भारत पहुँचे लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल (तस्वीर क्रेडिट@MEAIndia)

भारत पहुँचे लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री जेवियर बेटेल,जयशंकर के साथ होगी अहम वार्ता

नई दिल्ली,7 सितंबर (युआईटीवी)- लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल सोमवार सुबह नई दिल्ली पहुँचे,जहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। बेटेल भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर आए हैं। उनकी इस यात्रा को भारत और लक्जमबर्ग के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्रा के पहले दिन सोमवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में बेटेल और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीच महत्वपूर्ण वार्ता होगी। दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर जेवियर बेटेल के भारत पहुँचने की जानकारी साझा की। उन्होंने उनका स्वागत करते हुए कहा कि लक्जमबर्ग के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद संबंधों को और मजबूत करने का अच्छा अवसर प्रदान करती है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के मौजूदा क्षेत्रों की समीक्षा के साथ भविष्य में साझेदारी के नए रास्तों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

जेवियर बेटेल की यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब भारत और लक्जमबर्ग अपने द्विपक्षीय संबंधों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए क्षेत्रों तक विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश, वित्त, प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में बेटेल और जयशंकर के बीच होने वाली वार्ता को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विदेश मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, बेटेल मंगलवार को चेन्नई जाएँगे। वहाँ वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के परिसर का दौरा करेंगे। इस दौरान तकनीकी और शैक्षणिक क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा। भारत की तकनीकी क्षमता और लक्जमबर्ग की वित्तीय एवं डिजिटल विशेषज्ञता को देखते हुए दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में साझेदारी को भविष्य के लिए अहम माना जा रहा है।

जेवियर बेटेल की भारत यात्रा के संदर्भ में जनवरी में हुई विदेश मंत्री एस. जयशंकर की लक्जमबर्ग यात्रा भी महत्वपूर्ण रही थी। उस दौरान बेटेल ने भारत और लक्जमबर्ग के संबंधों को और गहरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने विशेष रूप से लक्जमबर्ग के तकनीकी,डिजिटल और वित्तीय क्षेत्रों के विकास में भारतीय समुदाय के योगदान को रेखांकित किया था।

जयशंकर की लक्जमबर्ग यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में बेटेल ने भारत के विदेश मंत्री का स्वागत करते हुए उनके पिछले वादे को याद किया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसे लोग पसंद हैं जो कुछ कहते हैं और उसे पूरा भी करते हैं। बेटेल ने कहा था कि जब दोनों नेता पिछले वर्ष दिल्ली में मिले थे,तब जयशंकर ने उनसे लक्जमबर्ग आने की बात कही थी और बाद में उन्होंने अपना वादा पूरा किया। उन्होंने इसके लिए जयशंकर की सराहना भी की थी।

बेटेल ने दोनों देशों के संबंधों के लंबे इतिहास का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि भारत और लक्जमबर्ग के बीच लंबे समय से संबंध रहे हैं और इन्हें भविष्य में और मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने लक्जमबर्ग में भारतीय मूल के लोगों की महत्वपूर्ण मौजूदगी का भी उल्लेख किया था। उनके अनुसार,भारतीय मूल के लोग लक्जमबर्ग में 10वां सबसे बड़ा समुदाय हैं। यह समुदाय दोनों देशों के बीच सामाजिक और मानवीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत और लक्जमबर्ग के बीच संबंध केवल राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। वित्तीय क्षेत्र में लक्जमबर्ग की विशेषज्ञता और भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की व्यापक संभावनाएँ पैदा करती है। इसके अलावा डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवाचार, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है।

जेवियर बेटेल ने पहले भी भारत के साथ संबंधों को और गहरा करने की इच्छा जताई है। उनकी मौजूदा यात्रा इसी दिशा में आगे बढ़ता कदम मानी जा रही है। हैदराबाद हाउस में जयशंकर के साथ होने वाली बातचीत के बाद दोनों देशों के संबंधों में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच विचारों का आदान-प्रदान हो सकता है।

तीन दिवसीय यात्रा के दौरान बेटेल का चेन्नई दौरा भी खास महत्व रखता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास जैसी प्रतिष्ठित संस्था का दौरा भारत की तकनीकी और शैक्षणिक क्षमताओं के प्रति लक्जमबर्ग की रुचि को दर्शाता है। आने वाले समय में दोनों देशों के संस्थानों के बीच अनुसंधान,नवाचार और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के अवसर तलाशे जा सकते हैं।

कुल मिलाकर,जेवियर बेटेल की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई गति देने का अवसर है। उनकी जयशंकर के साथ होने वाली वार्ता और चेन्नई में तकनीकी संस्थान का दौरा यह संकेत देता है कि भारत-लक्जमबर्ग संबंध अब पारंपरिक कूटनीतिक दायरे से आगे बढ़कर तकनीक,डिजिटल अर्थव्यवस्था,वित्त और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार हासिल कर रहे हैं। दोनों पक्षों की बातचीत से आने वाले समय में द्विपक्षीय सहयोग के नए अध्याय खुलने की उम्मीद है।