नई दिल्ली, 24 अगस्त (युआईटीवी)- यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन की सरकार और जनता को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से बातचीत कर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और साझेदारी को और मजबूत तथा गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की ओर से यूक्रेन को दी गई स्वतंत्रता दिवस की बधाई को दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूक्रेन हर वर्ष 24 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा, यूक्रेन की सरकार और वहाँ के लोगों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले समय में यूक्रेन के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों और साझेदारी को और मजबूत तथा गहरा करने की उम्मीद करता है। जयशंकर का यह संदेश ऐसे समय आया है,जब रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं।
भारत ने शुरुआत से ही रूस-यूक्रेन संघर्ष के मामले में बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान पर जोर दिया है। नई दिल्ली ने दोनों पक्षों के बीच संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को ही स्थायी शांति का रास्ता बताया है। वहीं,यूक्रेन लगातार रूस के हमलों को रोकने और अपने नागरिकों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग करता रहा है। ऐसे माहौल में भारत और यूक्रेन के बीच संपर्क और उच्चस्तरीय बातचीत का महत्व बढ़ जाता है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने भी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रस्तावित बैठक को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यूक्रेन के खिलाफ रूस की ओर से जारी युद्ध के प्रभावों पर चर्चा करेगी। इस बैठक में विशेष रूप से यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों में आम नागरिकों पर रूस के लगातार बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों को चर्चा के केंद्र में रखा जाएगा।
सिबिहा के मुताबिक,रूस की ओर से किए जा रहे हमलों का सबसे गंभीर असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। उन्होंने हाल ही में क्रिवी रीह के एक शॉपिंग मॉल पर हुए दोहरे हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना ने युद्ध की भयावहता को एक बार फिर सामने ला दिया है। उनके अनुसार,शुक्रवार को हुए इस हमले में 16 लोगों की मौत हुई और 130 लोग घायल हुए। घायलों में 20 से अधिक बच्चे भी शामिल थे। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने इस घटना को नागरिकों और उनके लिए जरूरी बुनियादी ढाँचे पर हमलों का दर्दनाक उदाहरण बताया।
सिबिहा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में यूक्रेन के बंदरगाहों पर रूस के लगातार हमलों और अनाज निर्यात में पैदा की जा रही बाधाओं का मुद्दा भी उठाया जाएगा। यूक्रेन दुनिया के प्रमुख अनाज निर्यातकों में शामिल रहा है और युद्ध के दौरान उसके बंदरगाहों तथा निर्यात मार्गों पर हमलों का असर वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ा है। यूक्रेन का कहना है कि उसके बंदरगाहों पर हमले और अनाज निर्यात में रुकावटें केवल उसके लिए समस्या नहीं हैं,बल्कि दुनिया के उन देशों को भी प्रभावित करती हैं,जो खाद्य आपूर्ति के लिए यूक्रेनी अनाज पर निर्भर हैं।
यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा कि बंदरगाहों और निर्यात व्यवस्था पर हमलों से वैश्विक खाद्य संकट और गहरा सकता है। इसका असर यूक्रेन की सीमाओं से बहुत दूर रहने वाले लाखों लोगों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे को उठाने के पीछे उद्देश्य बताते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को युद्ध के मानवीय और वैश्विक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सिबिहा ने इस बैठक के आयोजन के लिए डेनमार्क की अध्यक्षता और अपने सहयोगी लार्स लोके रासमुसेन को धन्यवाद दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन का समर्थन करने वाले सभी साझेदार देशों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि यूक्रेन को उम्मीद है कि सुरक्षा परिषद में होने वाली चर्चा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रूस की कार्रवाइयों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ठोस नतीजों की दिशा में आगे बढ़ेगी।
यूक्रेन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बैठक के दौरान रूस के हमलों को रोकने,आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतर्राष्ट्रीय शांति तथा सुरक्षा बनाए रखने के लिए निर्णायक कदम उठाने की मांग की जाएगी। यूक्रेन लगातार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से रूस पर दबाव बढ़ाने और उसके खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की अपील करता रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत की भूमिका पर भी नजर है। भारत ने रूस के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखते हुए यूक्रेन के साथ भी कूटनीतिक और मानवीय संपर्क जारी रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर उच्चस्तरीय संपर्क और संवाद को नई गति मिली थी। भारत ने लगातार यह संदेश दिया है कि युद्ध का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।
एस. जयशंकर की ओर से स्वतंत्रता दिवस पर यूक्रेन की सरकार और जनता को बधाई दिया जाना इसी व्यापक राजनयिक संवाद का हिस्सा माना जा सकता है। भारत और यूक्रेन के बीच व्यापार,कृषि,औषधि,शिक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में संबंध रहे हैं। युद्ध के कारण इन संबंधों पर असर पड़ा है,लेकिन दोनों देश इन्हें आगे बढ़ाने की संभावनाएँ तलाशते रहे हैं।
यूक्रेन का स्वतंत्रता दिवस इस वर्ष भी ऐसे समय आया है,जब देश युद्ध की गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है। आम नागरिकों पर हमले,ऊर्जा और परिवहन ढाँचे को नुकसान तथा बंदरगाहों और निर्यात मार्गों पर दबाव यूक्रेन की बड़ी चिंताएँ हैं। दूसरी ओर, रूस अपनी सुरक्षा चिंताओं और सैन्य अभियान को लेकर अलग रुख रखता है। ऐसे में संघर्ष का स्थायी समाधान अब भी अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होने वाली चर्चा से यूक्रेन को अंतर्राष्ट्रीय समर्थन मजबूत करने की उम्मीद है। हालाँकि,सुरक्षा परिषद में रूस की स्थिति और विभिन्न देशों के अलग-अलग कूटनीतिक हितों के कारण किसी ठोस निर्णय तक पहुँचना आसान नहीं होगा। इसके बावजूद यूक्रेन लगातार यह प्रयास कर रहा है कि युद्ध के मानवीय प्रभावों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाया जाए।
भारत की ओर से यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस पर दिया गया संदेश इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली कीव के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। जयशंकर और सिबिहा के बीच बातचीत में द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने पर जोर इस दिशा में महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद के साथ-साथ आर्थिक और क्षेत्रीय सहयोग को भी आगे बढ़ाने की संभावनाएँ बनी हुई हैं।
कुल मिलाकर,यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस पर भारत की ओर से आई शुभकामनाओं और दोनों विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत ने द्विपक्षीय संबंधों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। वहीं,संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों पर होने वाली चर्चा से यूक्रेन को नागरिकों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन के मुद्दे पर अपनी स्थिति रखने का अवसर मिलेगा। युद्ध के बीच यूक्रेन जहां शांति और सुरक्षा की माँग कर रहा है,वहीं भारत दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की अपनी नीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
