नई दिल्ली,8 सितंबर (युआईटीवी)- दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बिल्डिंग गिरने की घटना के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता और उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं, उनके बेटे महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करते हुए अलग-अलग हिरासत की माँग की थी। पुलिस की दलील थी कि मामले की जाँच के लिए महेश गुप्ता से हिरासत में पूछताछ जरूरी है,जबकि हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने पुलिस की मांग को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
पुलिस के मुताबिक,महेश गुप्ता की भूमिका इस मामले में अहम मानी जा रही है। जाँच एजेंसियों को शक है कि इमारत में हुए अवैध निर्माण और वहाँ संचालित हो रहे पीजी से उसका सीधा संबंध था। इसी वजह से पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत में किस तरह के निर्माण किए गए थे,उनकी अनुमति ली गई थी या नहीं और पीजी के संचालन से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं। पुलिस को उम्मीद है कि महेश गुप्ता से पूछताछ के दौरान हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का पता चल सकता है।
सत्य निकेतन में हुई इस घटना ने राजधानी दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित पीजी और किराये के आवासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद प्रशासन की ओर से इमारतों की सुरक्षा और पीजी व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। खास तौर पर उन इलाकों में सुरक्षा मानकों की जाँच पर जोर दिया जा रहा है, जहाँ बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों और शहरों से आने वाले छात्र किराये के मकानों या पीजी में रहते हैं।
इसी बीच दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद सोमवार को हादसे में घायल लोगों का हालचाल जानने के लिए एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुँचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती चार मरीजों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि फिलहाल चार मरीज अस्पताल में भर्ती हैं,जिनमें से एक मरीज आईसीयू में है। उन्होंने सभी मरीजों और उनके परिवारों से मुलाकात कर इलाज और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली।
आशीष सूद ने बताया कि घायलों के परिवार के सदस्य भी अस्पताल पहुँच चुके हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ओर से एम्स में उनके रहने की व्यवस्था की गई है,ताकि उन्हें इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि मरीजों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और सरकार घायलों के इलाज तथा उनके परिवारों की जरूरतों को लेकर लगातार नजर बनाए हुए है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा को लेकर समीक्षा बैठक भी की। मंत्री आशीष सूद ने बताया कि उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिस्सा लिया। बैठक में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के महानिदेशक,दिल्ली पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में सत्य निकेतन जैसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर सुरक्षा उपायों पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान दिल्ली भर में इमारतों की सुरक्षा,छात्रों के रहने की व्यवस्था और पीजी से संबंधित नियमों की समीक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। सरकार का ध्यान खास तौर पर छात्रों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने पर है। दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार की तैयारी के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित और नियमों के अनुरूप आवास उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
आशीष सूद ने बताया कि बैठक में तय किए गए उपायों को लागू करने के लिए वह संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति का नेतृत्व करेंगे। यह समिति संस्थागत पीजी से जुड़े दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगी। इसके अलावा विश्वविद्यालयों,नगर निगम और दिल्ली विकास प्राधिकरण के माध्यम से छात्रों के रहने के वैकल्पिक इंतजामों की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। सरकार यह भी आकलन करेगी कि दिल्ली विकास प्राधिकरण के खाली पड़े मकानों का इस्तेमाल छात्रों के आवास के लिए किस तरह किया जा सकता है।
सरकार की योजना का एक अहम हिस्सा पीजी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। फिलहाल दिल्ली के कई इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र निजी पीजी और किराये के मकानों में रहते हैं। ऐसे आवासों में भवन की मजबूती,अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है, इस पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सत्य निकेतन की घटना ने इन व्यवस्थाओं की निगरानी और नियमन को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।
मंत्री आशीष सूद ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि सरकार का प्रयास आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने के समय को कम करना और आपदा के दौरान तैयारियों को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि केवल हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य करना पर्याप्त नहीं है,बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से सुरक्षा उपायों को मजबूत करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से भवनों की सुरक्षा और पीजी आवासों के नियमन पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली में पढ़ाई और करियर बनाने के लिए आने वाले छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएँ मिलनी चाहिए। सरकार छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था करने के साथ-साथ पीजी संचालकों के लिए स्पष्ट नियमों और उनकी निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करने पर विचार कर रही है। इसके लिए संबंधित विभागों और संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
सत्य निकेतन हादसे की जाँच के दौरान अब पुलिस की नजर इमारत के निर्माण,पीजी संचालन और उससे जुड़े दस्तावेजों पर है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इमारत में कोई ऐसा निर्माण तो नहीं कराया गया था,जिसने उसकी संरचना को कमजोर किया हो। साथ ही यह भी जाँच का विषय है कि पीजी संचालन के लिए जरूरी नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। महेश गुप्ता को पुलिस कस्टडी में भेजे जाने के बाद इन सभी पहलुओं पर पूछताछ तेज होने की संभावना है।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि महेश गुप्ता से पुलिस पूछताछ करेगी। दूसरी ओर,सरकार हादसे के बाद व्यापक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की तैयारी में है। सत्य निकेतन की घटना ने न केवल एक इमारत की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं,बल्कि राजधानी में छात्रों के लिए संचालित पीजी और वैकल्पिक आवासीय व्यवस्था की जरूरत को भी सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में जाँच और प्रशासनिक समीक्षा के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि हादसे के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और दिल्ली में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार कौन से ठोस कदम उठाती है।
