नई दिल्ली,22 अगस्त (युआईटीवी)- भारतीय स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने लुसाने डायमंड लीग 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया,लेकिन उन्हें खिताब से संतोष करना पड़ा। नीरज ने प्रतियोगिता में 88.05 मीटर का थ्रो किया और दूसरे स्थान पर रहे। श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 88.14 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान हासिल करते हुए खिताब अपने नाम किया। वहीं,ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स 86.69 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ तीसरे स्थान पर रहे। नीरज के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा,क्योंकि चोट से वापसी के बाद वह लगातार अपनी लय हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
लुसाने में मुकाबले की शुरुआत नीरज चोपड़ा के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। उन्होंने अपने पहले प्रयास में 83.54 मीटर की दूरी तय की। दूसरी ओर,रुमेश थरंगा पथिरागे ने अपने पहले ही प्रयास में 85.99 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए प्रतियोगिता में शुरुआती बढ़त हासिल कर ली। नीरज के पहले प्रयास के बाद ही यह साफ हो गया था कि उन्हें शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा।
भारतीय स्टार ने दूसरे प्रयास में जबरदस्त वापसी की। नीरज ने जैवलिन को 88.05 मीटर की दूरी तक पहुँचाया और सीधे पहले स्थान पर कब्जा कर लिया। यह थ्रो इस सीजन में नीरज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। उनके इस प्रयास के बाद स्टेडियम में मौजूद दर्शकों और भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ गईं। नीरज ने अपने दूसरे प्रयास से यह संकेत दे दिया कि वह इस प्रतियोगिता में खिताब के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
हालाँकि,श्रीलंकाई खिलाड़ी ने भी हार नहीं मानी। रुमेश ने अपने दूसरे प्रयास में 87.06 मीटर का थ्रो किया। यह उनका पहला प्रयास जितना प्रभावशाली नहीं था,लेकिन उन्होंने तीसरे प्रयास में प्रतियोगिता का पूरा रुख बदल दिया। रुमेश ने तीसरे प्रयास में 88.14 मीटर का शानदार थ्रो किया और नीरज को पीछे छोड़ते हुए फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। यही थ्रो अंत में उनके लिए निर्णायक साबित हुआ।
तीसरे प्रयास में नीरज अपनी लय को बरकरार नहीं रख सके। उन्होंने 83.72 मीटर का थ्रो किया,जो उनके दूसरे प्रयास से काफी कम था। इसके बाद चौथे प्रयास में नीरज से फाउल हो गया। भारतीय खिलाड़ी के लिए प्रतियोगिता में वापसी का एक और मौका बचा था, लेकिन उन्होंने पाँचवें प्रयास में थ्रो नहीं किया। अपने छठे और अंतिम प्रयास में नीरज 82.15 मीटर तक ही पहुँच सके। इस तरह उनका 88.05 मीटर का दूसरा प्रयास ही प्रतियोगिता में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा और उन्हें रजत पदक के साथ संतोष करना पड़ा।
दूसरी ओर,रुमेश थरंगा पथिरागे के लिए तीसरा प्रयास सबसे महत्वपूर्ण रहा। 88.14 मीटर का उनका थ्रो प्रतियोगिता में सबसे लंबी दूरी का रहा। इसके बाद उनके पाँचवें और छठे प्रयास फाउल रहे,जबकि चौथा प्रयास भी ज्यादा प्रभावी नहीं रहा। इसके बावजूद तीसरे प्रयास में हासिल की गई बढ़त इतनी पर्याप्त थी कि कोई भी खिलाड़ी उन्हें पीछे नहीं छोड़ सका। उन्होंने नीरज चोपड़ा जैसे दिग्गज खिलाड़ी को पीछे छोड़ते हुए लुसाने डायमंड लीग का खिताब जीत लिया।
नीरज के प्रदर्शन की खास बात यह रही कि उन्होंने इस सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज किया। चोट से वापसी के बाद उनके लिए यह लगातार लय हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नीरज ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता था। उस प्रतियोगिता में भी वह अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब नहीं पहुँच सके थे। हालाँकि,उन्होंने पदक हासिल करते हुए अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता का प्रदर्शन किया था।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भी नीरज को रुमेश थरंगा पथिरागे से चुनौती मिली थी। श्रीलंकाई खिलाड़ी ने वहाँ 89.75 मीटर का शानदार थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। नीरज को 85.83 मीटर के प्रदर्शन के साथ रजत से संतोष करना पड़ा था। अब लुसाने डायमंड लीग में भी रुमेश ने नीरज को पीछे छोड़ दिया है। हालाँकि,दोनों प्रतियोगिताओं में नीरज के प्रदर्शन में यह अंतर भी देखने को मिला कि लुसाने में उन्होंने अपने सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज किया।
नीरज पहले ही यह स्वीकार कर चुके हैं कि चोट से वापसी के बाद उन्हें अपनी पुरानी लय हासिल करने में समय लग रहा है। जैवलिन थ्रो जैसे खेल में तकनीक,गति,ताकत और शरीर का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होता है। चोट के बाद इन सभी पहलुओं को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लाने में समय लग सकता है। ऐसे में 88.05 मीटर का थ्रो नीरज के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
लुसाने डायमंड लीग में नीरज की चुनौती आसान नहीं थी। उनके सामने विश्व स्तरीय जैवलिन थ्रोअर मौजूद थे और मामूली अंतर भी पदक की स्थिति बदल सकता था। नीरज और रुमेश के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के बीच केवल 9 सेंटीमीटर का अंतर रहा। इससे मुकाबले की कड़ी प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है। नीरज ने 88.05 मीटर और रुमेश ने 88.14 मीटर की दूरी तय की। ऐसे में खिताब का फैसला बेहद करीबी अंतर से हुआ।
नीरज के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वह अपनी फिटनेस और तकनीक पर ध्यान देते हुए आने वाली प्रतियोगिताओं में इस प्रदर्शन को और बेहतर करें। 88 मीटर से अधिक का थ्रो उनकी क्षमता का प्रमाण है और इससे उन्हें आगे के मुकाबलों के लिए आत्मविश्वास भी मिलेगा। हालाँकि,वह खिताब से चूक गए,लेकिन सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना उनके लिए एक सकारात्मक उपलब्धि रही।
लुसाने डायमंड लीग का परिणाम यह भी बताता है कि जैवलिन थ्रो में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा लगातार कड़ी हो रही है। रुमेश थरंगा पथिरागे ने पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में 89.75 मीटर का थ्रो कर अपनी क्षमता दिखाई थी और अब लुसाने में 88.14 मीटर के साथ एक और बड़ा प्रदर्शन किया। नीरज के लिए यह चुनौती आने वाले समय में उन्हें और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
कुल मिलाकर,लुसाने डायमंड लीग 2026 में नीरज चोपड़ा खिताब जीतने से भले ही चूक गए,लेकिन उन्होंने अपने सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज करके शानदार वापसी के संकेत दिए हैं। 88.05 मीटर का उनका प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि वह धीरे-धीरे अपनी पुरानी लय की ओर लौट रहे हैं। रुमेश थरंगा पथिरागे ने 88.14 मीटर के थ्रो के साथ लगातार दूसरी बड़ी प्रतियोगिता में नीरज को पीछे छोड़ा,लेकिन दोनों के बीच अंतर बेहद मामूली रहा। भारतीय प्रशंसकों की नजर अब नीरज के अगले मुकाबलों पर होगी,जहाँ उनसे इस प्रदर्शन को और आगे ले जाने और फिर से खिताब अपने नाम करने की उम्मीद होगी।
