नई दिल्ली,8 अगस्त (युआईटीवी)- केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र यानी आई4सी की समन्वित कार्रवाई से व्हाट्सऐप अकाउंट को हैक करने वाले एक बड़े मैलवेयर अभियान के प्रभाव को रोकने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सरकार के अनुसार,इस अभियान के जरिए अब तक 10 हजार से अधिक भारतीयों को साइबर हमले का शिकार होने से बचाया गया है। साइबर अपराधियों की ओर से लोगों को सरकारी विभागों,बैंकों और नियामक संस्थाओं के नाम पर फर्जी दस्तावेज भेजकर उनके कंप्यूटर और व्हाट्सऐप अकाउंट पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी।
गृह मंत्रालय ने बताया कि इस साइबर अभियान को रोकने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की ओर से कई स्तरों पर कार्रवाई की गई। इसमें सहयोग पोर्टल के माध्यम से मैलवेयर से जुड़े कमांड एंड कंट्रोल यानी सी2 सर्वरों को जियो-ब्लॉक करना भी शामिल है। इन सर्वरों को लगातार चिह्नित कर ब्लॉक किया जा रहा है,ताकि साइबर अपराधियों को संक्रमित उपकरणों और मैलवेयर के नेटवर्क को संचालित करने में परेशानी हो और हमले का दायरा सीमित किया जा सके।
गृह मंत्रालय के अनुसार,राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर हाल के दिनों में व्हाट्सऐप अकाउंट टेकओवर यानी व्हाट्सऐप अकाउंट पर अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायतों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। जाँच और विश्लेषण में सामने आया कि साइबर अपराधी एक खास प्रकार के मैलवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मैलवेयर को ऐसे दस्तावेज के रूप में छिपाकर भेजा जाता है,जिसे देखकर आम व्यक्ति आसानी से धोखा खा सकता है।
साइबर अपराधियों की ओर से भेजी जाने वाली फाइलें देखने में सामान्य वित्तीय या सरकारी दस्तावेज जैसी दिखाई देती हैं। कई मामलों में इन फाइलों को बैंक खाते के विवरण,वित्तीय स्टेटमेंट या किसी सरकारी नियामक संस्था की ओर से भेजी गई जरूरी सूचना के रूप में पेश किया जाता है। इसके लिए साइबर अपराधी व्हाट्सऐप,एसएमएस और ई-मेल जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गृह मंत्रालय ने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर “स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट.जिप”, “आरबीआई.जिप” या “एमसीए.जिप” जैसे नामों वाली संपीड़ित जिप फाइलें भेजते हैं। कई बार इन फाइलों के नाम के साथ किसी तारीख का भी इस्तेमाल किया जाता है,ताकि फाइल अधिक आधिकारिक और विश्वसनीय लगे। फाइल के नाम और संदेश की भाषा इस तरह तैयार की जाती है कि प्राप्तकर्ता को लगे कि यह कोई महत्वपूर्ण बैंकिंग या सरकारी दस्तावेज है,जिसे तुरंत खोलना जरूरी है।
यही जल्दबाजी साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन जाती है। यदि कोई व्यक्ति बिना सत्यापन किए ऐसी संदिग्ध जिप फाइल को अपने विंडोज डेस्कटॉप या लैपटॉप पर डाउनलोड करके खोलता है,तो उसके सिस्टम में ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है। इसके बाद यह मैलवेयर डिवाइस में मौजूद गतिविधियों और सक्रिय सत्रों को निशाना बनाता है तथा पीड़ित के व्हाट्सऐप वेब सत्र को हाईजैक करने में सक्षम हो सकता है।
व्हाट्सऐप वेब सत्र पर कब्जा होने के बाद साइबर अपराधियों को पीड़ित के अकाउंट तक अनधिकृत पहुँच मिल जाती है। इसके बाद वे उसी अकाउंट का इस्तेमाल आगे अन्य लोगों को संक्रमित फाइल भेजने के लिए करते हैं। यही वजह है कि इस साइबर हमले को तेजी से फैलने वाला अभियान माना जा रहा है। एक व्यक्ति का अकाउंट संक्रमित होने के बाद उसके संपर्कों और विभिन्न समूहों में मौजूद लोगों तक वही संदिग्ध फाइल पहुँच सकती है।
इस साइबर अपराध की सबसे चिंताजनक बात यह है कि संक्रमित संदेश किसी अजनबी नंबर से आने के बजाय किसी परिचित व्यक्ति के व्हाट्सऐप अकाउंट से भी आ सकता है। ऐसे में प्राप्तकर्ता को संदेश विश्वसनीय लग सकता है और वह बिना ज्यादा संदेह किए फाइल खोल सकता है। इस तरह एक संक्रमित अकाउंट से कई अन्य अकाउंट तक मैलवेयर पहुँचने की श्रृंखला शुरू हो जाती है।
सरकार के अनुसार,कई मामलों में संक्रमित फाइल के साथ ऐसा संदेश भी भेजा जाता है, जिसमें प्राप्तकर्ता से कहा जाता है कि फाइल को कंपनी के वित्त प्रबंधक को सत्यापन के लिए भेजें और इसे कंप्यूटर पर खोलें। इस तरह के निर्देश लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए दिए जाते हैं कि फाइल किसी आधिकारिक वित्तीय प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे मैलवेयर के प्रसार की संभावना और बढ़ जाती है।
गृह मंत्रालय ने बताया कि इस तरह संक्रमण की श्रृंखला केवल व्यक्तिगत व्हाट्सऐप अकाउंट तक सीमित नहीं रहती। यदि संक्रमित व्यक्ति किसी कंपनी या संस्थान से जुड़ा है और उसी कंप्यूटर या नेटवर्क का इस्तेमाल पेशेवर काम के लिए करता है,तो साइबर अपराधी बड़े कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुँचने की कोशिश कर सकते हैं। इससे संस्थानों के डेटा,संचार व्यवस्था और डिजिटल संसाधनों के लिए गंभीर साइबर सुरक्षा खतरा पैदा हो सकता है।
सरकार ने यह भी बताया कि साइबर अपराधी केवल व्हाट्सऐप संदेशों तक सीमित नहीं हैं। कई मामलों में आयकर विभाग के नाम पर फर्जी ई-मेल भेजे जा रहे हैं। इन ई-मेल का उद्देश्य लोगों को यह विश्वास दिलाना होता है कि उनके लिए कोई आधिकारिक कर संबंधी दस्तावेज या जरूरी सूचना भेजी गई है। इसके साथ संदिग्ध फाइल संलग्न की जा सकती है, जिसे खोलते ही मैलवेयर सक्रिय होने का खतरा रहता है।
गृह मंत्रालय के मुताबिक,इस तरह की घटनाएँ दिल्ली,गुजरात,महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों में सामने आई हैं। इससे पता चलता है कि साइबर अपराधियों का अभियान किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अलग-अलग राज्यों में लोगों को समान तरीके से निशाना बनाया जा रहा है और सरकारी तथा वित्तीय संस्थाओं के नाम का इस्तेमाल करके उन्हें भरोसे में लेने की कोशिश की जा रही है।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने इससे पहले 22 जून को भी लोगों के लिए एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें सरकारी या नियामक अधिकारियों का रूप धारण कर व्हाट्सऐप अकाउंट पर कब्जा करने की कोशिश करने वाले साइबर अपराधों को लेकर लोगों को सतर्क किया गया था। सरकार की ताजा कार्रवाई से संकेत मिलता है कि इस तरह के हमलों की निगरानी लगातार की जा रही है और नए मैलवेयर सर्वरों तथा उनसे जुड़े डिजिटल ढाँचे को पहचानकर ब्लॉक किया जा रहा है।
गृह मंत्रालय ने कहा कि सहयोग पोर्टल के जरिए मैलवेयर से जुड़े सर्वरों को लगातार ब्लॉक किया जा रहा है। इस समन्वित कार्रवाई का उद्देश्य साइबर अपराधियों के बुनियादी ढाँचे को बाधित करना और संभावित पीड़ितों को संक्रमण से बचाना है। सरकार के अनुसार,अब तक 10 हजार से अधिक भारतीयों को इस साइबर अभियान से सुरक्षित किया जा चुका है।
हालाँकि,सरकार की कार्रवाई के साथ नागरिकों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को अनजान नंबर,ई-मेल या संदेश से प्राप्त जिप फाइल को बिना जाँच किए डाउनलोड या खोलने से बचना चाहिए। खासतौर पर ऐसी फाइलों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए,जिनके नाम में बैंक,भारतीय रिजर्व बैंक,कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय,आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था का उल्लेख हो।
यदि किसी व्यक्ति को बैंक,नियामक संस्था या सरकारी विभाग के नाम से कोई संदिग्ध संदेश प्राप्त होता है,तो उसे संदेश में दिए गए किसी लिंक,फाइल या संपर्क माध्यम पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित संपर्क माध्यम के जरिए सूचना की पुष्टि करना अधिक सुरक्षित तरीका है। किसी परिचित व्यक्ति के व्हाट्सऐप अकाउंट से भी यदि असामान्य फाइल या संदिग्ध संदेश प्राप्त हो,तो फाइल खोलने से पहले उस व्यक्ति से किसी दूसरे माध्यम से इसकी पुष्टि करनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार,साइबर अपराधी लोगों की जल्दबाजी,डर और आधिकारिक संस्थाओं के नाम पर भरोसा करने की प्रवृत्ति का फायदा उठाते हैं। इसलिए डिजिटल सुरक्षा में सावधानी सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। केवल मजबूत पासवर्ड रखना ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि संदिग्ध फाइलों से दूरी बनाए रखना और अपने डिजिटल अकाउंट की गतिविधियों पर नजर रखना भी जरूरी है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध गतिविधि का सामना होने पर तुरंत इसकी सूचना दें। साइबर अपराध की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल
व्हाट्सऐप अकाउंट को निशाना बनाने वाला यह अभियान डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर खतरों की गंभीर तस्वीर सामने रखता है। एक साधारण दिखने वाली जिप फाइल के जरिए कंप्यूटर को संक्रमित कर व्हाट्सऐप वेब सत्र पर कब्जा किया जा सकता है और फिर उसी अकाउंट का इस्तेमाल दूसरे लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध फाइल को खोलने से पहले उसकी सत्यता जाँचना बेहद जरूरी है।
केंद्र सरकार और आई4सी की कार्रवाई से 10 हजार से अधिक लोगों को संभावित नुकसान से बचाया गया है,लेकिन साइबर अपराधियों की रणनीतियाँ लगातार बदल रही हैं। ऐसे में सरकारी एजेंसियों की निगरानी और तकनीकी कार्रवाई के साथ नागरिकों की डिजिटल जागरूकता भी इस तरह के अभियानों को रोकने में अहम भूमिका निभाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संदिग्ध फाइलों और संदेशों को लेकर सतर्क रहना ही इस तरह के मैलवेयर हमलों से बचाव का सबसे प्रभावी शुरुआती कदम है।
