इसरो ने 220 केएन थ्रस्ट पर सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया (तस्वीर क्रेडिट@isro)

इसरो ने 220 केएन थ्रस्ट पर सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया,एलवीएम3 मिशन को मिली मजबूती

नई दिल्ली,11 सितंबर (युआईटीवी)- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अंतरिक्ष अभियानों के लिए अपनी प्रक्षेपण क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। इसरो ने गुरुवार को बताया कि उसने सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 किलो न्यूटन की बढ़ी हुई क्षमता वाले थ्रस्ट पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट’ सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण आगामी एलवीएम3 मिशन की तैयारियों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। परीक्षण के सफल होने से उड़ान से पहले इंजन की क्षमता और प्रदर्शन को लेकर जरूरी सत्यापन पूरा हुआ है।

इसरो के मुताबिक,यह परीक्षण 9 सितंबर को तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में किया गया। परीक्षण के लिए इस्तेमाल किया गया सीई20 क्रायोजेनिक इंजन आगामी एलवीएम3 मिशन के सी32 ऊपरी चरण के लिए निर्धारित किया गया है। इस परीक्षण के दौरान इंजन को 220 किलो न्यूटन के ऑपरेटेड थ्रस्ट पर चलाया गया। बढ़ी हुई थ्रस्ट क्षमता के साथ किए गए इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि इंजन वास्तविक उड़ान से पहले निर्धारित प्रदर्शन मानकों पर सफलतापूर्वक काम करने में सक्षम है।

सीई20 इंजन एलवीएम3 प्रक्षेपण यान के ऊपरी चरण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रणोदन प्रणाली है। क्रायोजेनिक इंजन में बेहद कम तापमान पर रखे जाने वाले ईंधन और ऑक्सीडाइजर का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक के जरिए अपेक्षाकृत अधिक दक्षता हासिल की जा सकती है,जिससे भारी उपग्रहों और अन्य अंतरिक्ष पेलोड को कक्षा में पहुंचाने की क्षमता बढ़ती है। ऐसे में इंजन की बढ़ी हुई थ्रस्ट क्षमता एलवीएम3 के भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

इसरो ने परीक्षण की जानकारी साझा करते हुए बताया कि आगामी एलवीएम3 मिशन के सी32 ऊपरी चरण के लिए निर्धारित सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 किलो न्यूटन के ऑपरेटेड थ्रस्ट पर फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया गया। एजेंसी के अनुसार,इस तरह के परीक्षणों का उद्देश्य उड़ान में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजन के प्रदर्शन को अंतिम रूप से परखना और यह सुनिश्चित करना होता है कि वह मिशन की आवश्यकताओं के अनुरूप काम कर सके।

इसी परीक्षण के दौरान इसरो ने एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल के प्रदर्शन का भी सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया। यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के सी32 चरण के लिए तैयार किया गया है। एलओएक्स यानी तरल ऑक्सीजन टैंक से जुड़ी यह प्रणाली मिशन के दौरान जरूरी दबाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए एक ही परीक्षण के दौरान इंजन के साथ इस मॉड्यूल का सफल प्रदर्शन भी आगामी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इसरो लगातार अपने प्रक्षेपण यानों और प्रणोदन प्रणालियों को अधिक सक्षम बनाने पर काम कर रहा है। एलवीएम3 भारत के भारी अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रमुख प्रक्षेपण यानों में से एक है। इसकी क्षमता के कारण यह भारी उपग्रहों और भविष्य के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के संदर्भ में भी एलवीएम3 की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में इसके ऊपरी चरण के इंजन की क्षमता और विश्वसनीयता को बढ़ाना भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्राथमिकताओं में शामिल है।

गगनयान मिशन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी की जा रही है। इस मिशन के लिए प्रक्षेपण प्रणाली, प्रणोदन, जीवन समर्थन और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों का लगातार परीक्षण और सत्यापन किया जा रहा है। सीई20 इंजन तथा इससे संबंधित प्रणालियों के परीक्षण की सफलता इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा है।

इसरो की मौजूदा गतिविधियां केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान तक सीमित नहीं हैं। एजेंसी भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं के व्यापक विस्तार पर काम कर रही है। इसमें अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यानों और प्रणोदन प्रणालियों का विकास,चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की खोज, मानव अंतरिक्ष उड़ान और भविष्य में प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्य शामिल हैं। इन सभी महत्वाकांक्षी अभियानों के लिए विश्वसनीय और अधिक शक्तिशाली प्रक्षेपण प्रणालियों की जरूरत होगी।

एलवीएम3 इसी दिशा में भारत की महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक है। आने वाले समय में इस प्रक्षेपण यान का इस्तेमाल भारी पेलोड के साथ-साथ देश के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम से जुड़े अभियानों में भी किया जाना है। इसलिए सीई20 क्रायोजेनिक इंजन की बढ़ी हुई थ्रस्ट क्षमता का सफल परीक्षण भविष्य के मिशनों की तैयारी के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।

इसरो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों,स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों का उद्देश्य एक व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इसके तहत निजी उद्योग और स्टार्टअप अंतरिक्ष गतिविधियों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएँ,जबकि इसरो उन्नत अनुसंधान,नई तकनीकों और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर अपना ध्यान केंद्रित करे। इससे देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

220 किलो न्यूटन थ्रस्ट पर सीई20 इंजन का सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट इसी व्यापक प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। परीक्षण से यह पुष्टि हुई है कि इंजन बढ़ी हुई क्षमता पर निर्धारित प्रदर्शन करने में सक्षम है। साथ ही,एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल का सफल प्रदर्शन भी भविष्य के मिशनों के लिए उपयोगी तकनीकी उपलब्धि है।

इस सफलता के साथ इसरो आगामी एलवीएम3 मिशन की तैयारियों में एक और महत्वपूर्ण चरण पार कर चुका है। भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारी प्रक्षेपण यान, उन्नत क्रायोजेनिक इंजन और विश्वसनीय प्रणोदन प्रणालियाँ आने वाले वर्षों में अहम भूमिका निभाने वाली हैं। सीई20 का यह सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक को और मजबूत करने के साथ देश के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान,चंद्र अभियान और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन जैसे कार्यक्रमों की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।