वॉशिंगटन, 17 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने पेंटागन प्रमुख को दोनों देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को काफी हद तक कम करने का निर्देश दिया है। उन्होंने इन सैन्य अभ्यासों को महंगा बताते हुए कहा कि इनसे उत्तर कोरिया को अनुचित और शत्रुतापूर्ण संकेत जाता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया इस सप्ताह अपने वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत करने वाले हैं।
उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। प्योंगयांग इन अभ्यासों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा और युद्ध की तैयारी के तौर पर देखता है। ऐसे में ट्रंप की ओर से अभ्यासों को कम करने का निर्देश दिए जाने को उत्तर कोरिया के साथ तनाव कम करने की उनकी नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रंप ने अपने बयान में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे संबंधों का भी उल्लेख किया।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा कि किम जोंग उन के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध हैं और इसी वजह से वह इस बात से खुश नहीं हैं कि अमेरिका ने काफी पहले दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भाग लेने पर सहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि इन अभ्यासों का खर्च काफी अधिक है और इसका बड़ा हिस्सा अमेरिका को वहन करना पड़ता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि ये सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया के लिए पूरी तरह अनुचित और शत्रुतापूर्ण संकेत भी देते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान उत्तर कोरिया ने कभी अमेरिका के लिए कोई खतरा पैदा नहीं किया और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया गया। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर असहमति जताई।
ट्रंप ने कहा कि मौजूदा अभ्यासों को पूरी तरह रद्द करने में अब काफी देर हो चुकी है। इसलिए उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को निर्देश दिया है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को काफी कम किया जाए। ट्रंप के इस निर्देश से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका भविष्य में इन अभ्यासों के आकार और गतिविधियों को सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास 17 से 27 अगस्त तक आयोजित किया जाना है। इसमें दक्षिण कोरिया के करीब 18,000 सैनिकों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच यह अभ्यास लंबे समय से चली आ रही सैन्य तैयारी और समन्वय का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करना है।
इस बार के अभ्यास में बदलते सुरक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए कई नए प्रकार के अभियानों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। अधिकारियों ने पिछले सप्ताह बताया था कि अभ्यास के दौरान उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य क्षमताओं से निपटने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें ड्रोन के खतरों से मुकाबला करने,जीपीएस संकेतों में रुकावट से निपटने और साइबर हमलों का सामना करने जैसे अभियानों का अभ्यास किया जा सकता है।
उत्तर कोरिया ने अतीत में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर कई बार कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्योंगयांग का आरोप रहा है कि इन अभ्यासों का उद्देश्य उत्तर कोरिया पर सैन्य दबाव बढ़ाना है। दूसरी ओर,अमेरिका और दक्षिण कोरिया इन अभ्यासों को रक्षात्मक प्रकृति का बताते रहे हैं। दोनों देशों का कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और किसी भी संभावित हमले की स्थिति में बेहतर समन्वय के लिए ऐसे अभ्यास आवश्यक हैं।
ट्रंप के हालिया बयान से इस मुद्दे पर अमेरिका की नीति में संभावित बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कई बार इन अभ्यासों की लागत पर सवाल उठाए थे और उत्तर कोरिया के साथ बातचीत के दौरान सैन्य अभ्यासों को लेकर नरम रुख अपनाया था। अब उनके नए बयान से संकेत मिल रहा है कि वह एक बार फिर सैन्य अभ्यासों के आकार और लागत को कम करने की दिशा में कदम उठाना चाहते हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में दक्षिण कोरिया से जुड़े एक अन्य मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्होंने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के अमेरिकी प्रयास में शामिल होने को लेकर पूछा था। ट्रंप के अनुसार,दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और जवाब दिया, “नहीं, धन्यवाद।”
हालाँकि,ट्रंप ने ईरान से जुड़े इस मुद्दे और अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास के बीच सीधे संबंध से इनकार करते हुए कहा कि दोनों बातें सीधे तौर पर जुड़ी हुई नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने दोनों घटनाओं का उल्लेख एक ही सोशल मीडिया पोस्ट में किया,जिससे दक्षिण कोरिया के साथ अमेरिका के व्यापक रणनीतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य गठबंधन को एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के कारण दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग लंबे समय से जारी है। ऐसे में संयुक्त अभ्यासों में बड़ी कटौती का फैसला क्षेत्रीय सुरक्षा और उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिकी नीति पर असर डाल सकता है।
फिलहाल ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होने की संभावना है,क्योंकि ट्रंप ने इसे पूरी तरह रद्द करने के बजाय काफी कम करने का निर्देश देने की बात कही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी रक्षा विभाग इस निर्देश को किस तरह लागू करता है और आने वाले समय में अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का स्वरूप कितना बदलता है। ट्रंप के बयान ने एक बार फिर उत्तर कोरिया के साथ संबंधों,अमेरिकी सैन्य रणनीति और दक्षिण कोरिया की सुरक्षा भूमिका को अंतर्राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
