एयर इंडिया

एयर इंडिया ने सभी पायलटों के स्वैच्छिक ड्रग टेस्ट को बताया नियामकीय मानकों से आगे,रिपोर्टों पर अटकलों से बचने की अपील

नई दिल्ली, 19 अगस्त (युआईटीवी)- एयर इंडिया ने मंगलवार को कहा कि उसने अपने सभी पायलटों के लिए स्वैच्छिक टेस्टिंग कार्यक्रम शुरू किया है, जो मौजूदा नियामकीय आवश्यकताओं से आगे है। एयरलाइन के मुताबिक,यह पहल यात्रियों की सुरक्षा और पेशेवर मानकों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पायलटों की जाँच की प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर अटकलें लगाने से बचना चाहिए।

एयर इंडिया की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सुरक्षा और पेशेवरिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत एयरलाइन ने नियामकीय जरूरतों से आगे बढ़ते हुए सभी पायलटों के लिए स्वैच्छिक टेस्टिंग कार्यक्रम शुरू किया है। कंपनी ने बताया कि यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और सभी संबंधित पक्षों तथा मीडिया से अपील की गई है कि वे बिना पुष्टि वाली जानकारी के आधार पर किसी तरह की रिपोर्टिंग या निष्कर्ष निकालने से बचें।

एयरलाइन ने अपने बयान में कहा कि किसी भी तरह का आकलन करने से पहले पूरी प्रक्रिया के समाप्त होने और तथ्यों की पुष्टि होने का इंतजार किया जाना चाहिए। एयर इंडिया की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब उसके पायलटों की ड्रग टेस्टिंग को लेकर कई तरह की रिपोर्ट सामने आई हैं। इन रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एयरलाइन के कुछ पायलट शुरुआती जाँच में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक,इस सप्ताह की शुरुआत में एयर इंडिया के दो और पायलट एयरलाइन की ओर से किए गए शुरुआती ड्रग टेस्ट में कथित तौर पर फेल हुए हैं। ये जांच उस व्यापक स्क्रीनिंग कार्यक्रम का हिस्सा हैं,जिसे हाल ही में फुकेत से दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की एक उड़ान से जुड़ी घटना के बाद शुरू किया गया था। हालाँकि,इन दोनों मामलों में अंतिम जाँच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम टेस्ट के नतीजों की प्रतीक्षा की जा रही है और पुष्टि होने तक दोनों पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है। एयरलाइन की ओर से फिलहाल इन मामलों को लेकर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में अंतिम रिपोर्ट आने तक शुरुआती जाँच के आधार पर किसी पायलट के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा रहा है।

टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन ने पायलटों के लिए ड्रग टेस्टिंग से संबंधित एक नई मानक संचालन प्रक्रिया के तहत यह व्यापक अभियान शुरू किया है। यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया,जिसमें फुकेत से दिल्ली आने वाली उड़ान के पायलट-इन-कमांड के विमान उतरने के बाद किए गए दो यूरिन टेस्ट के कथित तौर पर सकारात्मक आने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि जांच में मारिजुआना के सेवन के संकेत मिले थे। हालाँकि,इस संबंध में अंतिम और आधिकारिक निष्कर्ष संबंधित परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

एयर इंडिया के लिए यह जाँच अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विमानन क्षेत्र में पायलटों की फिटनेस और सतर्कता सीधे तौर पर यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। उड़ान संचालन के दौरान पायलटों को अत्यधिक एकाग्रता,त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और पेशेवर अनुशासन की आवश्यकता होती है। किसी भी ऐसे पदार्थ का सेवन,जो पायलट की निर्णय लेने की क्षमता या प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है,विमानन सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय माना जाता है।

इसी वजह से विमानन क्षेत्र में पायलटों की चिकित्सकीय फिटनेस और नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है। एयर इंडिया ने अब अपने सभी पायलटों को स्वैच्छिक टेस्टिंग कार्यक्रम के दायरे में लाकर यह संकेत दिया है कि वह केवल न्यूनतम नियामकीय आवश्यकताओं तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य सुरक्षा मानकों को और मजबूत करना है।

रिपोर्टों के अनुसार,अब तक 300 से अधिक एयर इंडिया पायलटों की इस स्क्रीनिंग प्रक्रिया के तहत जाँच की जा चुकी है। यह संख्या बताती है कि एयरलाइन ने टेस्टिंग अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया है। हालाँकि,पूरी प्रक्रिया अभी जारी है और सभी जांचों के अंतिम परिणाम सामने आना बाकी है।

ड्रग टेस्टिंग की प्रक्रिया में प्रारंभिक स्क्रीनिंग और अंतिम पुष्टि के बीच अंतर होता है। किसी शुरुआती जाँच में संदिग्ध या सकारात्मक परिणाम आने के बाद आम तौर पर पुष्टि के लिए अतिरिक्त परीक्षण किए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार,अंतिम नतीजों को संसाधित होने में सामान्य तौर पर 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है। इसलिए किसी प्रारंभिक जाँच के आधार पर तुरंत अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।

एयर इंडिया ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए मीडिया और अन्य संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। एयरलाइन का कहना है कि जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती और तथ्यों की पुष्टि नहीं हो जाती,तब तक किसी भी प्रकार की अपुष्ट सूचना को आधार बनाकर निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। कंपनी का यह रुख उन पायलटों के लिए भी महत्वपूर्ण है,जिनके शुरुआती टेस्ट के परिणामों को लेकर रिपोर्ट सामने आई हैं।

फुकेत-दिल्ली उड़ान से जुड़ी घटना के बाद एयर इंडिया की सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। एयरलाइन पहले ही यात्रियों की सुरक्षा, परिचालन मानकों और पायलटों की फिटनेस को लेकर अतिरिक्त कदम उठाने की बात कह चुकी है। सभी पायलटों की स्वैच्छिक जांच इसी व्यापक सुरक्षा दृष्टिकोण का हिस्सा बताई जा रही है।

एयर इंडिया पिछले कुछ समय से अपने परिचालन और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने पर जोर दे रही है। विमानन उद्योग में यात्रियों का भरोसा बनाए रखना किसी भी एयरलाइन के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है। ऐसे में पायलटों की जाँच को लेकर पारदर्शिता और तथ्यों की पुष्टि दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। एयरलाइन का ताजा बयान इसी दिशा में सावधानी बरतने का संकेत देता है।

फिलहाल दो पायलटों से जुड़ी शुरुआती जाँच के अंतिम परिणामों का इंतजार है। जब तक पुष्टि रिपोर्ट सामने नहीं आती,तब तक यह स्पष्ट नहीं माना जा सकता कि शुरुआती टेस्ट के परिणाम अंतिम निष्कर्ष में बदलेंगे या नहीं। एयर इंडिया ने भी इसी वजह से सभी संबंधित पक्षों से अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करने और जाँच प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने को कहा है।

कुल मिलाकर,एयर इंडिया का व्यापक स्वैच्छिक ड्रग टेस्टिंग कार्यक्रम विमानन सुरक्षा के प्रति उसके बढ़ते फोकस को दर्शाता है। 300 से अधिक पायलटों की जांच हो चुकी है और प्रक्रिया अभी जारी है। अब निगाहें अंतिम परीक्षण परिणामों पर हैं,जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई और पूरे मामले की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।