अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ईरान की मिसाइल कार्रवाई पर ट्रंप की चेतावनी,बोले- ‘कड़ा प्रहार करेंगे’,जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले के बाद बढ़ा तनाव

वॉशिंगटन,1 सितंबर (युआईटीवी)- ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान की ओर से जॉर्डन में तैनात अमेरिकी बलों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और अमेरिका ईरान पर कड़ा प्रहार करेगा। हालाँकि,इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

सोमवार को स्थानीय समय के अनुसार ट्रंप ने एक फोन इंटरव्यू में बताया कि ईरान ने रात के दौरान जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बलों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इन हमलों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ईरान पर कड़ा प्रहार करेगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन ईरान की सैन्य कार्रवाई को गंभीरता से ले रहा है और आगे जवाबी सैन्य कदम उठाने की तैयारी कर सकता है।

ट्रंप ने ईरानी मिसाइल हमले के दौरान अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली की कार्रवाई के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों में से एक को अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने जानबूझकर नहीं रोका। अमेरिकी आकलन के अनुसार वह मिसाइल किसी निर्धारित लक्ष्य को नहीं लगने वाली थी,इसलिए उसे रोकने के लिए रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल नहीं किया गया। ट्रंप के मुताबिक,बाकी आने वाली मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया।

इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में सैन्य कार्रवाई का सिलसिला तेज होने से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। खास तौर पर जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियाँ इस पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना रही हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने हालाँकि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है,लेकिन उन्हें इस बात को लेकर संदेह है कि ईरान के साथ किसी समझौते पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है,जब दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई के कारण कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ लगातार चुनौती का सामना कर रही हैं।

ट्रंप ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि प्रतिबंधों का असर अब बहुत मजबूती से दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से ईरान पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए प्रतिबंधों का इस्तेमाल करता रहा है। ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि वह सैन्य दबाव के साथ आर्थिक दबाव को भी ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।

अमेरिकी सूत्रों के अनुसार,ईरान ने रविवार को जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बलों पर कम से कम आठ बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह हमला अमेरिका की ओर से लारक द्वीप पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के मिसाइल लॉन्चरों पर किए गए हवाई हमले के बाद हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक,जॉर्डन में हुए मिसाइल हमले से अमेरिकी पक्ष को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

दूसरी ओर,ईरान ने जॉर्डन में अपने हमले को अलग तरीके से पेश किया है। ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि ईरानी सेना ने जॉर्डन में स्थित किंग हुसैन और अल-अजराक अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि इन ठिकानों पर मौजूद तकनीकी और रखरखाव ढाँचे तथा उन क्षेत्रों को निशाना बनाया गया जहाँ अमेरिकी लड़ाकू विमान तैनात थे।

ईरान की ओर से यह भी दावा किया गया कि उसके हमले से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचा है। हालाँकि,अमेरिकी पक्ष की ओर से इस नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है। दोनों देशों के दावों में अंतर होने के कारण हमले के वास्तविक प्रभाव का स्वतंत्र आकलन महत्वपूर्ण होगा।

यह मिसाइल हमला अमेरिका द्वारा लारक द्वीप पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद हुआ। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने उस हमले को सीमित और सटीक कार्रवाई बताया है। अमेरिकी पक्ष के अनुसार,यह अभियान ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाने के लिए किया गया था,जिनके बारे में अमेरिका का कहना है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और वैश्विक व्यापार के लिए तत्काल खतरा पैदा कर रही थीं।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का अंतरराष्ट्रीय बाजार तक परिवहन होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता,बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी पड़ सकता है।

लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। संगठन की ओर से कहा गया कि अमेरिकी कार्रवाई में कई सैन्यकर्मी और आम नागरिक मारे गए या घायल हुए हैं। संगठन ने संकेत दिया कि इस हमले का जवाब हमलावर को सजा देकर दिया जाएगा। इसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी बलों पर मिसाइल हमले ने दोनों देशों के बीच टकराव को एक और स्तर पर पहुँचा दिया।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी की ओर से अनौपचारिक रिपोर्टों के आधार पर दावा किया गया कि लारक द्वीप पर हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई और दो अन्य घायल हुए। हालाँकि,इस दावे और नुकसान के आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मौजूदा घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की सैन्य कार्रवाइयों का जवाब देने की बात कर रहे हैं। ट्रंप ने जहाँ ईरान को कड़े जवाब की चेतावनी दी है, वहीं ईरानी सैन्य संगठन भी अमेरिकी कार्रवाई का बदला लेने की बात कर चुका है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

इसके बावजूद ट्रंप ने बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है,लेकिन किसी संभावित समझौते की विश्वसनीयता को लेकर वह आश्वस्त नहीं हैं। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका एक ओर सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है,वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक विकल्प को पूरी तरह बंद करने के लिए भी तैयार नहीं है।

आने वाले दिनों में स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका ईरान की मिसाइल कार्रवाई का किस स्तर पर जवाब देता है और ईरान उस प्रतिक्रिया पर क्या कदम उठाता है। यदि दोनों पक्ष लगातार जवाबी सैन्य कार्रवाई करते हैं,तो संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है। इसका असर जॉर्डन समेत आसपास के देशों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल ट्रंप के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ईरान की ओर से किए गए मिसाइल हमले को बिना जवाब छोड़े जाने के पक्ष में नहीं है। वहीं,बातचीत की संभावना खुली रखने से यह संकेत भी मिलता है कि सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ते की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अब दुनिया की नजर अमेरिका की अगली कार्रवाई, ईरान की प्रतिक्रिया और होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात पर टिकी हुई है।