अमरावती अस्पताल में आग से तीन नवजातों की मौत (तस्वीर क्रेडिट@KraantiKumar)

अमरावती अस्पताल में आग से तीन नवजातों की मौत,मुख्यमंत्री ने दिए उच्चस्तरीय जाँच के आदेश

मुंबई,24 अगस्त (युआईटीवी)- महाराष्ट्र के अमरावती स्थित जिला महिला अस्पताल में देर रात नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में लगी भीषण आग से तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। घटना को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गहरा दुख जताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जाँच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। हादसे में कई बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया,जबकि घायल बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी सरकार ने उठाने का निर्देश दिया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर घटना को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया। उन्होंने कहा कि अमरावती के जिला महिला अस्पताल में लगी आग में तीन बच्चों की मौत की खबर बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने मृतक नवजातों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य प्रशासन को घटना की उच्चस्तरीय जाँच के निर्देश दिए हैं,ताकि आग लगने के कारणों और अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी सामने आ सके।

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को तत्काल अमरावती का दौरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि घटना में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का उद्देश्य हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाना है। अस्पताल की अग्निशमन व्यवस्था,उपकरणों की स्थिति और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था समेत सभी पहलुओं की जाँच किए जाने की संभावना है।

हादसे में जान गंवाने वाले तीन नवजातों के परिजनों को महाराष्ट्र सरकार की ओर से पाँच -पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा घायल बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अमरावती के जिलाधिकारी को घायल बच्चों के बेहतर उपचार के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि हादसे के दौरान 36 बच्चों को सुरक्षित बचाने में सफलता मिली। आग लगने के बाद अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों और बचाव दल ने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए तत्काल प्रयास किए।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने भी इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिला महिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में तड़के लगी आग में नवजात शिशुओं की दुर्भाग्यपूर्ण मौत बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने हादसे में अपने मासूम बच्चों को खोने वाले परिवारों के दुख में शामिल होने की बात कही। साथ ही उन्होंने घायल बच्चों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की और पीड़ित परिवारों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति मिलने की कामना की।

घटना के बाद भाजपा नेता और पूर्व सांसद नवनीत राणा ने भी अस्पताल का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी अस्पताल में आग लगती है,तो उससे निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि आग लगने की स्थिति में स्प्रिंकलर तत्काल क्यों नहीं चला और वेंटिलेटर में विस्फोट कैसे हुआ। उन्होंने कहा कि इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद सामने आना चाहिए।

नवनीत राणा ने कहा कि यदि जाँच में किसी व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए सरकार से मुआवजे की माँग करने की बात भी कही। हालाँकि,उन्होंने यह भी कहा कि जिन परिवारों ने अपने मासूम बच्चों को खो दिया है,उनके नुकसान की भरपाई किसी भी आर्थिक सहायता से नहीं की जा सकती।

अमरावती जिला महिला अस्पताल में हुई इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई जैसे संवेदनशील स्थानों पर आग से बचाव के उपकरणों की नियमित जाँच,बिजली और मेडिकल उपकरणों की सुरक्षा तथा आपातकालीन निकासी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। अब उच्चस्तरीय जाँच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि आग किस वजह से लगी,आग पर काबू पाने में क्या कठिनाइयाँ सामने आईं और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई कमी या लापरवाही तो नहीं थी।

मुख्यमंत्री की ओर से जाँच के आदेश और आर्थिक सहायता की घोषणा के बाद अब सभी की नजर जाँच रिपोर्ट पर है। सरकार के सामने न केवल हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की चुनौती है,बल्कि अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों को और मजबूत करने की भी जिम्मेदारी है,ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी दर्दनाक त्रासदी का सामना न करना पड़े।