वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में शामिल होने के लिए सिंगापुर रवाना (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी को नई गति देने के लिए चौथा मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन,निर्मला सीतारमण सिंगापुर रवाना

नई दिल्ली,19 अगस्त (युआईटीवी)- भारत और सिंगापुर के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सिंगापुर के लिए रवाना हो गईं। वह सिंगापुर में आयोजित होने वाले चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।

वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि निर्मला सीतारमण भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर,वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी शामिल हैं। एक ही प्रतिनिधिमंडल में वित्त,विदेश नीति,वाणिज्य, उद्योग और प्रौद्योगिकी से जुड़े वरिष्ठ मंत्रियों की मौजूदगी इस बैठक के महत्व को दर्शाती है।

भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए एक उच्चस्तरीय और संस्थागत मंच है। इसकी शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी की नियमित समीक्षा करना,सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों में प्रगति का आकलन करना और नए क्षेत्रों की पहचान करना है। इस मंच के माध्यम से दोनों देश बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच अपनी साझेदारी को और व्यापक बनाने के उपायों पर विचार करते हैं।

चौथे सम्मेलन में छह प्रमुख क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है। इनमें उन्नत विनिर्माण,कनेक्टिविटी,डिजिटलीकरण,स्वास्थ्य एवं औषधि,कौशल विकास और सतत विकास शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारत और सिंगापुर के बीच पहले से ही सहयोग की मजबूत संभावनाएँ मौजूद हैं। बैठक के दौरान अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और यह देखा जाएगा कि दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में निवेश,तकनीकी साझेदारी और कारोबारी सहयोग को किस तरह और आगे बढ़ाया जा सकता है।

उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में भारत अपनी विनिर्माण क्षमता और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। वहीं सिंगापुर के पास उन्नत तकनीक,वित्तीय संसाधन और वैश्विक कारोबारी नेटवर्क का व्यापक अनुभव है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग से आधुनिक विनिर्माण,इलेक्ट्रॉनिक्स,सेमीकंडक्टर,औद्योगिक तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखला के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

डिजिटलीकरण भी भारत-सिंगापुर आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जबकि सिंगापुर एशिया के प्रमुख डिजिटल और वित्तीय केंद्रों में शामिल है। दोनों देशों के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय तकनीक,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। चौथे गोलमेज सम्मेलन में इन क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है।

स्वास्थ्य और औषधि का क्षेत्र भी बैठक के एजेंडे में महत्वपूर्ण रहेगा। भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं और औषधि उत्पादन के प्रमुख केंद्रों में शामिल है,जबकि सिंगापुर अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा अनुसंधान के लिए जाना जाता है। दोनों देशों के बीच अनुसंधान,औषधि निर्माण,स्वास्थ्य तकनीक और चिकित्सा नवाचार में सहयोग बढ़ाने से दोनों पक्षों को लाभ मिल सकता है।

कौशल विकास और सतत विकास भी मौजूदा वैश्विक अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण विषय हैं। भारत की बड़ी युवा आबादी के लिए आधुनिक कौशल और रोजगार के अवसर पैदा करना एक प्रमुख प्राथमिकता है। दूसरी ओर,सिंगापुर के पास कौशल प्रशिक्षण और मानव संसाधन विकास का व्यापक अनुभव है। ऐसे में दोनों देश कौशल विकास,व्यावसायिक प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा सकते हैं।

सतत विकास के क्षेत्र में भी भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं। स्वच्छ ऊर्जा,हरित प्रौद्योगिकी,टिकाऊ बुनियादी ढाँचे और पर्यावरण अनुकूल विकास के लिए निवेश आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का अहम हिस्सा बन सकता है। बैठक में इन क्षेत्रों में निजी निवेश और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने के उपायों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

भारत और सिंगापुर के संबंध केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक,राजनयिक,रक्षा,तकनीकी और सांस्कृतिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं। सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। वहीं भारत सिंगापुर को आसियान क्षेत्र के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव के एक प्रमुख केंद्र के रूप में देखता है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर निर्मला सीतारमण के सिंगापुर पहुँचने से एक दिन पहले ही वहाँ पहुँच गए थे। भारत में सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर उनका स्वागत किया और कहा कि चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन के लिए उनका आगमन दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक है। इससे बैठक की व्यापक कूटनीतिक और आर्थिक अहमियत भी स्पष्ट होती है।

भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन का पहला आयोजन वर्ष 2022 में हुआ था। इसके बाद दूसरा सम्मेलन अगस्त 2024 में सिंगापुर में आयोजित किया गया, जबकि तीसरा सम्मेलन अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुआ था। प्रत्येक बैठक में दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और मौजूदा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में चर्चा की है।

चौथे सम्मेलन से भी भारत और सिंगापुर के बीच निवेश,व्यापार,डिजिटल अर्थव्यवस्था, वित्तीय सेवाओं,तकनीकी सहयोग और बुनियादी ढाँचे में नए अवसर खुलने की उम्मीद है। वैश्विक व्यापार व्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलाव और नई तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के बीच दोनों देशों के लिए एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाना महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में यह बैठक केवल मौजूदा सहयोग की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी की नई दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।