एलआईसी (तस्वीर क्रेडिट@np_nationpress)

एलआईसी को एचडीएफसी बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाने की आरबीआई से मिली मंजूरी,दोनों शेयरों में आया उछाल

नई दिल्ली,20 अगस्त (युआईटीवी)- देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी को निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय बैंक की इस मंजूरी के बाद एलआईसी अब एचडीएफसी बैंक की चुकता शेयर पूँजी या मतदान अधिकारों में अधिकतम 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है। इस खबर का सकारात्मक असर घरेलू शेयर बाजार में भी देखने को मिला और गुरुवार के कारोबारी सत्र में एलआईसी तथा एचडीएफसी बैंक, दोनों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।

एचडीएफसी बैंक की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक,भारतीय रिजर्व बैंक ने एलआईसी के उस आवेदन को मंजूरी दे दी है,जिसमें बैंक में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति माँगी गई थी। केंद्रीय बैंक की मंजूरी के बाद अब एलआईसी के पास एचडीएफसी बैंक में अपनी मौजूदा हिस्सेदारी को काफी बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध हो गया है। हालाँकि,इस मंजूरी का यह मतलब नहीं है कि एलआईसी तुरंत बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत कर देगी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 14 अगस्त तक एलआईसी के पास एचडीएफसी बैंक की कुल शेयर पूँजी का 4.11 प्रतिशत हिस्सा था। नई मंजूरी के बाद सरकारी बीमा कंपनी अपनी हिस्सेदारी को मौजूदा स्तर से दोगुने से भी अधिक बढ़ा सकती है। यदि एलआईसी भविष्य में मंजूर सीमा तक हिस्सेदारी खरीदती है तो एचडीएफसी बैंक में उसकी मौजूदगी और मजबूत हो जाएगी। हालाँकि,किसी भी अतिरिक्त खरीदारी के लिए नियामकीय नियमों और निर्धारित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

एचडीएफसी बैंक ने अपने नियामकीय विवरण में स्पष्ट किया है कि एलआईसी को मिली मंजूरी भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से निर्धारित शर्तों के अधीन है। इसके साथ ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी के लागू नियमों और अन्य संबंधित नियामकीय प्रावधानों का भी पालन करना होगा। इसका अर्थ है कि एलआईसी को हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बाजार में शेयरों की खरीदारी करते समय सभी संबंधित नियमों का ध्यान रखना होगा।

एलआईसी और एचडीएफसी बैंक दोनों ही भारतीय वित्तीय क्षेत्र की बेहद महत्वपूर्ण संस्थाएं हैं। एलआईसी देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शामिल है और उसके निवेश का असर शेयर बाजार में भी व्यापक रूप से देखा जाता है। दूसरी ओर,एचडीएफसी बैंक देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में से एक है। ऐसे में एलआईसी को बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिलने को वित्तीय क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

आरबीआई की मंजूरी की खबर सामने आने के बाद निवेशकों की धारणा भी सकारात्मक रही। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में एलआईसी के शेयर में मजबूत तेजी दिखाई दी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर एलआईसी का शेयर 1.7 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ करीब 420.15 रुपये के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। कारोबार के दौरान शेयर ने 421 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ। इससे निवेशकों में इस खबर को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया का संकेत मिला।

एलआईसी के शेयर का प्रदर्शन पिछले एक साल के दौरान उतार-चढ़ाव वाला रहा है। कंपनी के शेयर का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 468.48 रुपये रहा है,जबकि 52 सप्ताह का न्यूनतम स्तर 360.75 रुपये दर्ज किया गया है। गुरुवार की तेजी के बाद निवेशकों का ध्यान अब इस बात पर रहेगा कि एलआईसी भविष्य में एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी को किस स्तर तक बढ़ाती है और इस निवेश से कंपनी के पोर्टफोलियो पर क्या प्रभाव पड़ता है।

दूसरी ओर,एचडीएफसी बैंक के शेयर में भी गुरुवार को करीब एक प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। बैंक का शेयर लगभग 725.80 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबारी सत्र के दौरान शेयर ने 728.30 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ। हालाँकि, बैंक के शेयर का पिछले 52 सप्ताह का प्रदर्शन देखें तो इसमें काफी उतार-चढ़ाव रहा है। इस दौरान शेयर ने 1,020.50 रुपये का उच्चतम स्तर और 722 रुपये का न्यूनतम स्तर दर्ज किया है।

एलआईसी की एचडीएफसी बैंक में मौजूदा हिस्सेदारी पहले से ही उसे बैंक के महत्वपूर्ण संस्थागत निवेशकों में शामिल करती है। अब आरबीआई की मंजूरी मिलने के बाद निवेशकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कंपनी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के विकल्प का किस तरह इस्तेमाल कर सकती है। हालाँकि,एलआईसी की ओर से हिस्सेदारी बढ़ाने की कोई तत्काल घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल मंजूरी को संभावित निवेश विस्तार के रूप में देखा जा रहा है,न कि तत्काल हिस्सेदारी खरीद के रूप में।

संस्थागत निवेशकों की किसी बड़ी कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ना आम तौर पर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इससे संबंधित कंपनी में निवेशकों का भरोसा भी प्रदर्शित हो सकता है। एलआईसी जैसी बड़ी सरकारी बीमा कंपनी के लिए एचडीएफसी बैंक में निवेश का विस्तार उसके दीर्घकालिक निवेश पोर्टफोलियो के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं एचडीएफसी बैंक के लिए किसी बड़े संस्थागत निवेशक की हिस्सेदारी बढ़ना शेयरधारक आधार और बाजार धारणा के लिहाज से सकारात्मक माना जा सकता है।

हालाँकि,आरबीआई की मंजूरी के बावजूद एलआईसी को हिस्सेदारी खरीदने के दौरान कई नियामकीय सीमाओं का पालन करना होगा। बैंकिंग क्षेत्र में हिस्सेदारी से जुड़े नियम अन्य कंपनियों की तुलना में अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए एलआईसी यदि अतिरिक्त शेयर खरीदती है तो उसे केंद्रीय बैंक के निर्देशों, सेबी के नियमों और शेयर बाजार से संबंधित सभी प्रावधानों के अनुसार ही कदम उठाना होगा।

इस पूरे घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि एलआईसी और एचडीएफसी बैंक दोनों भारतीय वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एलआईसी के पास देशभर में बड़ी संख्या में पॉलिसीधारकों और विशाल निवेश पोर्टफोलियो का आधार है,जबकि एचडीएफसी बैंक का बैंकिंग क्षेत्र में बड़ा कारोबार और व्यापक ग्राहक आधार है। ऐसे में दोनों संस्थानों से जुड़ा कोई भी बड़ा निवेश निर्णय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बन सकता है।

गुरुवार को दोनों शेयरों में आई तेजी से शुरुआती तौर पर निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। हालाँकि,शेयरों की आगे की दिशा केवल इस मंजूरी पर निर्भर नहीं करेगी। वैश्विक बाजारों की स्थिति,घरेलू ब्याज दरें,बैंकिंग क्षेत्र की वृद्धि, एलआईसी के निवेश प्रदर्शन और कंपनियों के आगामी वित्तीय परिणाम भी इनके शेयरों को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल आरबीआई की मंजूरी के बाद एलआईसी के सामने एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का विकल्प खुल गया है। मौजूदा 4.11 प्रतिशत हिस्सेदारी से अधिकतम 9.99 प्रतिशत तक पहुँचने की अनुमति मिलने से एलआईसी को अपने निवेश को विस्तार देने की पर्याप्त गुंजाइश मिली है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी इस नियामकीय मंजूरी का इस्तेमाल किस तरह करती है और क्या वह आने वाले समय में एचडीएफसी बैंक में अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने की दिशा में कदम उठाती है।