नई दिल्ली,17 अगस्त (युआईटीवी)- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के मालिक एलन मस्क ने प्लेटफॉर्म पर सरकारी सेंसरशिप और कंटेंट हटाने के अनुरोधों को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि अब सरकारों की ओर से कंटेंट हटाने,पोस्ट पर रोक लगाने या किसी खाते के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किए जाने वाले अनुरोधों को यूजर्स के लिए अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह जानकारी देना है कि किसी पोस्ट या खाते के खिलाफ कार्रवाई किस सरकारी एजेंसी के अनुरोध पर की गई और उसके पीछे क्या कारण या कानूनी आधार बताया गया है।
एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकारों द्वारा जरूरी की गई कोई भी सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। उनके इस बयान के बाद एक्स पर कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया, सरकारी हस्तक्षेप और ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। कंपनी का कहना है कि यूजर्स को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनके सामने दिखाई देने वाले कंटेंट पर किसी बाहरी सरकारी निर्देश का प्रभाव पड़ा है या नहीं।
प्रस्तावित बदलावों के तहत एक्स यूजर्स को यह देखने का अवसर मिलेगा कि किसी सरकार या सरकारी एजेंसी ने किसी पोस्ट को हटाने की माँग की है या किसी खाते पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है। प्लेटफॉर्म की योजना ऐसे मामलों में संबंधित सरकारी एजेंसी की जानकारी उपलब्ध कराने की भी है। जहाँ संभव होगा,वहाँ यह भी बताया जाएगा कि कंटेंट हटाने या खाते के खिलाफ कार्रवाई की माँग के लिए कौन-सा कानूनी आधार या कारण दिया गया था।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है,जब दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी नियमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस चल रही है। अलग-अलग देशों की सरकारें सोशल मीडिया कंपनियों से अवैध,आपत्तिजनक या कानून का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने की माँग करती रही हैं। दूसरी ओर,सोशल मीडिया कंपनियों के सामने यह चुनौती रहती है कि वे स्थानीय कानूनों का पालन करते हुए अपने प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और यूजर्स के अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें।
एलन मस्क लंबे समय से एक्स पर कंटेंट मॉडरेशन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की बात करते रहे हैं। एक्स को खरीदने से पहले यह प्लेटफॉर्म ट्विटर के नाम से जाना जाता था। कंपनी का अधिग्रहण करने के बाद मस्क ने कई बार कहा कि यूजर्स को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि प्लेटफॉर्म पर पोस्ट को किस तरह मॉडरेट किया जाता है, किस आधार पर उनकी पहुँच बढ़ाई या घटाई जाती है और किस तरह के कंटेंट को अनुशंसा प्रणाली में प्राथमिकता मिलती है।
सरकारी टेकडाउन अनुरोधों के मामले में भी एक्स की नीति को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। क्रिप्टो ब्रीफिंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक,अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधियों में मस्क के स्वामित्व वाले एक्स ने सरकारों की ओर से किए गए कंटेंट हटाने संबंधी अनुरोधों की अपील का करीब 83 प्रतिशत से 98.8 प्रतिशत तक पालन किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह अनुपालन दर प्लेटफॉर्म के पिछले प्रबंधन के दौरान दर्ज दर से अधिक रही है। हालाँकि,सरकारी अनुरोधों का पालन करने और उसके बारे में यूजर्स को जानकारी देने के बीच अंतर को लेकर भी चर्चा होती रही है।
अब एक्स की नई पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि यूजर्स को सरकारी अनुरोध और उसके परिणाम के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिल सके। इससे किसी पोस्ट की अनुपलब्धता या किसी खाते पर कार्रवाई के पीछे के कारणों को समझना आसान हो सकता है। यदि किसी पोस्ट को किसी सरकारी निर्देश के कारण हटाया गया है, तो यूजर को इस तथ्य की जानकारी मिल सकेगी। इससे प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की दृश्यता को लेकर होने वाली अटकलों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
एक्स केवल सरकारी टेकडाउन अनुरोधों तक ही अपनी पारदर्शिता सीमित नहीं रखना चाहता। कंपनी अपने अनुशंसा और कंटेंट वितरण तंत्र के बारे में भी अधिक जानकारी देने की दिशा में काम कर रही है। प्लेटफॉर्म ने अपनी अनुशंसा तकनीक के कुछ हिस्सों को खुला स्रोत बनाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को यह समझने का अवसर देना है कि प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की रैंकिंग और वितरण किस तरह होता है।
सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट की पहुँच कई अलग-अलग कारकों से प्रभावित हो सकती है। किसी पोस्ट को अधिक लोगों तक पहुँचाया जाना,उसकी पहुँच सीमित किया जाना या उसे अनुशंसा प्रणाली में कम प्राथमिकता मिलना यूजर्स के लिए अक्सर स्पष्ट नहीं होता। एक्स की नई पारदर्शिता पहल के तहत कंपनी इन प्रक्रियाओं से जुड़े कारकों के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही है।
मस्क के मुताबिक,प्लेटफॉर्म का उद्देश्य यूजर्स को यह समझने में मदद करना है कि उनकी पोस्ट की दृश्यता पर क्या असर पड़ रहा है। इसमें यह जानकारी भी शामिल हो सकती है कि कोई पोस्ट किस वजह से आगे बढ़ रही है,उसे किस कारण से कम लोगों तक पहुँचाया जा रहा है या उस पर किसी प्रकार का पहुँच प्रतिबंध लगाया गया है। इससे कंटेंट क्रिएटर्स और सामान्य यूजर्स दोनों को प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।
हालाँकि,इस पहल के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियाँ भी होंगी। सरकारों की ओर से किए गए कुछ अनुरोध संवेदनशील मामलों से जुड़े हो सकते हैं और उन्हें सार्वजनिक करना हमेशा संभव नहीं होगा। कई देशों में स्थानीय कानून कंपनियों को कुछ सूचनाएँ साझा करने से रोक सकते हैं। ऐसे में एक्स को पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ अलग-अलग देशों के कानूनों का पालन भी करना होगा।
फिर भी,एलन मस्क की घोषणा सोशल मीडिया पर सरकारी हस्तक्षेप और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। यदि एक्स इस नीति को व्यापक स्तर पर लागू करता है,तो यूजर्स को यह समझने में अधिक मदद मिल सकती है कि किसी कंटेंट पर कार्रवाई केवल प्लेटफॉर्म के अपने नियमों के कारण हुई है या किसी सरकारी एजेंसी के अनुरोध का भी उसमें योगदान रहा है। आने वाले समय में इस पहल से सोशल मीडिया पर सेंसरशिप,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और तकनीकी पारदर्शिता को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
