बिश्केक में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात (तस्वीर क्रेडिट@DeshbandhuMp)

बिश्केक में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात,हाथ मिलाकर की बातचीत; एससीओ सम्मेलन में दिखी गर्मजोशी

बिश्केक,1 सितंबर (युआईटीवी)- किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मंगलवार को आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात देखने को मिली। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाकर अभिवादन किया और कुछ देर साथ चलते हुए बातचीत भी की। एससीओ सम्मेलन के आयोजन स्थल पर हुई यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है,जब भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर लगातार संवाद और संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

सम्मेलन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एससीओ के अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ समूह तस्वीर खिंचवाई। इसके बाद दोनों नेता आपस में बातचीत करते नजर आए। कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ते समय प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग साथ-साथ चले और दोनों ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का अभिवादन किया। दोनों नेताओं के बीच हुई इस संक्षिप्त बातचीत ने सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया।

प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इससे पहले मुलाकात अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। उस बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब बिश्केक में हुई ताजा मुलाकात को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल पर पहुँचे,जहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इससे पहले वह रविवार को उज्बेकिस्तान की यात्रा पूरी करने के बाद किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुँचे थे। वहाँ भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। भारतीय समुदाय के सदस्यों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान भारतीय समुदाय में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।

एससीओ का गठन क्षेत्रीय सहयोग,सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी संपर्क को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। वर्तमान में संगठन में कुल 10 सदस्य देश शामिल हैं। इनमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। संगठन में अजरबैजान और आर्मेनिया पर्यवेक्षक देशों के रूप में जुड़े हुए हैं। इसके अलावा एससीओ के 15 संवाद साझेदार देश भी हैं,जिनमें मिस्र, कंबोडिया, कतर, कुवैत, लाओस, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, तुर्किये और श्रीलंका समेत अन्य देश शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की बिश्केक यात्रा के दौरान सोमवार को कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को बिश्केक में आयोजित विश्व नोमैड खेलों के उद्घाटन समारोह में भी हिस्सा लिया। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग ले रहे भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ दीं। विश्व नोमैड खेल मध्य एशिया की पारंपरिक खेल संस्कृति और विरासत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने वाला प्रमुख आयोजन है। प्रधानमंत्री की इस कार्यक्रम में भागीदारी भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की दो देशों की यात्रा पर रवाना हुए थे। यात्रा पर रवाना होने से पहले उन्होंने कहा था कि भारत वर्ष 2017 से एससीओ का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। उन्होंने कहा था कि भारत संगठन के माध्यम से क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम करता रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा था कि भारत एससीओ के सदस्य देशों के साथ मिलकर सुरक्षा,संपर्क और अवसर पर आधारित अपने क्षेत्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने आतंकवाद,अलगाववाद और कट्टरपंथ से मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। बिश्केक में एससीओ सम्मेलन के दौरान भी भारत की प्राथमिकताओं में क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।

भारत और मध्य एशिया के देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में संबंधों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, संस्कृति, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में एससीओ भारत के लिए मध्य एशियाई देशों और अन्य प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

प्रधानमंत्री मोदी की बिश्केक यात्रा इसी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा है। भारत एससीओ के मंच से एक ओर जहाँ क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है,वहीं दूसरी ओर मध्य एशिया के साथ आर्थिक और रणनीतिक संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है।

बिश्केक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की हाथ मिलाकर बातचीत को भी इसी क्षेत्रीय संदर्भ में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद बनाए रखना क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंच दोनों देशों को साझा क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर बातचीत का अवसर देते हैं।

कुल मिलाकर, बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी के लिए बहुपक्षीय कूटनीति के साथ-साथ कई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बना है। सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी मुलाकात, हाथ मिलाना और साथ चलते हुए बातचीत करना खास तौर पर चर्चा में रहा। वहीं मध्य एशियाई देशों के साथ लगातार बढ़ते संपर्क और एससीओ में भारत की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।