भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से मिली हार (तस्वीर क्रेडिट@ddnewsBihar)

भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से मिली हार,अब पाकिस्तान के खिलाफ करो या मरो का मुकाबला

एमस्टेलवीन,18 अगस्त (युआईटीवी)- एफआईएच विश्व कप 2026 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को पूल-डी के अपने दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड के हाथों 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। एम्स्टेलवीन के वैगनर हॉकी स्टेडियम में सोमवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले में भारतीय टीम ने एक समय 2-1 की बढ़त बना ली थी,लेकिन दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन गोल दागे और मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पूल-डी में लगातार दूसरी जीत दर्ज करते हुए छह अंक हासिल कर लिए और अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर ली।

भारत के लिए मुकाबले की शुरुआत अच्छी रही और टीम ने कई मौकों पर इंग्लैंड के डिफेंस पर दबाव बनाया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनाल्टी कॉर्नर को शानदार गोल में बदलकर भारत को बराबरी दिलाई,जबकि दिलप्रीत सिंह ने दूसरे क्वार्टर में एक बेहतरीन मूव को गोल में तब्दील कर भारतीय टीम को बढ़त दिलाई। हालाँकि,मैच के दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने अपनी रणनीति बदली और भारतीय डिफेंस पर लगातार दबाव बनाते हुए तीन गोल दागकर मैच का रुख पूरी तरह पलट दिया।

इस हार के बावजूद भारत पूल-डी में दो मैचों में एक जीत और एक हार के साथ तीन अंकों पर दूसरे स्थान पर है। इंग्लैंड छह अंकों के साथ शीर्ष पर है और उसने अगले दौर में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। पाकिस्तान और वेल्स के खाते में फिलहाल दो-दो मैचों के बाद एक-एक अंक है। ऐसे में भारत के लिए पूल का आखिरी मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। भारतीय टीम अब पाकिस्तान के खिलाफ उतरेगी और शीर्ष दो में बने रहने तथा सेमीफाइनल की दौड़ में आगे बढ़ने के लिए उसे इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में जीत हासिल करनी होगी।

मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने तेज गति से की। भारत ने शुरुआती मिनटों में ही आक्रामक रुख अपनाया और सातवें मिनट में उसके पास बढ़त लेने का शानदार मौका आया। जरमनप्रीत सिंह सर्कल के अंदर लगभग पाँच गज की दूरी पर मौजूद थे और उनके सामने गोल का बड़ा हिस्सा खाली था। हालाँकि,जल्दबाजी में लगाए गए शॉट का सही संपर्क नहीं हो सका और गेंद गोल से बाहर चली गई। इंग्लैंड के गोलकीपर ओलिवर पेन ने भी इस दौरान डाइव लगाकर गेंद को रोकने की कोशिश की थी।

इसके बाद इंग्लैंड ने धीरे-धीरे अपने आक्रमण को तेज किया। दसवें मिनट में रेफरल के बाद इंग्लैंड को पेनाल्टी कॉर्नर मिला। भारतीय डिफेंस के लिए यह मुश्किल स्थिति थी, लेकिन मनप्रीत सिंह ने शानदार प्रतिक्रिया दिखाते हुए स्टिक ब्लॉक के जरिए इंग्लैंड के फ्लिक को रोक दिया। इस बचाव ने भारत को शुरुआती दबाव से बाहर निकलने में मदद की।

इंग्लैंड को आखिरकार 14वें मिनट में सफलता मिली। एक शानदार एरियल पास ने भारतीय डिफेंस को चौंका दिया और भारतीय खिलाड़ी मोहित के सामने दो के मुकाबले एक की स्थिति बन गई। इस मौके का इंग्लैंड के निकोलस बांडुरक ने बेहतरीन फायदा उठाया और शानदार फिनिशिंग के साथ गेंद को गोल में पहुँचा दिया। इंग्लैंड ने 1-0 की बढ़त हासिल कर ली और भारत पर दबाव बढ़ गया।

हालाँकि,भारतीय टीम ने ज्यादा देर तक पीछे रहना स्वीकार नहीं किया। दूसरे क्वार्टर के दूसरे मिनट में भारत को पेनाल्टी कॉर्नर मिला। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने अपनी पहचान के अनुरूप बेहद सटीक और ताकतवर फ्लिक लगाई। गेंद टॉप-लेफ्ट कॉर्नर में पहुँची और इंग्लैंड के गोलकीपर के पास उसे रोकने का कोई मौका नहीं था। भारत ने मुकाबले में 1-1 से बराबरी कर ली।

बराबरी के बाद मैच और तेज हो गया। दोनों टीमों के खिलाड़ी लगातार एक-दूसरे के सर्कल में प्रवेश करने की कोशिश करते रहे। इंग्लैंड के बांडुरक ने एक बार फिर भारतीय गोल के सामने खतरा पैदा किया और करीब से गोल करने से बाल-बाल चूके। इसके बाद भारत ने अपने आक्रमण को और धार दी और 25वें मिनट में उसे इसका फायदा मिला। दिलप्रीत सिंह ने शानदार मूव को गोल में बदलकर भारत को 2-1 की बढ़त दिला दी।

पहले हाफ के समाप्त होने तक भारतीय टीम बढ़त बनाए रखने में सफल रही। आँकड़ों के लिहाज से भी भारत ने पहले दो क्वार्टर में बेहतर आक्रामक प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने गोल पर आठ शॉट लगाए,जबकि इंग्लैंड के खाते में तीन शॉट रहे। इससे साफ था कि भारत के पास मैच पर पकड़ मजबूत करने के पर्याप्त अवसर थे। हालाँकि,दो गोल की जगह केवल एक गोल की बढ़त होने के कारण इंग्लैंड को वापसी का मौका मिला हुआ था।

दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने धैर्य के साथ खेलना शुरू किया। उसने जल्दबाजी करने के बजाय गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और भारतीय डिफेंस को लगातार अलग-अलग दिशाओं से चुनौती दी। भारत की रक्षापंक्ति ने शुरुआत में इंग्लैंड के हमलों को रोकने में सफलता हासिल की,लेकिन धीरे-धीरे इंग्लैंड के दबाव का असर दिखाई देने लगा।

39वें मिनट में इंग्लैंड ने आखिरकार बराबरी हासिल कर ली। दाईं ओर से एक लंबा स्लैप-पुश भारतीय सर्कल की ओर भेजा गया। रशमेरे ने सर्कल के अंदर रिवर्स स्टिक से गेंद को हल्का सा टच दिया और गेंद भारतीय गोलकीपर मोहित के पास से निकलकर गोल में चली गई। इस गोल के साथ स्कोर 2-2 हो गया और मुकाबला एक बार फिर बराबरी पर पहुँच गया।

बराबरी के बाद इंग्लैंड का आत्मविश्वास बढ़ गया। भारतीय टीम ने फिर से बढ़त हासिल करने की कोशिश की,लेकिन इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने लगातार दबाव बनाए रखा। 43वें मिनट में इंग्लैंड ने एक और एरियल बॉल के जरिए भारत के 23 मीटर क्षेत्र में प्रवेश किया। इस हमले में रशमेरे की भूमिका फिर महत्वपूर्ण रही। इसके बाद हेनरी क्रॉफ्ट ने तेजी से हिट लगाया। भारतीय गोलकीपर मोहित गेंद की दिशा को समझने में नाकाम रहे और गेंद गोल में चली गई। क्रॉफ्ट का यह विश्व कप में पहला गोल था और इंग्लैंड ने 3-2 की बढ़त हासिल कर ली।

भारत के सामने अब मुकाबले में वापसी की चुनौती थी। अंतिम क्वार्टर में भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामकता बढ़ाई और इंग्लैंड के डिफेंस पर दबाव बनाने की कोशिश की। 47वें मिनट में जरमनप्रीत सिंह ने भारत के लिए पेनाल्टी कॉर्नर हासिल किया। भारतीय टीम के पास बराबरी करने का अच्छा मौका था,लेकिन कप्तान हरमनप्रीत सिंह की स्टिक से डिफ्लेक्शन हासिल करने की कोशिश को इंग्लैंड के सतर्क खिलाड़ी थॉमस सोर्सबी ने नाकाम कर दिया।

भारत ने इसके बाद भी हार नहीं मानी। 50वें मिनट में अभिषेक ने टोमाहॉक शॉट के जरिए गोल के करीब पहुँचने की कोशिश की,लेकिन गेंद गोल के सामने से निकल गई। इस मौके ने भारतीय टीम के लिए एक और अवसर गंवा दिया। स्कोर 2-3 होने के कारण भारत को बराबरी की तलाश थी,लेकिन इंग्लैंड का डिफेंस हर हमले के सामने मजबूती से खड़ा रहा।

मुकाबले के 55वें मिनट में इंग्लैंड ने भारत की वापसी की आखिरी उम्मीदों को भी बड़ा झटका दे दिया। गोल के सामने हुई अफरातफरी के बाद भारत के खिलाफ पेनाल्टी कॉर्नर दिया गया। निकोलस बांडुरक ने इस मौके को शानदार तरीके से भुनाया। उन्होंने भारतीय गोलकीपर सूरज करकेरा की बाईं ओर बेहद तेज और नीची फ्लिक लगाई। गेंद गोल में पहुँच गई और बांडुरक ने मुकाबले में अपना दूसरा गोल करते हुए इंग्लैंड की बढ़त 4-2 कर दी।

इसके बाद भारत के पास समय बहुत कम था। दो गोल की बढ़त के साथ इंग्लैंड ने अपने डिफेंस को मजबूत रखा और भारतीय खिलाड़ियों को गोल के करीब आने से रोक दिया। अंतिम सीटी बजते ही इंग्लैंड ने 4-2 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत के लिए यह हार इसलिए निराशाजनक रही क्योंकि टीम ने पहले हाफ में 2-1 की बढ़त हासिल की थी और उस समय मुकाबले पर उसका नियंत्रण दिखाई दे रहा था।

इंग्लैंड की जीत में निकोलस बांडुरक सबसे बड़े नायक रहे,जिन्होंने दो गोल किए। स्टुअर्ट रशमेरे और हेनरी क्रॉफ्ट ने एक-एक गोल करके टीम की वापसी को मजबूत किया। दूसरी ओर भारत की ओर से हरमनप्रीत सिंह और दिलप्रीत सिंह ने गोल किए। हरमनप्रीत का पेनाल्टी कॉर्नर से किया गया गोल एक बार फिर उनकी विशेषज्ञता का उदाहरण रहा, लेकिन दूसरे हाफ में भारत पेनाल्टी कॉर्नर और गोल करने के अन्य मौकों का पर्याप्त फायदा नहीं उठा सका।

इस हार के बाद भारतीय टीम के लिए पूल-डी का समीकरण काफी दिलचस्प हो गया है। इंग्लैंड छह अंकों के साथ शीर्ष पर है और उसने अगले दौर में जगह बना ली है। भारत तीन अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान और वेल्स के पास दो-दो मैचों में एक-एक अंक है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला अगला मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।

भारतीय टीम को शीर्ष दो में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी। यह मुकाबला केवल अंक तालिका के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं होगा,बल्कि दोनों देशों की हॉकी प्रतिद्वंद्विता के कारण भी इस पर दुनिया भर के प्रशंसकों की नजरें रहेंगी। भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार से सीख लेते हुए अपनी रक्षापंक्ति को मजबूत करे और मिले हुए पेनाल्टी कॉर्नर तथा गोल करने के मौकों को बेहतर तरीके से भुनाए।

भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में कई सकारात्मक पहलू भी दिखाए। पहले हाफ में टीम ने शानदार आक्रमण किया,गेंद को तेजी से आगे बढ़ाया और इंग्लैंड के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया,लेकिन दूसरे हाफ में इंग्लैंड के दबाव के सामने भारतीय टीम की लय टूट गई। रक्षापंक्ति और मिडफील्ड के बीच तालमेल में कमी का इंग्लैंड ने फायदा उठाया और लगातार तीन गोल दागकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

अब भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसिक रूप से मजबूत होकर अगले मुकाबले में उतरने की है। इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बावजूद भारत के पास सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने का मौका है। पाकिस्तान के खिलाफ होने वाला मुकाबला भारतीय अभियान की दिशा तय कर सकता है। कप्तान हरमनप्रीत सिंह और उनकी टीम के लिए अब किसी भी गलती की गुंजाइश बेहद कम है। विश्व कप जैसे बड़े मंच पर भारत को अपने आक्रमण की धार के साथ-साथ डिफेंस को भी मजबूत करना होगा,ताकि वह पूल-डी में शीर्ष दो में जगह बनाकर खिताब की दौड़ में आगे बढ़ सके।