अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@AIRNewsHindi)

ईरान में आईआरजीसी ठिकानों पर अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई,ट्रंप ने दी और कड़े जवाब की चेतावनी

वाशिंगटन,2 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर गंभीर सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक,यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ आईआरजीसी की ओर से किए गए हालिया हमलों के प्रयासों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तेहरान ने इन हमलों का जवाब दिया तो अमेरिका की प्रतिक्रिया पहले से कहीं ज्यादा जोरदार होगी।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय समय के अनुसार मंगलवार दोपहर 12 बजे अमेरिकी बलों ने ईरान में आईआरजीसी के ठिकानों के खिलाफ हमले शुरू किए। अमेरिकी सेना ने इन हमलों को क्षेत्र में अपने सैनिकों और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री यातायात की सुरक्षा से जोड़ते हुए अंजाम दिया है। अमेरिका का आरोप है कि आईआरजीसी ने हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक शिपिंग को निशाना बनाने की कोशिश की और इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य बलों के लिए भी खतरा पैदा किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इन हमलों की पुष्टि की। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी ठिकानों पर हमला कर रहा है। ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को बड़ा और शक्तिशाली बताया। उनके मुताबिक, अमेरिका की यह कार्रवाई ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन बिछाने के कथित नाकाम प्रयास और जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आठ मिसाइलें दागे जाने के जवाब में की गई है।

ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने खिलाफ किसी भी जवाबी कार्रवाई को हल्के में नहीं लेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तेहरान अमेरिकी हमलों के जवाब में आईआरजीसी या अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाता है तो वाशिंगटन की ओर से और भी ज्यादा ताकत के साथ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण स्थिति के और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।

अमेरिका की ताजा कार्रवाई सोमवार रात हुए हमलों के आदान-प्रदान के ठीक बाद हुई है। बताया जा रहा है कि यह एक महीने से अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी गोलीबारी थी। इस घटनाक्रम के बाद मंगलवार को अमेरिकी सेना की कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है। क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव के बीच इस तरह के सीधे हमले व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को बढ़ा सकते हैं।

दूसरी ओर,ईरान ने अमेरिकी हमलों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आईआरजीसी के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने एक्स पर कहा कि अमेरिका को ईरान पर किए गए ताजा हमलों के लिए पछताना पड़ेगा और उसे कठोर सजा का सामना करना पड़ेगा। ईरानी पक्ष की इस प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि तेहरान अमेरिकी कार्रवाई को बिना जवाब छोड़े जाने के मूड में नहीं है।

ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया मुख्यालय ने भी अमेरिकी हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरानी मीडिया आईआरआईबी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि ईरानी सेना अमेरिका के खिलाफ करारे और घातक प्रहार करेगी। बयान में अमेरिका को क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने वाला और क्रूर दुश्मन बताते हुए कहा गया कि अमेरिकी सेना जितनी अधिक आक्रामक कार्रवाई करेगी, उसे उतना ही भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा तनाव में होर्मुज स्ट्रेट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर डाल सकता है। अमेरिका ने हाल के घटनाक्रमों में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को अपनी सैन्य कार्रवाई का प्रमुख कारण बताया है। वहीं ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के खिलाफ लगातार चेतावनी दी जाती रही है।

इस बीच,अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में रह रहे अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। विभाग ने लोगों से अधिक सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही संभावित उड़ान रद्द होने,हवाई क्षेत्र बंद किए जाने और यात्रा में बाधा आने की स्थिति को लेकर भी अमेरिकी नागरिकों को तैयार रहने की सलाह दी गई है। इससे साफ है कि अमेरिकी प्रशासन क्षेत्र में आगे और सैन्य गतिविधियों की संभावना को लेकर चिंतित है।

ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है,जब मध्य पूर्व पहले से ही कई स्तरों पर तनाव का सामना कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य हमलों का यह नया दौर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक बाजारों के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में किसी बड़े सैन्य घटनाक्रम से अंतर्राष्ट्रीय समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान अमेरिकी हमलों का किस तरह जवाब देता है। आईआरजीसी और ईरानी सैन्य नेतृत्व की ओर से कठोर प्रतिक्रिया के संकेत दिए जा चुके हैं,जबकि राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि जवाबी कार्रवाई की स्थिति में अमेरिका और अधिक ताकत का इस्तेमाल करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है। यदि सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित न रहकर पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा एवं व्यापार व्यवस्था पर पड़ सकता है।