नई दिल्ली,12 सितंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई इस मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक को बेहद सार्थक बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने तथा भारत-रूस आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 को आगे बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और संस्कृति समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी दोनों नेताओं ने विचार-विमर्श किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि बिश्केक में हुई पिछली मुलाकात के दो सप्ताह से भी कम समय बाद दिल्ली में राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर उन्हें खुशी हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 के क्रियान्वयन पर बातचीत हुई। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान वैश्विक कल्याण को आगे बढ़ाने के प्रयासों को लेकर भी अपने विचार साझा किए।
प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी में लगातार आ रही तेजी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन के साथ उन्होंने इनोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी का दौरा किया और वहाँ भाग लेने वाली दोनों देशों की कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। प्रधानमंत्री के मुताबिक,यह प्रदर्शनी भारत और रूस के बीच कारोबारी साझेदारी की बढ़ती गहराई और दोनों देशों के उद्योगों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार,बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। राजनीतिक और आर्थिक संबंधों के अलावा रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल एवं श्रम गतिशीलता और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ नए क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं पर भी विचार किया।
बैठक में भारत में पहली बार आयोजित रूस की अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी इनोप्रोम इंडिया का भी उल्लेख हुआ। यह प्रदर्शनी 9 से 11 सितंबर तक आयोजित की गई। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत और रूस के बीच व्यापार तथा औद्योगिक सहयोग को और विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने प्रदर्शनी का दौरा किया और वहाँ मौजूद प्रतिभागियों से बातचीत की। दोनों नेताओं की इस मौजूदगी को दोनों देशों के कारोबारी और औद्योगिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करना दोनों देशों की मौजूदा प्राथमिकताओं में शामिल है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलावों और आपूर्ति शृंखलाओं में आ रही चुनौतियों के बीच दोनों देश व्यापार तथा निवेश के नए अवसर तलाश रहे हैं। आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030 इसी व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। इसके जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार,निवेश और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को गति देने की कोशिश की जा रही है।
बैठक में भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत बहुपक्षीय सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 12 तथा 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। रूस ब्रिक्स का प्रमुख सदस्य है और भारत की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है। दोनों नेताओं ने ब्रिक्स के माध्यम से वैश्विक सहयोग को मजबूत करने और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार किया।
मोदी और पुतिन की बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र में जारी संघर्षों समेत कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे भी चर्चा में आए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन संघर्षों का असर समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी पड़ा है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार की निरंतरता भारत के लिए महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा कि संघर्षों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति से निकलता है। भारत ने लगातार विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों को बातचीत के जरिए हल करने की वकालत की है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। इस संदेश के जरिए भारत ने वैश्विक तनावों के बीच अपने संतुलित और कूटनीतिक दृष्टिकोण को फिर सामने रखा।
दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए लगातार संपर्क में बने रहने पर भी सहमति जताई। दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनीतिक, रक्षा, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में मजबूत संबंध रहे हैं। बदलते भू-राजनीतिक माहौल और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बावजूद दोनों पक्ष इस साझेदारी को स्थिर और लचीला बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।
मोदी-पुतिन की ताजा बैठक ऐसे समय में हुई है,जब वैश्विक स्तर पर कई क्षेत्रों में तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है। पश्चिम एशिया से लेकर काला सागर क्षेत्र तक जारी संघर्षों ने ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। ऐसे माहौल में भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संवाद को दोनों देशों के हितों के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कुल मिलाकर,नई दिल्ली में हुई मोदी-पुतिन बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को नई गति देने से लेकर रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ ही ब्रिक्स के मंच पर बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद तथा कूटनीति को आगे बढ़ाने पर भी दोनों देशों ने जोर दिया। यह बैठक एक बार फिर संकेत देती है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और रूस अपने विशेष रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
