चेन्नई,24 अगस्त (युआईटीवी)- वीकेंड की दो दिन की छुट्टी के बाद तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को एक बार फिर शुरू होगी। सदन में छह प्रमुख विभागों से जुड़ी अनुदान मांगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इन विभागों में नगर प्रशासन और जलापूर्ति, सूचना, प्रचार, स्टेशनरी और प्रिंटिंग, स्कूली शिक्षा, तमिल विकास तथा उच्च शिक्षा शामिल हैं। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक संबंधित विभागों की नीतियों, बजट आवंटन, योजनाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर सरकार से सवाल कर सकते हैं।
सोमवार की कार्यवाही में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के पास मौजूद विभागों से जुड़ी अनुदान मांगों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। मुख्यमंत्री के पास नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभाग भी है। ऐसे में उनसे शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, पेयजल आपूर्ति, नगर निकायों की कार्यप्रणाली और बढ़ते शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों को लेकर सवाल किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री विभागीय चर्चा के दौरान विधायकों की ओर से उठाए गए मुद्दों का जवाब देंगे और सरकार की योजनाओं तथा भविष्य की प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी दे सकते हैं।
नगर प्रशासन और जलापूर्ति का मुद्दा तमिलनाडु के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य के कई शहरों और कस्बों में तेजी से शहरी विस्तार हो रहा है। बढ़ती आबादी के साथ पेयजल, जल निकासी, सड़क, स्वच्छता और नगर सेवाओं की माँग भी बढ़ रही है। ऐसे में इस विभाग के लिए बजट में किए गए प्रावधान और सरकार की प्राथमिकताएं चर्चा का अहम हिस्सा बन सकती हैं। विपक्ष सरकार से यह जानने की कोशिश कर सकता है कि शहरों और ग्रामीण-शहरी संक्रमण वाले क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कितनी राशि आवंटित की गई है और योजनाओं को जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा।
वहीं, सूचना, प्रचार, स्टेशनरी और प्रिंटिंग से जुड़े विभाग की अनुदान मांगों पर भी सदन में चर्चा होगी। इस विभाग से जुड़े मंत्री राजमोहन चर्चा का जवाब देंगे। सरकार की सूचना नीति, प्रचार गतिविधियों और सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के तरीकों को लेकर विधायकों की ओर से सवाल उठाए जाने की संभावना है। इसके अलावा सरकारी मुद्रण और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े खर्च पर भी चर्चा हो सकती है।
स्कूली शिक्षा विभाग भी सोमवार की कार्यवाही के प्रमुख केंद्रों में रहेगा। राज्य में सरकारी स्कूलों की स्थिति, विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाएँ, शिक्षकों की जरूरत, डिजिटल शिक्षा, स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे मुद्दे चर्चा में उठ सकते हैं। विपक्ष सरकार से शिक्षा बजट के उपयोग और योजनाओं के प्रभाव को लेकर सवाल कर सकता है। सरकार की ओर से स्कूल शिक्षा क्षेत्र में नई योजनाओं या मौजूदा कार्यक्रमों के विस्तार की घोषणा भी की जा सकती है।
उच्च शिक्षा से जुड़ी अनुदान मांगों पर होने वाली चर्चा का जवाब उच्च शिक्षा मंत्री विश्वनाथन देंगे। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, उच्च शिक्षा संस्थानों में बुनियादी ढांचे, विद्यार्थियों के लिए सुविधाओं, शिक्षकों की नियुक्ति और रोजगारपरक शिक्षा जैसे मुद्दों पर बहस होने की संभावना है। राज्य सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल की घोषणा कर सकती है। इसके अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए बजट आवंटन और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सदन में चर्चा हो सकती है।
तमिल विकास विभाग की अनुदान माँग भी सोमवार को सदन में रखी जाएगी। तमिल भाषा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और इसके उपयोग को बढ़ावा देने से संबंधित सरकारी योजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है। तमिल भाषा और साहित्य से जुड़े संस्थानों, प्रकाशनों तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए सरकार की ओर से किए गए प्रावधानों पर भी विधायक सवाल उठा सकते हैं। इस दौरान राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को लेकर सरकार का रुख सामने आ सकता है।
विधानसभा के मौजूदा सत्र में अब तक कई विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा हो चुकी है। राज्य का आम बजट 5 अगस्त को विधानसभा में पेश किया गया था, जबकि 6 अगस्त को कृषि बजट प्रस्तुत किया गया। दोनों वित्तीय बयानों पर 7, 10 और 11 अगस्त को तीन दिनों तक सामान्य चर्चा हुई थी। इसके बाद वित्त मंत्री मारिया विल्सन और कृषि मंत्री विनोद ने सदन में हुई बहस का जवाब दिया। उनके जवाब के बाद 12 अगस्त को आम बजट और कृषि बजट पर चर्चा समाप्त हुई।
इसके बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह के कारण विधानसभा की कार्यवाही चार दिनों के लिए स्थगित कर दी गई थी। 17 अगस्त को सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुई। अब तक विधानसभा में 18 विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा की जा चुकी है और उन्हें मंजूरी भी दी जा चुकी है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को छह और महत्वपूर्ण विभागों की मांगों पर चर्चा होगी।
शनिवार और रविवार को अवकाश होने के कारण 22 और 23 अगस्त को विधानसभा की कार्यवाही स्थगित रही। अब सोमवार को सदन की बैठक दोबारा शुरू होने के साथ अनुदान मांगों पर चर्चा आगे बढ़ेगी। सत्ता पक्ष के विधायक जहाँ सरकार की योजनाओं और नीतियों का समर्थन करते हुए उनके क्रियान्वयन की जानकारी रख सकते हैं,वहीं विपक्षी सदस्य खर्च,बजट प्राथमिकताओं और योजनाओं की प्रभावशीलता को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास कर सकते हैं।
विभागीय चर्चा के बाद संबंधित मंत्री और मुख्यमंत्री विधायकों की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देंगे। इसके बाद अनुदान की मांगों को मंजूरी के लिए सदन के सामने रखा जाएगा। चर्चा के दौरान सरकार की ओर से नई विभागीय पहलों की घोषणा किए जाने की भी संभावना है। खासकर मुख्यमंत्री के पास मौजूद नगर प्रशासन और जलापूर्ति विभाग से संबंधित घोषणाओं पर राजनीतिक और आम जनता की नजर रहेगी।
2026-27 के वित्तीय वर्ष के लिए बजट प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया के बीच यह चर्चा सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने का अवसर भी होगी। शिक्षा, उच्च शिक्षा, शहरी प्रशासन, पेयजल, सूचना और तमिल भाषा के विकास जैसे क्षेत्र सीधे तौर पर राज्य के लोगों से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन विभागों की अनुदान मांगों पर होने वाली बहस केवल बजटीय आँकड़ों तक सीमित रहने के बजाय सरकार की नीतिगत दिशा और योजनाओं के जमीनी असर पर भी केंद्रित रह सकती है।
सोमवार की कार्यवाही में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं और सरकार की ओर से किन नई योजनाओं तथा नीतिगत पहलों की घोषणा की जाती है। मंत्रियों और मुख्यमंत्री के जवाबों के बाद अनुदान मांगों को मंजूरी मिलने के साथ 2026-27 के बजट के विभागवार क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।
