नई दिल्ली, 24 अगस्त (युआईटीवी)- यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोर के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुए इन समझौतों को यूक्रेन की सुरक्षा क्षमता बढ़ाने और लंबे समय तक सहयोग सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दोनों देशों ने रक्षा के साथ-साथ ऊर्जा और पुनर्निर्माण के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोर के साथ मिलकर उन्होंने ड्रोन डील प्रारूप में रक्षा सहयोग समझौते और रणनीतिक साझेदारी घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणा पत्र को ‘एलिजाबेथ’ समझौते का नाम दिया गया है। जेलेंस्की के अनुसार,इस समझौते का नाम प्रिंस यारोस्लाव द वाइज की बेटी एलिजाबेथ के नाम पर रखा गया है,जो नॉर्वे की रानी थीं।
जेलेंस्की ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए ये दस्तावेज रक्षा, ऊर्जा और यूक्रेनी लोगों को मजबूत बनाने से जुड़े क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी के लिए ठोस आधार तैयार करते हैं। यूक्रेन इस समय रूस के साथ जारी युद्ध के कारण गंभीर सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नॉर्वे जैसे यूरोपीय सहयोगी के साथ रक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना यूक्रेन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने नॉर्वे की ओर से जारी वित्तीय और सैन्य समर्थन के लिए भी आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से 2027 के लिए लगभग 9 अरब डॉलर की सहायता जारी रखने और उच्च स्तर का समर्थन बनाए रखने के नॉर्वे के फैसले का स्वागत किया। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन रूस के पूर्ण पैमाने पर किए गए आक्रमण की शुरुआत से ही नॉर्वे के समर्थन को महसूस करता रहा है।
उन्होंने नॉर्वे की सरकार और वहां की जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि युद्ध के शुरुआती दिनों से ही नॉर्वे यूक्रेन के साथ खड़ा रहा है। जेलेंस्की के मुताबिक,संकट के कठिन दौर में सहयोगी देशों की ओर से लगातार मिलने वाला समर्थन यूक्रेन की रक्षा क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नॉर्वे की ओर से भविष्य के लिए सहायता जारी रखने का निर्णय भी यूक्रेन की दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से अहम है।
रक्षा सहयोग समझौते में ड्रोन को विशेष महत्व दिया गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ड्रोन आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। दोनों पक्ष निगरानी,लक्ष्य पहचान और सैन्य अभियानों के लिए ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में यूक्रेन के युद्ध अनुभव और नॉर्वे की तकनीकी तथा औद्योगिक क्षमताओं के बीच सहयोग से भविष्य में रक्षा क्षेत्र में नई संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाएँ बन सकती हैं।
जेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने अपने कई करीबी यूरोपीय सहयोगियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें मेटे फ्रेडरिकसेन,एंड्रीस कुबिलियस,अलेक्जेंडर स्टब,क्रिस्टन मिकाल, गितानास नौसेदा और जोनास गाहर स्टोर शामिल रहे। उन्होंने यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण दौर में लगातार समर्थन देने के लिए इन नेताओं का आभार व्यक्त किया।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यूक्रेन ने उत्तरी यूरोप और बाल्टिक क्षेत्र के लगभग हर देश के साथ ऐसी साझेदारियाँ और दोस्ती विकसित की हैं,जिन पर वह गर्व कर सकता है। उनका कहना है कि युद्ध के दौरान इन देशों का समर्थन केवल राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहा,बल्कि सुरक्षा,आर्थिक सहायता,ऊर्जा और मानवीय सहयोग के रूप में भी सामने आया है।
जेलेंस्की ने सहयोग के एजेंडे को स्पष्ट और व्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और उसके सहयोगी देशों के बीच सहयोग का प्रमुख उद्देश्य देश की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करना,आगामी सर्दियों के लिए तैयारी करना, यूरोपीय एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और संयुक्त रक्षा परियोजनाओं पर काम करना है।
यूक्रेन के लिए वायु रक्षा प्रणाली इस समय सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा जरूरतों में से एक है। रूस की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन अपने शहरों, ऊर्जा ढाँचे और महत्वपूर्ण सैन्य तथा नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए वायु रक्षा क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में नॉर्वे और अन्य यूरोपीय देशों का सहयोग यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी दोनों देशों के बीच समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। युद्ध के दौरान यूक्रेन का ऊर्जा ढाँचा कई बार रूसी हमलों का निशाना बना है। इससे बिजली उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। सर्दियों के दौरान ऊर्जा की माँग बढ़ने के कारण यूक्रेन के सामने अतिरिक्त चुनौतियां पैदा होती हैं। इसी वजह से ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना यूक्रेन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पुनर्निर्माण के क्षेत्र में भी नॉर्वे के साथ सहयोग यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण होगा। युद्ध के कारण देश के कई शहरों,आवासीय क्षेत्रों और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है। युद्ध समाप्त होने के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की जरूरत होगी। हालाँकि,कई पुनर्निर्माण परियोजनाएँ युद्ध के दौरान भी शुरू की जा रही हैं,ताकि प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक जीवन को सामान्य बनाया जा सके।
जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यूक्रेन केवल सहायता प्राप्त करने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि अपने साझेदारों को अपनी विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमताओं से मजबूत करने में भी योगदान देना चाहता है। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान यूक्रेन ने आधुनिक सैन्य तकनीक,ड्रोन और युद्ध के बदलते तरीकों के संबंध में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किया है। यूक्रेन इस अनुभव और अपनी तकनीकी क्षमता को सहयोगी देशों के साथ साझा करना चाहता है।
यूक्रेन और नॉर्वे के बीच हुए समझौते ऐसे समय में सामने आए हैं,जब यूरोप अपनी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से अधिक सक्रिय है। रूस के साथ जारी युद्ध ने यूरोपीय देशों को रक्षा उत्पादन,वायु रक्षा,ड्रोन तकनीक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। नॉर्वे भी यूक्रेन के प्रमुख यूरोपीय समर्थकों में शामिल रहा है।
‘एलिजाबेथ’ रणनीतिक साझेदारी समझौते के जरिए दोनों देशों ने अपने संबंधों को केवल मौजूदा युद्ध की परिस्थितियों तक सीमित रखने के बजाय दीर्घकालिक आधार देने की कोशिश की है। रक्षा के अलावा ऊर्जा,पुनर्निर्माण और यूरोपीय एकीकरण जैसे क्षेत्रों को साझेदारी के एजेंडे में शामिल करना यह संकेत देता है कि दोनों देश आने वाले वर्षों में भी सहयोग जारी रखने की योजना बना रहे हैं।
कुल मिलाकर,जेलेंस्की और जोनास गाहर स्टोर के बीच हुए समझौते यूक्रेन और नॉर्वे के संबंधों को नई दिशा देने वाले कदम के रूप में देखे जा रहे हैं। लगभग 9 अरब डॉलर की 2027 की सहायता जारी रखने का नॉर्वे का फैसला और रक्षा सहयोग समझौता यूक्रेन की सुरक्षा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं ड्रोन,वायु रक्षा,ऊर्जा,सर्दियों की तैयारी और संयुक्त रक्षा परियोजनाओं पर जोर दोनों देशों की साझेदारी को और व्यावहारिक बनाने की कोशिश है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है और नॉर्वे के साथ यह नई रणनीतिक साझेदारी उसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
