नई दिल्ली,18 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने प्रतिभूति बाजार के पूरे तंत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने सोमवार को साइबर डिफेंस पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल और नए साइबर सुरक्षा पोर्टल की शुरुआत की घोषणा की। इन दोनों पहलों का उद्देश्य साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाना तथा बाजार से जुड़े विभिन्न संस्थानों के बीच साइबर खतरों और उनसे निपटने के उपायों से जुड़ी जानकारी साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करना है।
सेबी चेयरमैन ने कहा कि मौजूदा दौर में साइबर खतरे किसी एक संगठन,संस्था या नियामकीय सीमा तक सीमित नहीं रहते। डिजिटल तकनीक और आपस में जुड़े वित्तीय तंत्र के कारण किसी एक संस्थान को निशाना बनाकर किया गया साइबर हमला उसके वेंडर,तकनीकी प्लेटफॉर्म,थर्ड पार्टी सेवा प्रदाता या अन्य संबंधित संस्थानों तक पहुँच सकता है। कई मामलों में ऐसे हमलों का प्रभाव राष्ट्रीय सीमाओं के पार भी देखने को मिल सकता है। इसलिए साइबर सुरक्षा को केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी मानकर नहीं चला जा सकता,बल्कि पूरे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को इसके लिए तैयार करना जरूरी है।
तुहिन कांता पांडे ने कहा कि प्रतिभूति बाजार में साइबर रेजिलिएंस यानी साइबर हमलों का सामना करने,उनसे उबरने और अपनी सेवाओं को जल्द सामान्य स्थिति में लाने की क्षमता बढ़ाना समय की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय बाजार में शामिल संस्थानों के बीच तकनीकी और सूचनात्मक जुड़ाव जितना बढ़ रहा है,साइबर हमलों का संभावित दायरा भी उतना ही व्यापक होता जा रहा है। ऐसे में किसी एक संस्था की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना पर्याप्त नहीं है। पूरे नेटवर्क की सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है।
सेबी की पहली पहल संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल है। इस पोर्टल का उद्देश्य साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग को अधिक व्यवस्थित,समयबद्ध और उपयोगी बनाना है। इसके जरिए बाजार से जुड़े संस्थान साइबर घटनाओं के बारे में निर्धारित तरीके से जानकारी साझा कर सकेंगे। इससे नियामक को घटनाओं की प्रकृति,उनके प्रभाव और उनसे निपटने के लिए किए गए उपायों को समझने में मदद मिलेगी।
संशोधित पोर्टल को वित्तीय स्थिरता बोर्ड के घटना रिपोर्टिंग एक्सचेंज प्रारूप के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग में एकरूपता लाना है। अलग-अलग संस्थानों और क्षेत्रों में साइबर घटनाओं की जानकारी अलग-अलग प्रारूप में मिलने से उसका विश्लेषण करना और उसके आधार पर व्यापक रणनीति तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक समान रिपोर्टिंग व्यवस्था इस समस्या को कम करने में मदद करेगी।
इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू सीमा-पार साइबर घटना रिपोर्टिंग से जुड़ी चुनौतियों को कम करना भी है। आज वित्तीय बाजार कई स्तरों पर वैश्विक तकनीकी प्रणालियों और सेवा प्रदाताओं से जुड़े हुए हैं। किसी साइबर घटना का प्रभाव एक देश तक सीमित न रहकर दूसरे देशों के वित्तीय संस्थानों और डिजिटल प्रणालियों तक पहुँच सकता है। ऐसे मामलों में यदि रिपोर्टिंग के प्रारूप और प्रक्रियाओं में अधिक समानता हो तो संबंधित संस्थानों और नियामकों के बीच समन्वय बेहतर किया जा सकता है।
सेबी की दूसरी पहल नए साइबर सुरक्षा पोर्टल के रूप में सामने आई है। इसे साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए एक केंद्रीय मंच के तौर पर विकसित किया गया है। इस पोर्टल के जरिए प्रतिभूति बाजार से जुड़े हितधारक साइबर सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण सूचनाएँ एक-दूसरे के साथ साझा कर सकेंगे। इसमें साइबर कमजोरियों से संबंधित चेतावनियाँ,नीतिगत उपाय,सुरक्षा से जुड़े अनुभव और साइबर घटनाओं से मिली सीख को साझा करने की व्यवस्था होगी।
सेबी चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि ये दोनों पहल केवल तकनीकी प्लेटफॉर्म नहीं हैं। इनकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वित्तीय बाजार से जुड़े संस्थान इनका इस्तेमाल कितनी प्रभावी तरीके से करते हैं। यदि संस्थान साइबर घटनाओं की जानकारी समय पर साझा करते हैं,दूसरे संस्थानों के अनुभवों से सीखते हैं और उपलब्ध चेतावनियों के आधार पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करते हैं,तभी इन पहलों का पूरा लाभ मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में किसी एक संस्थान पर हुए हमले से मिली सीख को केवल उसी संस्था तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अगर किसी साइबर हमले के जरिए किसी नई कमजोरी का पता चलता है,तो उससे जुड़े अनुभव और उससे निपटने के उपाय दूसरे संस्थानों तक भी पहुँचने चाहिए। इससे दूसरे संस्थान पहले से अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर सकते हैं और संभावित हमले के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
इसी तरह,यदि किसी नियामक या किसी दूसरे देश ने साइबर सुरक्षा से निपटने के लिए कोई प्रभावी उपाय विकसित किया है,तो उसकी जानकारी पूरे वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए उपयोगी हो सकती है। सेबी की नई व्यवस्था इसी तरह के सहयोग और जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
वित्तीय बाजार में साइबर सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। शेयर बाजार,ब्रोकर, डिपॉजिटरी,म्यूचुअल फंड,स्टॉक एक्सचेंज,तकनीकी सेवा प्रदाता और अन्य संस्थान बड़ी मात्रा में संवेदनशील वित्तीय और व्यक्तिगत जानकारी को डिजिटल माध्यम से सँभालते हैं। ऐसे में किसी भी साइबर हमले का असर केवल किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं रह सकता। इससे निवेशकों का भरोसा,बाजार की निरंतरता और व्यापक वित्तीय स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से साइबर हमलों की समय पर पहचान और तत्काल प्रतिक्रिया के साथ-साथ घटनाओं से मिली जानकारी को साझा करना भी बेहद जरूरी है। कई बार एक संस्था पर हुए हमले के तरीके से दूसरी संस्थाओं को संभावित खतरे का संकेत मिल सकता है। अगर ऐसी जानकारी तुरंत साझा हो जाए,तो दूसरी संस्थाएँ समय रहते अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर सकती हैं।
सेबी की इन पहलों से नियामक और बाजार से जुड़े संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ने की उम्मीद है। संशोधित इंसिडेंट रिपोर्टिंग पोर्टल जहां साइबर घटनाओं की जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज और साझा करने में मदद करेगा,वहीं साइबर सुरक्षा पोर्टल व्यापक स्तर पर सुरक्षा संबंधी सूचनाओं और अनुभवों के आदान-प्रदान का माध्यम बनेगा।
तुहिन कांता पांडे के मुताबिक,साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी विभाग की जिम्मेदारी मानना पर्याप्त नहीं है। यह पूरे वित्तीय तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। तकनीकी कमजोरियों की पहचान,घटनाओं की रिपोर्टिंग,संस्थानों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान और हमलों के बाद उनसे मिली सीख को लागू करना साइबर रेजिलिएंस को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
सेबी की दोनों नई पहलों का उद्देश्य इसी सामूहिक सुरक्षा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है। आने वाले समय में जैसे-जैसे प्रतिभूति बाजार और अधिक डिजिटल तथा आपस में जुड़ा होगा,साइबर खतरों से निपटने के लिए ऐसी सहयोगात्मक व्यवस्था की भूमिका भी बढ़ेगी। इन नए पोर्टलों के प्रभावी इस्तेमाल से न केवल साइबर घटनाओं पर तेज प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है,बल्कि पूरे प्रतिभूति बाजार की डिजिटल सुरक्षा और निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत किया जा सकता है।
