अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (तस्वीर क्रेडिट@rashtra_press)

अमेरिका में ‘बर्थ टूरिज्म’ पर ट्रंप प्रशासन का शिकंजा,600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द

वॉशिंगटन,13 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ‘बर्थ टूरिज्म’ के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को बताया कि इस अभियान के तहत अब तक दुनिया भर के 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द किए जा चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों के बारे में ऐसे संकेत मिले थे कि उन्होंने अमेरिका की यात्रा का इस्तेमाल वहाँ बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से किया या वीजा नियमों का गलत इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई के लिए अमेरिकी विदेश विभाग ने एक विशेष कार्यबल भी बनाया है,जो ऐसे मामलों की पहचान करने के साथ-साथ इस गतिविधि को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क का पता लगाने में जुटा है।

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक,‘बर्थ टूरिज्म प्रिवेंशन टास्क फोर्स’ नाम की विशेष टीम दुनिया भर के वीजा धारकों की यात्रा और गतिविधियों की समीक्षा कर रही है। यह टीम केवल वीजा आवेदन में दी गई जानकारी तक सीमित नहीं है,बल्कि अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के पास मौजूद सूचनाओं का भी विश्लेषण करती है। इसका उद्देश्य उन मामलों की पहचान करना है,जहाँ गैर-प्रवासी वीजा पर अमेरिका पहुँचने वाले विदेशी नागरिकों ने यात्रा के वास्तविक उद्देश्य को छिपाया या अमेरिका में बच्चे को जन्म देने की योजना बनाई।

विदेश विभाग ने एक तथ्य पत्र में कहा है कि इस विशेष कार्यबल ने ‘बर्थ टूरिज्म’ के जरिए अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था के दुरुपयोग से देश की सुरक्षा को होने वाले खतरे को देखते हुए दुनिया भर के विदेशी नागरिकों के 600 से अधिक वीजा रद्द किए हैं। विभाग का कहना है कि आम तौर पर किसी व्यक्ति का वीजा तब रद्द किया जाता है,जब उसके वीजा के लिए अयोग्य होने या वीजा शर्तों के उल्लंघन के संकेत सामने आते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के पास वीजा रद्द करने का व्यापक अधिकार है और इसी अधिकार के तहत इस अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से छह अगस्त को जारी किए गए कार्यकारी आदेश के बाद तेज हुई है। इस आदेश में ‘बर्थ टूरिज्म’ को उस स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है,जिसमें कोई विदेशी नागरिक गैर-प्रवासी वीजा पर मुख्य रूप से अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के उद्देश्य से प्रवेश करता है। आदेश में उन गतिविधियों को भी इसके दायरे में रखा गया है,जिनका उद्देश्य इस तरह की यात्राओं को सुविधाजनक बनाना या व्यवस्थित करना है।

कार्यकारी आदेश के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री और होमलैंड सिक्योरिटी मंत्री को ऐसे मामलों में व्यापक कार्रवाई की शक्तियां दी गई हैं। इन शक्तियों के तहत संबंधित अधिकारियों को ऐसे लोगों के अमेरिका में प्रवेश को रोकने,वीजा जारी करने से इनकार करने या पहले से जारी वीजा को रद्द करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को अमेरिका से बाहर भेजने और ‘बर्थ टूरिज्म’ की गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले लोगों पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। हालाँकि,मानवीय परिस्थितियों या राष्ट्रीय हित से जुड़े विशेष मामलों में छूट का प्रावधान रखा गया है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ‘बर्थ टूरिज्म’ केवल व्यक्तिगत स्तर पर होने वाली गतिविधि नहीं रह गई है,बल्कि कुछ लोगों ने इसे एक संगठित और लाभदायक कारोबार में बदल दिया है। विदेश विभाग के मुताबिक कुछ संचालक खुद को डूला,दाई या वेलनेस सलाहकार के रूप में पेश करते हैं और विदेशी ग्राहकों को अमेरिका में प्रसव से जुड़ी सेवाओं का पैकेज उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। इन सेवाओं में यात्रा की योजना बनाने से लेकर वीजा संबंधी सलाह,रहने की व्यवस्था और अस्पताल से जुड़े इंतजाम तक शामिल हो सकते हैं।

अधिकारियों का आरोप है कि कुछ ऐसे नेटवर्क अपने ग्राहकों को अमेरिकी अधिकारियों से यात्रा का वास्तविक उद्देश्य छिपाने के तरीके भी बताते हैं। कुछ मामलों में मेडिकल दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर या फर्जीवाड़ा करने और अस्पताल के खर्च का भुगतान नहीं करने के तरीकों की जानकारी देने के आरोप भी सामने आए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि इस तरह की गतिविधियाँ न केवल वीजा नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि अमेरिका की आव्रजन और स्वास्थ्य व्यवस्था के दुरुपयोग से भी जुड़ी हैं।

विदेश विभाग के मुताबिक,इंटरनेट पर चलने वाले कुछ विज्ञापनों में विदेशी ग्राहकों को अमेरिका में बच्चे के जन्म के बाद कथित रूप से ‘अपने आप अमेरिकी नागरिकता’ मिलने और ‘सीमाओं से मुक्त भविष्य’ जैसे आकर्षक वादे किए जाते हैं। ऐसे प्रचार के जरिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रशासन अब ऐसे विज्ञापनों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर भी नजर रख रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान सामने आए कई मामलों का उदाहरण भी दिया है। इनमें से एक मामले में एक दंपति ने अमेरिका जाने के वास्तविक उद्देश्य को छिपाने की कोशिश की। उन्होंने अमेरिका में बच्चे को जन्म देने की योजना बनाई थी,लेकिन अपने वीजा आवेदन में यात्रा के लिए कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने और खरीदारी करने का कारण बताया। अधिकारियों के अनुसार,दंपति ने दो अलग-अलग वीजा आवेदनों में अपने वास्तविक उद्देश्य के बारे में गलत जानकारी दी। दूसरे आवेदन के दौरान उन्होंने अपने एक बच्चे की जानकारी भी छिपाई। मामले की जाँच के बाद दोनों के वीजा रद्द कर दिए गए।

एक अन्य मामले में एक यात्री ने अमेरिकी अधिकारियों को बताया था कि वह ऑरलैंडो में छुट्टियां मनाने के लिए अमेरिका जा रही है। हालाँकि,उसके यात्रा कार्यक्रम और वास्तविक गतिविधियों में अंतर पाया गया। वह ऑरलैंडो जाने के बजाय लॉस एंजिलिस पहुँची और अमेरिका पहुँचने के महज पाँच दिन बाद उसने बच्चे को जन्म दिया। अधिकारियों ने मामले को ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़ा मानते हुए उसका वीजा रद्द कर दिया।

अमेरिकी प्रशासन की इस कार्रवाई का संबंध अमेरिका में जन्म से नागरिकता के लंबे समय से चले आ रहे प्रावधान से भी जुड़ा हुआ है। अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत अमेरिका में जन्मे और उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाले लोगों को अमेरिकी नागरिकता प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। यह संशोधन वर्ष 1868 में लागू हुआ था और लंबे समय से अमेरिका में जन्म से नागरिकता के संवैधानिक आधार के रूप में मौजूद है।

इसी व्यवस्था के कारण ‘बर्थ टूरिज्म’ को लेकर अमेरिका में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है। इस व्यवस्था का लाभ उठाने के उद्देश्य से किसी विदेशी नागरिक का अमेरिका में बच्चे को जन्म देना प्रशासन के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ट्रंप प्रशासन का रुख यह है कि गैर-प्रवासी वीजा का इस्तेमाल अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के विशेष उद्देश्य से नहीं किया जाना चाहिए। प्रशासन इस गतिविधि को वीजा प्रणाली के दुरुपयोग के रूप में देखता है।

हालाँकि,अमेरिका में जन्म से नागरिकता का संवैधानिक प्रावधान अपने आप में एक अलग कानूनी विषय है। ‘बर्थ टूरिज्म’ के खिलाफ प्रशासन की मौजूदा कार्रवाई मुख्य रूप से उन विदेशी नागरिकों पर केंद्रित है,जिनके बारे में अधिकारियों का मानना है कि उन्होंने गैर-प्रवासी वीजा का इस्तेमाल अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के लिए किया या अपने यात्रा उद्देश्य के बारे में गलत जानकारी दी। इसलिए वीजा नियमों के उल्लंघन और जन्म से नागरिकता के संवैधानिक प्रावधान के बीच अंतर को समझना भी महत्वपूर्ण है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वीजा आवेदन के दौरान आवेदक को यात्रा का वास्तविक उद्देश्य बताना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति पर्यटन,कारोबार,सम्मेलन या अन्य उद्देश्य का हवाला देकर वीजा हासिल करता है और बाद में अधिकारियों को पता चलता है कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में बच्चे को जन्म देना था,तो उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन अब इसी तरह के मामलों की पहचान के लिए यात्रा इतिहास और उपलब्ध सरकारी सूचनाओं का इस्तेमाल कर रहा है।

विशेष कार्यबल के गठन से इस अभियान का दायरा भी बढ़ गया है। विदेश विभाग,होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और अन्य संघीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के जरिए ऐसे मामलों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। वीजा धारकों के यात्रा इतिहास,आवेदन में दी गई जानकारी और अन्य उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के आधार पर संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। इसके बाद यदि किसी व्यक्ति को वीजा के लिए अयोग्य पाया जाता है,तो उसका वीजा रद्द किया जा सकता है।

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि केवल व्यक्तिगत यात्रियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। इसी कारण वह उन नेटवर्कों को भी निशाना बनाना चाहता है,जो विदेशों में ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़ी सेवाओं का प्रचार और संचालन करते हैं। प्रशासन के मुताबिक,ऐसे नेटवर्क लोगों को अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के संभावित फायदे बताते हैं और यात्रा, आवास,अस्पताल तथा वीजा से संबंधित सेवाओं को एक साथ उपलब्ध कराने का दावा करते हैं।

विदेश विभाग का कहना है कि इस प्रकार के संगठित नेटवर्क अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसलिए टास्क फोर्स का लक्ष्य केवल वीजा रद्द करना नहीं,बल्कि इस पूरी व्यवस्था को संचालित करने वाले लोगों और संगठनों की पहचान करना भी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई नेटवर्क लोगों को वीजा आवेदन में झूठ बोलने,मेडिकल दस्तावेजों में हेरफेर करने या अस्पताल के बिल से बचने के तरीके सिखाता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

ट्रंप प्रशासन की यह नीति व्यापक आव्रजन सख्ती के बीच सामने आई है। राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से अमेरिका की आव्रजन प्रणाली को अधिक नियंत्रित और कठोर बनाने की बात करते रहे हैं। उनकी सरकार अवैध आव्रजन के साथ-साथ वीजा प्रणाली के कथित दुरुपयोग पर भी कार्रवाई करने पर जोर दे रही है। ‘बर्थ टूरिज्म’ के खिलाफ अभियान को भी इसी व्यापक नीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

600 से ज्यादा वीजा रद्द किए जाने की कार्रवाई के बाद अब यह स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। आने वाले समय में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ सकती है,क्योंकि विशेष कार्यबल दुनिया भर से उपलब्ध सूचनाओं की समीक्षा कर रहा है। प्रशासन की नजर उन लोगों पर भी रहेगी,जो इंटरनेट और दूसरे माध्यमों से अमेरिका में प्रसव से जुड़ी सेवाओं का व्यावसायिक प्रचार करते हैं।

इस कार्रवाई से अमेरिका जाने की योजना बनाने वाले विदेशी नागरिकों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश गया है कि वीजा आवेदन में यात्रा का वास्तविक उद्देश्य बताना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी आवेदक ने गलत जानकारी देकर वीजा हासिल किया या अमेरिका पहुँचने के बाद उसके घोषित यात्रा उद्देश्य और वास्तविक गतिविधियों में गंभीर अंतर पाया गया,तो उसका वीजा रद्द किया जा सकता है और उसे अन्य आव्रजन कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

हालाँकि,इस नीति को लेकर आगे कानूनी और राजनीतिक बहस की संभावना भी बनी हुई है। अमेरिका में जन्म से नागरिकता का संवैधानिक प्रावधान और विदेशी नागरिकों के वीजा नियम दो अलग-अलग कानूनी पहलू हैं। ट्रंप प्रशासन ‘बर्थ टूरिज्म’ को रोकने के लिए वीजा और प्रवेश संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है,जबकि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चे की नागरिकता का प्रश्न संविधान के 14वें संशोधन से जुड़ा हुआ है।

फिलहाल अमेरिकी विदेश विभाग की कार्रवाई से यह साफ है कि ट्रंप प्रशासन ‘बर्थ टूरिज्म’ को सामान्य पर्यटन गतिविधि के तौर पर स्वीकार करने के मूड में नहीं है। 600 से अधिक वीजा रद्द किए जाने के साथ शुरू हुआ यह अभियान अब उन एजेंसियों और नेटवर्कों तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है,जो इस तरह की यात्राओं को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं। विशेष कार्यबल की निगरानी,वीजा रद्द करने की कार्रवाई और कार्यकारी आदेश के तहत मिली अतिरिक्त शक्तियों के चलते अमेरिका में ‘बर्थ टूरिज्म’ को लेकर आने वाले दिनों में और सख्त कदम देखने को मिल सकते हैं।