नई दिल्ली,12 सितंबर (युआईटीवी)- नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तेजी से मजबूत होते संबंधों को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा,प्रौद्योगिकी और रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने के साथ-साथ क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
बैठक से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया और गले मिलकर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह आत्मीयता भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक संबंधों को भी दर्शाती है। बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इससे बातचीत के दौरान दोनों देशों के रणनीतिक और सुरक्षा हितों से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता मिलने का संकेत मिला।
शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान शुक्रवार को नई दिल्ली पहुँचे थे। वह भारत की अध्यक्षता में आयोजित किए जा रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए हैं। नई दिल्ली पहुँचने पर उनका औपचारिक और गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उनकी यात्रा ऐसे समय में हो रही है,जब भारत और संयुक्त अरब अमीरात के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान व्यापार और निवेश से लेकर रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी तथा रणनीतिक सहयोग तक कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
शेख खालिद की भारत यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, नई प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत के लिए संयुक्त अरब अमीरात खाड़ी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है,जबकि संयुक्त अरब अमीरात के लिए भारत एक बड़ा व्यापारिक और निवेश बाजार होने के साथ-साथ दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग का अहम केंद्र है।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात ब्रिक्स के प्रमुख सदस्य देशों में शामिल है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। भारत की अध्यक्षता की थीम ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखी गई है। इस थीम के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों के बीच विकास, सहयोग और स्थायी समाधान पर जोर देने की कोशिश की जा रही है।
शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के नेता साझा प्राथमिकताओं,आर्थिक सहयोग, विकास, नवाचार और वैश्विक शासन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। इसके साथ ही क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बदल रहे हालात पर भी चर्चा हो रही है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान विकास को आम लोगों से जोड़ने और ‘मानवता सर्वोपरि’ की भावना को प्रमुखता देने पर जोर दिया है। ऐसे में ब्रिक्स के मंच से भारत की कोशिश आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण के हितों को भी मजबूती से सामने रखने की है।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच भी इस वर्ष कई महत्वपूर्ण मुलाकातें हो चुकी हैं। 16 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इस बैठक में दोनों ने भारत-यूएई संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस मुलाकात के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर सकारात्मक रुख जताया था। उन्होंने कहा था कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को कई क्षेत्रों में और आगे बढ़ाने की संभावनाएँ हैं। दोनों देशों के बीच शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर लगातार हो रही मुलाकातों से यह स्पष्ट है कि द्विपक्षीय संबंधों को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रखा जा रहा,बल्कि इसमें रणनीतिक और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को भी लगातार जोड़ा जा रहा है।
वर्ष 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच यह तीसरी मुलाकात थी। इससे पहले जनवरी में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति भारत आए थे,जबकि मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की थी। इन लगातार उच्चस्तरीय यात्राओं और बैठकों ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद को गति देने के साथ-साथ आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग को भी नई दिशा दी है।
दोनों देशों के बीच हुई पिछली उच्चस्तरीय बातचीत में प्रौद्योगिकी, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई थी। इन क्षेत्रों में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के हित कई स्तरों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और निवेश के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग आने वाले समय में और बढ़ने की संभावना है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और संयुक्त अरब अमीरात की ऊर्जा क्षमता को देखते हुए यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी दोनों देश नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, उन्नत तकनीक, नवाचार और आधुनिक औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत होती रही है। इसी तरह रक्षा क्षेत्र में सहयोग भी भारत-यूएई संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ने से हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता तथा समुद्री सुरक्षा से जुड़े साझा हितों को भी मजबूती मिल सकती है।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आपसी हित से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए। पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ,ऊर्जा सुरक्षा और बदलते भू-राजनीतिक समीकरण जैसे मुद्दे दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात दोनों ही स्थिरता,आर्थिक विकास और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने में रुचि रखते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद भविष्य की साझा प्राथमिकताओं को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की नई दिल्ली यात्रा ब्रिक्स के व्यापक मंच और भारत-यूएई द्विपक्षीय संबंधों, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। एक तरफ यह यात्रा ब्रिक्स के भीतर भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सहयोग को मजबूत करने का अवसर प्रदान कर रही है,वहीं दूसरी ओर इससे दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ता राजनीतिक विश्वास,मजबूत आर्थिक जुड़ाव और रणनीतिक सहयोग आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक स्वरूप दे सकता है।
