वॉशिंगटन,20 अगस्त (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर सवाल उठाते हुए ब्याज दरों में कटौती की मांग दोहराई है। ट्रंप ने अमेरिका में मौजूदा उधारी लागत को ‘बेतुका’ बताते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए ब्याज दरें इतनी ऊँची नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और ऐसे में केंद्रीय बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने के बजाय कम करनी चाहिए। इसके साथ ही ट्रंप ने बॉन्ड बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को लेकर जताई जा रही चिंताओं को भी खारिज कर दिया और कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूती से आगे बढ़ रही है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जब भी मजबूत आर्थिक आँकड़े पेश करता है,तब ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि नीति निर्माता तेज आर्थिक वृद्धि के कारण महँगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए ब्याज दरों को ऊँचा रखते हैं। ट्रंप के अनुसार,मौजूदा परिस्थितियों में यह सोच सही नहीं है, क्योंकि अमेरिका की आर्थिक स्थिति मजबूत है और कम ब्याज दरें आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा दे सकती हैं।
ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका शानदार प्रदर्शन करता है और आर्थिक आँकड़े मजबूत आते हैं,तो ब्याज दरें बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा महँगाई को नियंत्रित करने की कोशिश के तहत किया जाता है,लेकिन उनके मुताबिक मजबूत अर्थव्यवस्था के समय दरें बढ़ाने के बजाय घटाई जानी चाहिए। राष्ट्रपति का तर्क है कि कम ब्याज दरों से कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए कर्ज लेना आसान होगा,जिससे निवेश,उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिल सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दूसरे देशों में मौजूद कम ब्याज दरों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि अमेरिका को स्विट्जरलैंड जैसे देशों की तुलना में अधिक ब्याज दरों का भुगतान क्यों करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड जैसे देशों में ब्याज दरें करीब आधा प्रतिशत हैं,जबकि अमेरिका को लगभग 3.5 प्रतिशत का भुगतान करना पड़ता है। ट्रंप ने इस अंतर को अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वास्तविक ताकत के अनुरूप नहीं माना।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कई देश अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर हैं और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका किसी देश के साथ व्यापारिक संबंध सीमित कर दे और उस देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने लगे,तो उसे अमेरिका की तुलना में बेहतर या अधिक सुरक्षित अर्थव्यवस्था मानने का कोई आधार नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक,अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ताकत को देखते हुए दूसरे देशों को अमेरिका से कम ब्याज दरों पर वित्तीय लाभ मिलना और अमेरिका का खुद अधिक लागत चुकाना उचित नहीं है।
ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष की व्यक्तिगत रूप से प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष अच्छा काम कर रहे हैं,लेकिन समस्या फेडरल रिजर्व के बोर्ड में है। राष्ट्रपति ने बोर्ड को राजनीतिक प्रभाव वाला बताते हुए उसके सदस्यों की नियुक्ति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बोर्ड में ऐसे सदस्य हैं,जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा,जो बाइडेन और उन्होंने स्वयं नियुक्त किया था।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि बोर्ड के कुछ सदस्य ब्याज दरों को बढ़ाने के पक्ष में मतदान करते हैं और उन्हें इस बात का संदेह है कि इसके पीछे केवल आर्थिक कारण हैं या राजनीतिक विचार भी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि ब्याज दरों को ऊँचा रखने का फैसला केवल नीतिगत आकलन के आधार पर लिया जाता है या इसमें अन्य कारक भी प्रभाव डालते हैं। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और मौद्रिक नीति को लेकर उनके लगातार जारी दबाव को दर्शाती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से कम ब्याज दरों के समर्थक रहे हैं। उनका मानना है कि कम दरों से सरकार की कर्ज लागत कम होगी और निजी क्षेत्र को भी सस्ती दरों पर वित्त उपलब्ध हो सकेगा। ट्रंप ने संघीय सरकार के ब्याज भुगतान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ब्याज दरों में मामूली बदलाव भी सरकारी वित्त पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने दावा किया कि ब्याज दर में प्रत्येक एक प्रतिशत की वृद्धि से अमेरिका पर करीब 600 अरब डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। ट्रंप के मुताबिक,इतनी बड़ी राशि को बचाया जा सकता है,अगर अमेरिका को दुनिया की सबसे कम ब्याज दरों पर कर्ज उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि अमेरिका को वैश्विक स्तर पर सबसे कम ब्याज दरें चुकानी चाहिए,क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और डॉलर की वैश्विक भूमिका उसे वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ देती है।
ट्रंप ने कहा कि कम ब्याज दरों का असर केवल सरकार की कर्ज लागत तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कंपनियों को नए कारखाने लगाने,उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई परियोजनाओं में निवेश करने के लिए सस्ता वित्त मिल सकता है। इसी तरह आम उपभोक्ताओं के लिए भी कर्ज की लागत कम हो सकती है। इससे आवास,वाहन, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य क्षेत्रों में माँग बढ़ने की संभावना रहती है। ट्रंप का मानना है कि ऐसी परिस्थितियाँ अमेरिकी आर्थिक वृद्धि को और मजबूत कर सकती हैं।
हालाँकि,ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का दृष्टिकोण केवल आर्थिक वृद्धि पर आधारित नहीं होता। केंद्रीय बैंक को महँगाई,रोजगार,आर्थिक गतिविधियों और वित्तीय स्थिरता जैसे कई कारकों को ध्यान में रखना पड़ता है। तेज आर्थिक वृद्धि के साथ अगर कीमतों पर दबाव बढ़ता है तो केंद्रीय बैंक महँगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को ऊँचा रख सकता है। ट्रंप का मानना है कि मौजूदा अमेरिकी आर्थिक ताकत को देखते हुए दरों में कमी की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है।
बॉन्ड बाजार में उतार-चढ़ाव को लेकर पूछे गए सवाल पर भी ट्रंप ने चिंता को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को बॉन्ड बाजार की अस्थिरता को लेकर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। राष्ट्रपति ने दावा किया कि ऊँची ब्याज दरों के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है। उनके अनुसार,मौजूदा ब्याज दरें कृत्रिम रूप से ऊँची रखी गई हैं और इन्हें बिना पर्याप्त कारण के बढ़ाया गया है।
बॉन्ड बाजार में अस्थिरता आमतौर पर निवेशकों की अपेक्षाओं,मुद्रास्फीति,सरकारी कर्ज, केंद्रीय बैंक की नीतियों और आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं से प्रभावित होती है। जब निवेशकों को लगता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं या सरकारी कर्ज बढ़ सकता है,तो बॉन्ड की कीमतों और उनकी यील्ड में बदलाव देखने को मिल सकता है। ट्रंप ने हालाँकि,इन चिंताओं को अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती के सामने ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं माना।
राष्ट्रपति ने अमेरिका में हो रहे निवेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि कारखानों,विनिर्माण इकाइयों और अन्य बड़ी परियोजनाओं में निवेश के लिए खरबों डॉलर अमेरिका की ओर आ रहे हैं। उनके मुताबिक,यह निवेश इस बात का संकेत है कि वैश्विक कंपनियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था को आकर्षक मान रही हैं। ट्रंप ने कहा कि ऊँची उधारी लागत के बावजूद अमेरिका में निवेश का प्रवाह जारी है और इससे अर्थव्यवस्था की मजबूती का पता चलता है।
ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली और सबसे आकर्षक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि दुनिया में कोई भी देश अमेरिका की बराबरी नहीं कर सकता। उनका दावा है कि औद्योगिक निवेश,विनिर्माण गतिविधियों और व्यापारिक अवसरों के कारण अमेरिका वैश्विक निवेशकों के लिए प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
ब्याज दरों पर ट्रंप और फेडरल रिजर्व के बीच मतभेद अमेरिकी आर्थिक नीति की बड़ी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। राष्ट्रपति जहाँ कम ब्याज दरों को आर्थिक वृद्धि, निवेश और सरकारी वित्त के लिए जरूरी मानते हैं,वहीं केंद्रीय बैंक को महँगाई और वित्तीय स्थिरता के जोखिमों को भी ध्यान में रखना पड़ता है। फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता अमेरिकी आर्थिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता मानी जाती है और राष्ट्रपति की ओर से केंद्रीय बैंक पर सार्वजनिक दबाव इस वजह से भी चर्चा का विषय बनता है।
ट्रंप की ताजा टिप्पणियों से साफ है कि वह आने वाले समय में भी ब्याज दरों में कटौती की माँग को प्रमुखता से उठाते रहेंगे। उनका जोर कम उधारी लागत,सरकारी ब्याज भुगतान में कमी और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर है। दूसरी ओर,फेडरल रिजर्व के लिए चुनौती यह होगी कि वह आर्थिक वृद्धि की मजबूती और महँगाई के जोखिम के बीच संतुलन कैसे बनाए।
अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक,मौजूदा आर्थिक स्थिति ब्याज दरों में कमी के पक्ष में है और ऊँची दरें अर्थव्यवस्था की क्षमता को सीमित कर सकती हैं। उन्होंने बॉन्ड बाजार को लेकर चिंता को भी खारिज करते हुए अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताया है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में महँगाई, रोजगार और आर्थिक वृद्धि के आँकड़ों का आकलन करते हुए ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है। इस फैसले का असर न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था,बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों और दुनिया भर में कर्ज की लागत पर भी पड़ सकता है।
