कैनबरा, 8 सितंबर (युआईटीवी)- ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले लोगों को जल्द ही यह तय करने का अधिकार मिल सकता है कि वे प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम द्वारा सुझाई गई सामग्री देखना चाहते हैं या केवल उन्हीं अकाउंट्स की पोस्ट देखना चाहते हैं, जिन्हें उन्होंने खुद फॉलो किया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मंगलवार को इस प्रस्तावित बदलाव की घोषणा की। सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य सोशल मीडिया यूजर्स को ऑनलाइन दुनिया में ज्यादा नियंत्रण और अपनी पसंद के मुताबिक सामग्री देखने का अधिकार देना है।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मंगलवार को संसद भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रस्तावित ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर कानून’ की घोषणा की। इस कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को 16 वर्ष से अधिक उम्र के यूजर्स को एल्गोरिदम आधारित फीड से बाहर निकलने का विकल्प देना होगा। यानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामग्री देखने के लिए यूजर को केवल कंपनी के एल्गोरिदम द्वारा तय की गई पोस्ट पर निर्भर नहीं रहना होगा। वह अपनी पसंद के अनुसार यह तय कर सकेगा कि उसे सुझाई गई सामग्री देखनी है या केवल फॉलो किए गए अकाउंट्स की पोस्ट।
प्रधानमंत्री ने इस प्रस्तावित कानून को यूजर्स के अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि इसका मकसद लोगों को ऑनलाइन गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण देना है। उन्होंने कहा कि यह ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के हाथों में ऑनलाइन विकल्प वापस देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों के एल्गोरिदम यूजर्स के व्यवहार और उनकी पसंद के आधार पर लगातार नई सामग्री सुझाते हैं, जिससे कई बार व्यक्ति ऐसी सामग्री भी देखने लगता है,जिसे उसने खुद खोजा या फॉलो नहीं किया होता।
संचार मंत्री अनिका वेल्स ने भी प्रस्तावित कानून के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स को हानिकारक सामग्री से पर्याप्त सुरक्षा मिले। सरकार ने ऐसे कंटेंट की कई श्रेणियों को विशेष रूप से चिंता का विषय बताया है। इनमें ईटिंग डिसऑर्डर को बढ़ावा देने वाली सामग्री,महिलाओं के प्रति घृणा या पुरुषवादी सोच को बढ़ावा देने वाला कंटेंट और अपराध का महिमामंडन करने वाली सामग्री शामिल है।
सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नाबालिग यूजर्स के लिए ऑनलाइन वातावरण को ज्यादा सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी उठानी होगी। नए कानून के तहत कंपनियों पर यह जिम्मेदारी होगी कि वे संभावित रूप से हानिकारक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए उचित कदम उठाएँ। इसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया पर मौजूद ऐसे कंटेंट से बचाना है,जिसका उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अनिका वेल्स ने कहा कि 16 वर्ष से अधिक उम्र के ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को एल्गोरिदम आधारित फीड को स्वीकार या अस्वीकार करने का आसान विकल्प दिया जाएगा। उनके मुताबिक,जब कोई यूजर सोशल मीडिया ऐप खोलेगा,तो प्लेटफॉर्म को उसे यह चुनने का अवसर देना होगा कि वह किस तरह की फीड देखना चाहता है। यूजर की पसंद के बाद कंपनी को उस विकल्प का सम्मान करना होगा।
उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों पर भी निशाना साधा। वेल्स ने आरोप लगाया कि तकनीकी कंपनियाँ लंबे समय से ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों पर अपने उत्पादों और सेवाओं का वास्तविक समय में परीक्षण करती रही हैं और इस दौरान पर्याप्त नियमन मौजूद नहीं था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में इस हद तक शामिल हो चुके हैं,जिसकी पहले कल्पना नहीं की गई थी। उनके अनुसार,अब बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने का वैश्विक दौर आने वाला है।
प्रस्तावित कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। सरकार के मुताबिक,नियमों का पालन नहीं करने वाली सोशल मीडिया कंपनियों पर 10 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य केवल कंपनियों पर आर्थिक दंड लगाना नहीं,बल्कि उन्हें अपने प्लेटफॉर्म की डिजाइन,सामग्री और यूजर्स की सुरक्षा को लेकर अधिक जिम्मेदार बनाना है।
सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा के मामले में ऑस्ट्रेलिया पहले ही दुनिया के सबसे सख्त कदमों में शामिल कानून लागू कर चुका है। अल्बनीज सरकार ने 2024 में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून पारित किया था। यह कानून दिसंबर 2025 में लागू हुआ। इसके तहत निर्धारित आयु सीमा से कम उम्र के बच्चों को प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने से रोकने की व्यवस्था की गई है और कंपनियों पर उम्र संबंधी नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी डाली गई है।
सरकार ने जून में यह संकेत भी दिया था कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर अधिकतम जुर्माने की राशि बढ़ाकर 9.9 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की जा सकती है। ऐसे में नया ‘डिजिटल ड्यूटी ऑफ केयर कानून’ ऑस्ट्रेलिया की व्यापक डिजिटल सुरक्षा नीति का अगला चरण माना जा रहा है।
सरकार की योजना से यह संकेत मिलता है कि ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया कंपनियों को केवल बच्चों की उम्र संबंधी सुरक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहता,बल्कि वयस्क यूजर्स को भी प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम पर अधिक नियंत्रण देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एल्गोरिदम आधारित फीड को लेकर दुनियाभर में यह बहस चलती रही है कि क्या यूजर्स को यह जानने और तय करने का अधिकार होना चाहिए कि उन्हें किस आधार पर सामग्री दिखाई जाए।
यदि प्रस्तावित नियम लागू होते हैं,तो सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म की फीड व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़ सकते हैं। यूजर्स को ऐप खोलते समय ही फीड के विकल्पों के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी और उनकी पसंद के मुताबिक सामग्री उपलब्ध करानी होगी। इससे सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के तरीके में भी बदलाव आने की संभावना है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार का कहना है कि डिजिटल दुनिया में तकनीकी कंपनियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और इसके साथ उनकी जिम्मेदारियाँ भी बढ़नी चाहिए। बच्चों को हानिकारक सामग्री से बचाने के साथ-साथ यूजर्स को एल्गोरिदम के प्रभाव से बाहर निकलने का विकल्प देना इसी दिशा में उठाया गया कदम है। अब इस प्रस्तावित कानून पर आगे की संसदीय प्रक्रिया और नियमों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इसे किस रूप में लागू किया जाता है और सोशल मीडिया कंपनियों पर इसका कितना व्यापक असर पड़ता है।
