। युद्ध के दौरान रूस और यूक्रेन दोनों ही सैन्य अभियानों के परिणामों को अपने-अपने पक्ष में प्रस्तुत करते रहे हैं। किसी जहाज को नुकसान पहुँचने,उसके संचालन से बाहर होने या सैन्य क्षमता पर वास्तविक प्रभाव पड़ने जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि कई बार तत्काल संभव नहीं होती। इसलिए नोवोरोसिस्क में रूसी जहाजों को हुए नुकसान की वास्तविक सीमा का आकलन स्वतंत्र तस्वीरों,उपग्रह आँकड़ों और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से ही किया जा सकेगा।

फिर भी यूक्रेन द्वारा नोवोरोसिस्क जैसे दूर स्थित रूसी नौसैनिक ठिकाने को निशाना बनाने का दावा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह हमला सफल रहा या इससे रूसी नौसेना को कितना नुकसान हुआ,यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा,लेकिन अभियान ने यह जरूर दिखाया है कि यूक्रेन रूस के भीतर और काला सागर क्षेत्र में अपनी लंबी दूरी की सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

जेलेंस्की ने इस अभियान को यूक्रेन की सैन्य क्षमता और हथियार निर्माण क्षेत्र की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि देश अब विभिन्न प्रकार के हथियारों और मानवरहित प्रणालियों को एक साथ इस्तेमाल करने की स्थिति में पहुँच रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबे खिंचने के साथ तकनीक,ड्रोन और लंबी दूरी के हथियारों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में नोवोरोसिस्क पर हुआ कथित हमला आने वाले समय में काला सागर और दोनों देशों की सैन्य रणनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है।